Bangladesh to be Islamic Country : संविधान से हटेगा धर्मनिरपेक्ष शब्द ! अंतरिम सरकार ने दायर की याचिका

डिजीटल डेस्क : Bangladesh to be Islamic Country – बांग्लादेश के संविधान से हटेगा धर्मनिरपेक्ष शब्द ! अंतरिम सरकार ने दायर की याचिका। प्रधानमंत्री शेख हसीना के बांग्लादेश से अपदस्थ होने एवं नोबेल विजेता अर्थशास्त्री मोहम्मद यूनुस की अगुवाई वाले अंतरिम सरकार के गठन के बाद से ही वहां उथल-पुथल की स्थिति बनी हुई है।

कई पुराने फैसले ताबड़तोड़ और आमूलचूल तरीके से बदलने पर पूरा फोकस है। इस क्रम में अब नई बात सामने आई है। बांग्लादेश के संविधान के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप को खत्म करने की तैयारी शुरू कर दी गई है और अंतरिम सरकार की ओर से उच्च न्यायालय में इस संबंधी बाकायदा याचिका दायर कर दी गई है।

यही नहीं, उच्च न्यायालय में इस याचिका के संबंध में सत्तारूढ़ अंतरिम बांग्लादेशी सरकार की ओर से अटॉर्नी जनरल ने धर्मनिरेपक्ष शब्द को हटाने के संबंध में तर्क भी प्रस्तुत किए हैं।

Bangladesh to be Islamic Country : नई सरकार बोली- बांग्लादेशी संविधान के लिए बेमतलब है धर्मनिरपेक्ष शब्द

बांग्लादेश के हाईकोर्ट में अंतरिम सरकार की ओर से दायर याचिका के पक्ष में गुरूवार को न्यायमूर्ति देवाशीष राय चौधरी और फराह महबूब की बेंच के सामने अटार्नी जनरल मोहम्मद असदुज्जमां ने दलीलें पेश कीं।

अपनी दलील में अटॉर्नी जनरल असदुज्जमां ने कहा कि – ‘…बांग्लादेश के संविधान में धर्मनिरपेक्ष शब्द को रखने का कोई मतलब नहीं है। इस देश में 90 फीसदी मुसलमान हैं।

संविधान में पहले अल्लाह के प्रति अविचल आस्था और विश्वास की बात कही गई थी… तात्पर्य बस इतना है कि अब फिर से उसी को जस के तस वाले रूप में संविधान में बनाए रखा जाए।

…बांग्लादेश के संविधान में धर्मनिरपेक्ष शब्द को जोड़ने के लिए किया गया 50वां संशोधन बांग्लादेश संविधान के मूल भावना के साथ किया गया कुठाराघात था…उससे तनिक कुछ भी कम न था।

…अब देश में सत्ता-परिवर्तन के बाद मुक्ति-संग्राम, धर्मनिरेपक्षता और समाजतांत्रिक चेतना का कोई मतलब नहीं है…’।

बांग्लादेश की अपदस्थ पीएम शेख हसीना की फाइल फोटो
Bangladesh to be Islamic Country : बांग्लादेश की अपदस्थ पीएम शेख हसीना की फाइल फोटो
Bangladesh to be Islamic Country : शेख हसीना के राज में बांग्लादेशी संविधान में धर्मनिरपेक्ष शब्द जोड़ने को हुआ था संशोधन…

बता दें कि बंगबंधु शेख मुजीबुर्रहमान के राज में सन 1972 में बने बांग्लादेशी संविधान में राष्ट्रवाद, समाजतंत्र, गणतंत्र और धर्मनिरेपक्ष शब्दों का उल्लेख किया गया था।

उसे बाद में सत्ताशीन हुए जनरल जियाउर्रहमान और जनरल हसन मोहम्मद इरशाद ने देश के संविधान से धर्मनिरेक्षता को महत्वहीन बना दिया।

लेकिन आम जनमानस का मतों से निर्वाचित होकर देश की बागडोर संभालने के बाद शेख हसीना की अगुवाई में बांग्लादेश में 30 जून 2011 को 50वां संविधान संशोधन किया गया था। उस संशोधन के द्वारा बांग्लादेश के संविधान में धर्मनिरपेक्ष शब्द को जोड़ा गया था। Bangladesh to be Islamic Country

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