
पटना सिटी : मकर संक्रांति का पर्व अब धीरे-धीरे नजदीक आने लगा है। हर साल मकर संक्रांति का पर्व 14 या 15 जनवरी को मनाया जाता है। ऐसे तो मकर संक्रांति का पर्व हर साल 14 जनवरी को ही मनाया जाता है। मकर संक्रांति आते ही तिलकुट की मिठास कुछ ज्यादा ही बढ़ जाती है। इस बीच पटना सिटी में तिलकुट बनाने का काम जोरों पर है। कारीगर तिलकुट बनाने के कामों में पूरी तरह से लग गए हैं।
पटना सिटी में तिलकुट के भंडार कहे जाने वाले क्षेत्र में तिलकुट की कुटाई जोर-शोर से शुरू हो चुका है
आपको बता दें कि पटना सिटी में तिलकुट के भंडार कहे जाने वाले क्षेत्र में तिलकुट की कुटाई जोर-शोर से शुरू हो चुका है। दो महीने पहले से ही तिलकुट कुटाई के लिए प्रबंध कर लिया जाता है। व्यापारियों के द्वारा का तिल पापड़ी का स्पेशल तिलकुट यहां बनाया जाता है। साथ में यहां होलसेल की संख्या ज्यादा है। दूर दराज से लेकर बाहर विदेश तक तिलकुट यहां का भेजा जाता है। काफी मशहूर तिलकुट होता है। उसकी वजह यह है कि यहां तिलकुट की कुटाई सही तरीके से की जाती है और तिल की मात्रा ज्यादा होता है। साथ ही साफ-सफाई का पूरा ख्याल रखा जाता है।

तिलकुट में किसी तरह का गंदगी ना हो इसका पूरा ख्याल रखा जाता है – तिलकुट व्यापारी
वहीं तिलकुट व्यापारी का कहना है कि तिलकुट में किसी तरह का गंदगी ना हो इसका पूरा ख्याल रखा जाता है। बाहर से लोग आते हैं। व्यापारी ने कहा कि कुछ व्यापारी यहां तिलकुट का भरपुर ऑर्डर देकर जाते हैं। उसके बाद यहां से गाड़ी के द्वारा तिलकुट की सप्लाई होलसेल रूप में की जाती है। तिलकुट व्यापारियों का कहना है कि उत्तम प्रकार के तिलकुट यहां बनाई जाती है। इसमें इस बात का ख्याल रखा जाता है कि किसी तरह की तिलकुट में शिकायत नहीं हो। उपभोक्ताओं से शिकायत नहीं मिले। उत्तम प्रकार की तिलकुट बनाई जाती है। गुड़, चीनी, शुगर फ्री, मेवा, खोवा और केसरिया तिलकुट यहां की फेमस तिलकुट है।

एक जमाने में यहां का तिलकुट पूर्व PM अटल बिहारी को भी भेजा जाता था – व्यापारी
दरअसल, व्यापारी ने कहा कि तिलकुट एक जमाने में पूर्व पीएम स्व. अटल बिहारी वाजपेयी तक को भेजा जाता था। दिल्ली के नेताओं में केसरिया तिलकुट बहुत फेमस हुआ करता है जो पटना सिटी से ही जाता है। तिलकुट का बाजार यहां सज चुका है। काफी संख्या में कारीगर तिलकुट की कुटाई करते नजर आ रहे हैं। तिलकुट बनाने की जो चाशनी होती है उसको फेटने का जो हिसाब है वह अलग तरीका का होता है।
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उमेश चौबे की रिपोर्ट
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