Bihar Jeevika Didis, पटना: बिहार में महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने के लिए ग्रामीण विकास विभाग एक नया अभियान शुरू करने की तैयारी में है। ‘समृद्ध महिला-समृद्ध बिहार’ नाम से प्रस्तावित इस अभियान के तहत अगले पांच वर्षों में राज्य की एक करोड़ जीविका दीदियों को लखपति बनाने का लक्ष्य रखा गया है। विभाग के अनुसार, बिहार में अब तक करीब 50 लाख महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। नई पहल के जरिए इस उपलब्धि को आगे बढ़ाते हुए महिलाओं के लिए रोजगार, स्वरोजगार और उद्यमिता के अवसर बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। ग्रामीण विकास एवं सूचना जनसंपर्क विभाग के मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि जीविका से जुड़ी महिलाओं ने बचत और आय बढ़ाने के प्रयासों से अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की है। अब अभियान के माध्यम से इस काम को बड़े स्तर पर आगे ले जाने की योजना है।
10 लाख महिला उद्यमियों को मिल सकती है पांच लाख रुपये तक की सहायता
प्रस्तावित अभियान की रूपरेखा में 10 लाख महिला उद्यमियों को बैंक और वित्तीय संस्थानों के माध्यम से पांच लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की योजना शामिल है। इसका उद्देश्य महिलाओं को अपना कारोबार शुरू करने और मौजूदा उद्यमों का विस्तार करने में मदद देना है। इसके अलावा, राज्य की 60 लाख महिलाओं को पशुपालन और उससे जुड़े क्षेत्रों में सूक्ष्म उद्यम स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके लिए उन्हें जरूरी सहयोग उपलब्ध कराने की भी योजना है। ग्रामीण विकास विभाग का मानना है कि स्थानीय स्तर पर छोटे कारोबार और पशुपालन से जुड़े उद्यमों को बढ़ावा मिलने से ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
मैन्युफैक्चरिंग और सेवा क्षेत्र में रोजगार बढ़ाने की तैयारी
अभियान की योजना में महिलाओं की औद्योगिक और निर्माण क्षेत्र में भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है। इसके तहत 25 लाख महिला-केंद्रित विनिर्माण और सूक्ष्म उद्यम स्थापित करने का प्रस्ताव है। इन उद्यमों में तैयार होने वाले उत्पादों को बड़ा बाजार उपलब्ध कराने के लिए खरीदारों और आयातकों के साथ सीधा संपर्क स्थापित करने की योजना बनाई जा रही है। इससे महिलाओं को अपने उत्पादों की बिक्री और कारोबार बढ़ाने में मदद मिल सकती है। वहीं, सेवा और कौशल आधारित क्षेत्रों में 15 लाख नए रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर पैदा करने का लक्ष्य प्रस्तावित है। इससे महिलाओं के साथ युवाओं और दिव्यांगजनों को भी आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने की योजना है।

गांव से राज्य स्तर तक तैयार होगी वैल्यू-चेन
ग्रामीण विकास विभाग की भावी योजना में ग्राम पंचायत से लेकर राज्य स्तर तक उद्यमिता विकास के लिए जरूरी बुनियादी ढांचा तैयार करना शामिल है। इसके साथ ही उत्पादन, प्रसंस्करण, ब्रांडिंग, विपणन और निर्यात को एक-दूसरे से जोड़ने वाली वैल्यू-चेन विकसित करने पर जोर दिया जाएगा। इस व्यवस्था से जीविका समूहों से जुड़े उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने और उनकी पहचान मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है। विभाग इस अभियान को महिलाओं, युवाओं और दिव्यांगजनों को जोड़ने वाले समावेशी और पर्यावरण अनुकूल आर्थिक विकास मॉडल के रूप में विकसित करना चाहता है।

1.81 करोड़ परिवार जीविका समूहों से जुड़े
बिहार में स्वयं सहायता समूहों की शुरुआत वर्ष 2006 में छह प्रखंडों से हुई थी। विभाग की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, अब तक इन समूहों से 1.81 करोड़ परिवार जुड़ चुके हैं। राज्य में 73,517 ग्राम संगठनों और 1,686 संकुल स्तरीय संघों का गठन किया गया है। वहीं, 11 लाख 10 हजार स्वयं सहायता समूहों के बचत बैंक खाते खोले जा चुके हैं। समूहों को अब तक ऋण के रूप में करीब 75 हजार करोड़ रुपये उपलब्ध कराए जाने की जानकारी दी गई है। इसके अलावा, 6,749 बैंक सखियों की मदद से ग्राहक सेवा केंद्र भी खोले गए हैं। ये व्यवस्थाएं ग्रामीण महिलाओं को बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं से जोड़ने में मदद करती हैं।

महिला सशक्तीकरण को नई ऊंचाई देने की तैयारी
मंत्री श्रवण कुमार के अनुसार, जीविका ने अपने 20 वर्षों के सफर में बिहार की महिलाओं को शिक्षित, आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि एक महिला के सशक्त होने से पूरे परिवार को आगे बढ़ने का अवसर मिलता है। अब ‘समृद्ध महिला-समृद्ध बिहार’ अभियान के जरिए करीब 50 लाख लखपति दीदियों की उपलब्धि को आगे बढ़ाते हुए एक करोड़ महिलाओं तक पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि, वित्तीय सहायता, उद्यमों और रोजगार से जुड़े आंकड़े अभियान की प्रस्तावित रूपरेखा का हिस्सा हैं। इन लक्ष्यों को जमीन पर उतारने के लिए आगे की कार्ययोजना और क्रियान्वयन महत्वपूर्ण होगा।


















