देश की सबसे बड़ी 100 फीट की स्लीपिंग बुद्धा के साथ – साथ अब भगवान बुद्ध से जुड़े चार महा तीर्थों का एक ही स्थान पर दर्शन

देश की सबसे बड़ी 100 फीट की स्लीपिंग बुद्धा के साथ – साथ अब भगवान बुद्ध से जुड़े चार महा तीर्थों का एक ही स्थान पर दर्शन

गयाजी : बिहार के बोधगया में देश की सबसे बड़ी स्लीपिंग बुद्धा प्रतिमा है। इस प्रतिमा में भगवान बुद्ध शयनमुद्रा में है। अब इसी स्थान पर बौद्ध श्रद्धालु और पर्यटक भगवान बुद्ध के चार महा तीर्थों का दर्शन कर सकेंगे।

100 फीट स्लीपिंग बुद्धा के साथ-साथ चार महातीर्थों का दर्शन

बोधगया के अमवा के पास वर्ष 2023 में भगवान बुद्ध की देश की सबसे बड़ी भगवान बुद्ध की शयन मुद्रा में रही प्रतिमा का अनावरण किया गया था। इस तरह की प्रतिमा देश भर में कहीं नहीं है। इस प्रतिमा के दर्शन के लिए भारी तादाद में बौद्ध श्रद्धालु और पर्यटक आते हैं। अब इसी स्थान पर भगवान बुद्ध से जुड़े चार महा तीर्थों का दर्शन बौद्ध श्रद्धालु व पर्यटक कर सकेंगे। 100 फीट लंबी शयन मुद्रा में रही भगवान बुद्ध की प्रतिमा के ठीक समीप में भगवान बुद्ध से जुड़े चार महा तीर्थ लुंबिनी, सारनाथ, कुशीनगर, बोधगया से जुड़ी भगवान बुद्ध की झलकियां देखने को मिलेगी। इसके लिए लुंबिनी, सारनाथ, कुशीनगर, बोधगया से जुड़े भगवान बुद्ध की विविध प्रतिमा बनाई गई है। जो पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

बौद्ध श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि

बौद्ध श्रद्धालुओं और पर्यटकों को खुशी है, कि एक ही स्थान पर भगवान बुद्ध से जुड़े चार महा तीर्थों के दर्शन और उसके संबंध में जानकारी हो सकेगी। इसे लेकर बोधिसत्व के फाउंडर सचिव आर्यपाल भिक्षु का मानना है, कि इस तरह की संभवत: एक स्थान पर कहीं झलकियां नहीं दिखती है। इसके बनने से अब यहां सबसे ज्यादा बौद्ध श्रद्धालुओं-पर्यटकों का आना शुरू हो गया है। आर्यपाल भिक्षु बताते हैं, कि नेपाल के लुंबिनी में भगवान बुद्ध का जन्म स्थान है। वहां से जुड़े तथ्यों को यहां दर्शाया गया है। कई तरह की प्रतिमाएं बनाई गई है। इसी प्रकार सारनाथ से जुड़े तथ्यों को भी दर्शाया गया है। भगवान बुद्ध ने अपने पांच शिष्यों को यहां प्रवचन दिया था। भगवान बुद्ध की प्रतिमा पांच शिष्यों के साथ है। इसी प्रकार बोधगया में भगवान बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी, तो उस मुद्रा में भगवान बुद्ध की प्रतिमा भी हमारे यहां है।

क्यों न एक जगह हो भगवान बुद्ध के चारों महा तीर्थ के दर्शन

आर्यपाल भिक्षु बताते हैं कि सबसे पहले यहां देश की सबसे बड़ी भगवान बुद्ध की शयन मुद्रा में रही प्रतिमा स्थापित की गई। यह प्रतिमा एकदम से अनोखी है। भगवान बुद्ध आराम की मुद्रा में है। इस प्रतिमा को देखने के लिए काफी संख्या में बौद्ध श्रद्धालु और पर्यटक आते हैं। ऐसे में उन्हें लगा, कि क्यों न अब भगवान बुद्ध से जुड़े चार महा तीर्थों का भी दर्शन बौद्ध श्रद्धालुओं और पर्यटकों को कराया जाए। इसके बाद इस पर निर्णय लिया गया और फिर साल भर पहले से ही निर्माण कार्य शुरू हुआ था। अब अंतिम चरण में यह निर्माण कार्य पहुंचा है।

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आशीष कुमार की रिपोर्ट

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