रांची: बहुचर्चित शराब घोटाले की जांच में तेजी लाते हुए एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने शुक्रवार को निलंबित आईएएस अधिकारी विनय कुमार चौबे से लंबी पूछताछ की। एसीबी की टीम सुबह करीब 10:30 बजे उन्हें रिम्स से अपने मुख्यालय लेकर पहुंची, जहां उनसे घंटों तक पूछताछ की गई।
सूत्रों के अनुसार, एसीबी ने विनय चौबे से पूछा कि उनके प्रधान सचिव रहते हुए विजन हॉस्पिटैलिटी सर्विसेज एंड कंसल्टेंट प्रा.लि. और मार्शन इनोवेटिव सिक्योरिटी सर्विसेस प्रा.लि. जैसी दो प्लेसमेंट एजेंसियों ने कथित तौर पर फर्जी बैंक गारंटी के माध्यम से सरकार को करोड़ों का नुकसान कैसे पहुंचाया। इस पर चौबे ने जवाब दिया कि अगर कोई घोटाला हुआ है तो इसकी जांच केंद्रीय एजेंसी से कराई जा सकती है। उन्होंने किसी भी तरह की अनियमितता से इनकार किया।
एसीबी अधिकारियों ने चौबे को 38.44 करोड़ रुपये के कथित घोटाले से संबंधित साक्ष्य भी दिखाए, लेकिन उन्होंने अपने कार्यकाल में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी से इनकार करते हुए कहा कि “ऐसा कुछ नहीं हुआ”।
एसीबी ने झारखंड उत्पाद नीति 2022 के क्रियान्वयन और एजेंसी चयन में हुई संभावित गड़बड़ियों पर भी सवाल किए, जिस पर चौबे ने वही रुख अपनाया।
पूछे गए प्रमुख सवाल:
खुदरा नीति के तहत न्यूनतम गारंटीकृत राजस्व का मासिक मूल्यांकन क्यों नहीं हुआ?
लगातार हो रही राजस्व कमी के बावजूद वसूली के लिए ठोस कदम क्यों नहीं उठाए गए?
क्या विभाग में जानबूझ कर लापरवाही की गई या फिर यह संगठित अपराध था?
क्या अधिकारियों ने निजी एजेंसियों को जानबूझ कर बचाने की कोशिश की?
इस बीच, उत्पाद विभाग के संयुक्त आयुक्त गजेंद्र सिंह से लगातार दूसरे दिन पूछताछ की गई। गजेंद्र ने दावा किया कि उन्होंने वही किया जो उन्हें वरीय अधिकारियों द्वारा आदेशित किया गया था। जब उनसे पूछा गया कि बैंक गारंटी की आरबीआई के एसएफएमएस नेटवर्क से जांच क्यों नहीं की गई, तो वे चुप रहे। उन्होंने दोहराया कि उनके कार्यकाल में विभागीय कार्य कानून के दायरे में रहकर ही किए गए।
एसीबी ने कारोबारी विनय कुमार सिंह से भी पूछताछ की। सूत्रों के अनुसार, उनसे शराब कारोबार में उनकी भूमिका और कथित अवैध वसूली की रकम को कागजी कंपनियों में खपाने के तरीके को लेकर सवाल किए गए। इससे पहले आईएएस विनय चौबे के रिश्तेदार क्षिपिज त्रिवेदी से भी पूछताछ हो चुकी है।
शनिवार को एसीबी शराब कंपनी श्रीलैब बाटलर्स के संचालक उमाशंकर सिंह से पूछताछ करेगी। जांच एजेंसी अधिकारियों और एजेंसियों के बीच सांठगांठ, राजस्व में गड़बड़ी और अवैध वसूली के तंत्र की गहराई से जांच कर रही है, ताकि वह अपनी रिपोर्ट में ठोस निष्कर्ष प्रस्तुत कर सके।



















