Ranchi : 16वें वित्त आयोग की आज महत्वपूर्ण बैठक राजधानी रांची में हुई। इस दौरान बीजेपी ने आयोग के समक्ष अपनी कई मांगे रखी है। बीजेपी ने कहा कि वित्त आयोग के अध्यक्ष एवं सभी सदस्यगणों का झारखंड में आगमन स्वागत योग्य है। इस अवसर पर पार्टी के तरफ से मुख्य सुझाव एवं समाधान है।
1. हमारी पार्टी वित्त आयोग से यह जानकारी साझा करना चाहती है कि झारखंड बनने के बाद (15 नवम्बर 2000) राज्य की करों की शुद्ध आय कितनी थी। अर्थात झारखंड राज्य को पिछले 25 वर्षों से उसके हिस्से का कितना आय ( वर्षवार) केन्द्र सरकार द्वारा दिया गया, इसका व्यौरा जारी करना चाहिए।
2. राज्यों के पंचायतों और नगरपालिकाओं के संसाधनों पर पूरी तरह से वर्तमान राज्य सरकार का अधिकार है, क्योंकि पिछले 2 वर्षों से राज्य में पंचायत एवं नगरपालिका का चुनाव लंबित है। उक्त चुनाव को माननीय उच्च न्यायालय के आदेश के बाद भी राज्य सरकार द्वारा लंबित रखा गया है। पिछले दो वित्तीय वर्ष में स्थानीय चुनाव नहीं होने के कारण केन्द्र सरकार से मिलने वाली करीब 1500 करोड़ की राशि से झारखण्ड वंचित रह गया है। नगर निकाय के चुनाव नहीं होने से राज्य के 49 नगर निकाय क्षेत्र का विकास प्रभावित होता है। झारखंड में शहरी विकास का काम चुने हुए जनप्रतिनिधियों के बजाय नौकरशाह के हवाले कर दिया गया है ताकि मनमानी कर घोटालों को अंजाम दिया जा सके। स्थानीय निकाय के चुनाव समय पर हों।
3. राज्य में आपदा के तौर पर वज्रपात सबसे बड़ी आपदा है। झारखंड में प्रति वर्ष लगभग साढ़े तीन लाख व्रजपात की घटनाएं होती हैं जिसमें औसतन 350 लोगों की मृत्यु होती है। राज्य सरकार के द्वारा पिछले 6 वर्षों में कितनी राशि वज्रपात में मरने वालों के आश्रितों को दिया गया, इसकी जानकारी किसी को नहीं है। वर्तमान में वज्रपात से जिनकी मृत्यु हो रही है, उनके आश्रितों को मुआवजा के तौर पर 4 लाख रुपये दिए जा रहे हैं, हमारी मांग है कि इस राशि को बढ़ाकर 5 लाख रु. दिए जाए।
4. झारखंड में फॉल एवं नदी आदि में डूब कर मरने वालों की संख्या भी हजारों में है, खास कर युवाओं के मरने की संख्या ज्यादा है। डूब कर मरने वालों को सरकार आपदा के तौर पर क्या भुगतान कर रही है, इसकी जानकारी किसी को नहीं है। इसके अतिरिक्त राज्य में हाथियों के उत्पात से भी ग्रामीणों को भारी जान-माल की क्षति होती है, उन्हें भी मुआवजा दी जाए।
5. राज्य में दुर्घटना (एक्सीडेंट) से मरने की खबर से आम जनता इतना भयभीत है कि घर से निकलने वाले व्यक्ति यह सोचता है कि क्या वह आज घर पहुंच पायेगा या नहीं। इस पूरे प्रकरण से राज्य सरकार भी अनभिज्ञ नहीं है। राज्य सरकार द्वारा दुर्घटनाओं को रोकने के लिए कौन से तरीके अपनाए गये हैं और उस पर क्या व्यय हो रहा है। इसका आंकड़ा राज्य सरकार द्वारा जारी नहीं किया जाता है।
6. हमारी पार्टी का कहना है कि शिक्षा के क्षेत्र में जो सहायता अनुदान दी जाती है, उसका व्यौरा भी आम जनता के पास नहीं है। राज्य में जितने भी स्कूल है उतने प्रकार के बच्चों के स्कूल ड्रेस हैं और उतने ही या उससे कहीं ज्यादा पसंद की किताब दुकानें हैं, जिससे किताब लेने अभिभावक एवं बच्चे मजबूर हैं। जिस तरह “वन नेशन-वन इलेक्शन’ की जरूरत भारत के हर नागरिक के लिए उचित है, उसी तरह वन “नेशन–वन ड्रेस” (स्कूल / कॉलेज) की अब आवश्यकता हो गयी है। वित्त आयोग द्वारा शिक्षा पर क्या हिस्सेदारी राज्य को दी गयी है और बदले में राज्यों में स्थित स्कूल की स्थिति का क्या हाल है, यह भी आम जनता के समक्ष आना चाहिए।
7. “वन नेशन–वन इलेक्शन” (एक राष्ट्र- एक चुनाव ) विधेयक को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंजूरी दे दी है। चुनाव आयोग ने 2029 तक एक साथ चुनाव कराने के लिए 7951 करोड़ की लागत का अनुमान लगाया है। इसके अलावा अतिरिक्त वोटिंग मशीनों एवं अतिरिक्त सुरक्षा बल की जरुरत होगी। 1979 में यह व्यवस्था की गई थी कि लोकसभा चुनाव खर्च की पूरी जिम्मेदारी केंद्र सरकार लेगी और राज्य विधानसभा चुनाव का पूरा खर्च राज्य सरकार वहन करेगी। अब अगर लोकसभा एवं विधानसभा चुनाव एक साथ होते है, तो लागत राज्य और केन्द्र के बीच समान रुप से साझा की जाती है।
8. भारत में 2024 के लोकसभा चुनाव में लगभग 1.35 लाख करोड़ रु. खर्च हुए थे, जो 2019 के लोकसभा चुनाव में हुए खर्च की राशि से लगभग दोगुणा था। वन नेशन–वन इलेक्शन कराने से जो पैसा बचत होगा, उस राशि का उपयोग देश के विकास में होगा।
9. हमारी पार्टी का कहना है कि वन नेशन – वन इलेक्शन अब देश की जरूरत हो गयी है। इससे न सिर्फ देश की एक बड़ी राशि का बचत होगा बल्कि सालों भर पूरे देश में कहीं न कहीं अचार सहिंता के कारण विकास बाधित भी नहीं होगा। हर वर्ष किसी न किसी राज्य में कहीं न कहीं चुनाव होते रहते हैं और तब अचार सहिंता के दौरान रुपये को ( 50 हजार के ऊपर) ले जाने पर पाबंदी रहती है और उस दौरान लाखों-करोडों रुपये प्रशासन द्वारा जब्त की जाती है, पर उन रुपये का बाद में क्या होता है, इसकी जानकारी आम जनता को होनी चाहिए।
10. 16वें वित्त आयोग को चुनाव से पूर्व मतदाता सूची को आधार कार्ड से जोड़ने हेतु अनिवार्य करने पर विशेष ध्यान देना चाहिए, जैसे विद्यार्थी जब स्कूल /कॉलेजों में अपने नामांकन या नौकरियों के फॉर्म भरते समय उनका आधार कार्ड जो मतदाता सूची से जुड़ा हो, उसका विवरण देना होगा। इसके अलावा हर एक कर्मचारियों के पी.एफ. एकाउंट में, नया ड्राइवींग लाईसेन्स बनाने में, रेलवे टिकट खरीदते समय, होटलों में ठहरने पर जिसके आधार कार्ड में मतदाता पहचान पत्र का जुड़ाव हो गया है उनको ही उपरोक्त सुविधा दिया जा सकता है। इससे मतदाता सूची एवं आधार कार्ड दोनों आपस में 100 प्रतिशत जुड़ जायेंगे।
11. मनरेगा योजना के तहत कार्यरत कर्मियों को इसलिए अयोग्य घोषित किया जा रहा है कि उनके आधार और बैंक खाता एक-दूसरे से लिंक नहीं है।
12. चुनाव के दौरान राज्य की पुलिस द्वारा रुपया, वाहन, हथियार, शराब सहित अन्य सामान जब्त होता है। दो वर्ष से अधिक समय बीत जाने पर भी जब्त वाहन का निलामी नहीं होता है, जिससे आर्थिक क्षति होती है।
13. हमारी पार्टी मांग करती है कि पूरे देश में वन नेशन – वन इलेक्शन होने से क्या-क्या लाभ है, उसका बिन्दुवार जानकारी चुनाव आयोग दे । अक्सर यह देखा जाता है कि एन.डी.ए. से संबंधित सभी पार्टियां इसके पक्ष में प्रचार-प्रसार करती हैं और बाकी पार्टियां इसके विरोध में प्रचार-प्रसार करती है। इससे आम जनता के मनोभाव पर अलग-अलग प्रभाव पड़ता है, अच्छा यह होता कि इस पूरे तथ्य की जानकारी चुनाव आयोग द्वारा आम जनता को दी जाती।
14. हमारी पार्टी यह मांग करती है कि चुनाव के दौरान मतदान केन्द्र पर मतदाताओं का एक दिवसीय बीमा हो ताकि मतदान केन्द्र पर यदि कोई घटना घट जाती है और मतदाताओं के जान-माल की हानि होती है तो उसकी भरपायी हो सके।
15. हमारी पार्टी यह भी मांग करती है कि चुनाव से 1 वर्ष पूर्व जितने भी ट्रांसफर-पोस्टिंग राज्य सरकार द्वारा की जाती है, वैसे सभी पदाधिकारियों के कार्यकलापों को देखते हुए उन्हे चुनाव कार्य में लगाया जाये ।
16. झारखंड राज्य में इंफ्रास्ट्रक्चर की स्थिति बहुत दयनीय है। पिछले 5-6 वर्षों से यहां विकास कार्य रूका हुआ है।
17. आदिवासी बहुल क्षेत्रों में वित्त आयोग द्वारा अनुदान दिए जाने पर भी कोई नया स्कूल/छात्रावास नहीं खोला जा रहा है। ग्रामीण सड़कों की स्थिति बद से बदतर है।
18. 6275 सरकारी स्कूलों में बालिकाओं के और 3772 स्कूलों में बालकों के लिए शौचालय
15. हमारी पार्टी यह भी मांग करती है कि चुनाव से 1 वर्ष पूर्व जितने भी ट्रांसफर-पोस्टिंग ार द्वारा की जाती है, वैसे सभी पदाधिकारियों के कार्यकलापों को देखते हुए
4 of 4 कार्य में लगाया जाये।
16. झारखंड राज्य में इंफ्रास्ट्रक्चर की स्थिति बहुत दयनीय है । पिछले 5-6 वर्षों से यहां विकास कार्य रूका हुआ है।
17. आदिवासी बहुल क्षेत्रों में वित्त आयोग द्वारा अनुदान दिए जाने पर भी कोई नया स्कूल / छात्रावास नहीं खोला जा रहा है। ग्रामीण सड़कों की स्थिति बद से बदतर है । 18. 6275 सरकारी स्कूलों में बालिकाओं के और 3772 स्कूलों में बालकों के लिए शौचालय उपलब्ध नहीं है एवं 28864 स्कूलों में खेलने का मैदान नहीं है। इसके साथ-साथ विज्ञान पढ़ने वाले छात्र – छात्राओं के स्कूल में लैब की सुविधा भी उपलब्ध नहीं है ।
19. झारखंड में पीने का पानी साफ नहीं मिलने के कारण यहां के बच्चे एनिमियां से ग्रसित हो रहे हैं, इससे हमारे आने वाले युवा पीढ़ी भी प्रभावित हो रही है।
20. झारखंड में दो सबसे बड़े धार्मिक स्थल देवघर एवं रजरप्पा में कोरिडोर बनाकर वहां लाखों की संख्या में पहुंच रहे श्रद्धालुओं के लिए सुविधा बढ़ाई जा सकती है। फलस्वरूप दूसरे राज्य से आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ेगी, इससे राज्य के आय में भी वृद्धि होगी।
21. राज्य में अवैध अतिक्रमण एक व्यवसाय का रूप ले चुका है, इस अवैध अतिक्रमण को हटाने के लिए एक बड़ा योजना बनाना होगा। जिस पर वित्त आयोग हस्तक्षेप कर इसे सरल बना सकती है।
22. नगर निकाय एवं पंचायती राज्य व्यवस्था को इतना मजबूत किया जाए कि प्राथमिक शिक्षा, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र एवं शुद्ध पेयजल की व्यवस्था की देख-रेख का संचालन स्थानीय निकाय द्वारा किया जाए। इस संदर्भ में वित्त आयोग को पहल करना चाहिए।


















