निरसाः गलफरबाड़ी पुलिस की कार्यशैली से नाराज स्थानीय लोगों ने शव के साथ ओपी परिसर में जबर्दस्त हंगामा किया. आक्रोशित भीड़ ने ओपी प्रभारी संजय उरांव पर मामले में गंभीरता नहीं बरतने का आरोप लगाते हुए तोड़फोड़ शुरु कर दी. पुलिस के साथ हाथापाई भी हुई. जमावड़ा और उग्र प्रदर्शन को देखते ओपी परिसर पूरी तरह से पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया. आक्रोशित भीड़ शव को ओपी परिसर में रखकर धरने पर बैठ गई
आक्रोशित लोगों ने शव के साथ किया प्रर्दशन
बता दें कि गलफरबाड़ी पुलिस की कार्यशैली से नाराज पानी टंकी निवासी सुजीत उर्फ मंटू ने शनिवार को अपने घर में गले में फंदा डाल कर आत्महत्या करने की कोशिश की थी, आसपास के लोग और परिजनों ने फंदे से उतार कर धनबाद पीएमसीएच में भर्ती कराया था. मंगलवार को अस्पताल में मंटू की मौत हो गई.

बताया जाता है कि एक माह पूर्व मंटू दुबे के साथ उसके चचेरे भाई रंजीत दुबे और उसके दोस्त संदीप रजक का झगड़ा हुआ था. जिसमें दोनों पक्षों की ओर से गलफरबाड़ी ओपी में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी. मंटू की पत्नी ने दोनों आरोपियों पर बलात्कार करने के प्रयास का आरोप लगाया था.
दोनों आरोपी पुलिस की नजर में तो फरार चल रहे थे, वास्तिवकता में दोनों ही खुलेआम घुम रहे थे. आरोप है कि रंजीत एवं संदीप ने मंटू से कहा था कि पुलिस कुछ नहीं बिगाड़ सकती. ओपी प्रभारी से लेकर आला अफसरों को रुपए दिये जा चुके है. जब यह बात की गई तब मंटू नशे में था और यह बात उसके दिल से लग गई.

मृतक मंटू ने अपनी पत्नी और पिता से कहा था कि पुलिस कोई कार्रवाई नहीं कर रही है, जबकि आरोपियों द्वारा उसे जलील किया जा रहा है. वह जलालत की जिंदगी नहीं जी सकता, गुस्से में वह जान देने के लिए रेलवे ट्रैक की ओर दौड़ा. लोगों ने उसे किसी तरह घर लाया. लेकिन, वह जान देने की जिद पर अड़ा रहा. मौका देख मंटू ने खुद को कमरे में बंद कर फंदे से झूल गया.
रिपोर्ट:-संदीप कुमार शर्मा,निरसा
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