दलित IPS पूरन कुमार की आत्महत्या और मुख्य न्यायाधीश पर टिप्पणी के विरोध में कैंडल मार्च, न्याय की मांग

Bokaro: हरियाणा के दलित IPS अधिकारी पूरन कुमार की आत्महत्या के मामले ने देशभर में प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। इस घटना को लेकर विभिन्न सामाजिक संगठनों, राजनीतिक दलों और आम नागरिकों ने जातिगत उत्पीड़न को इसका मुख्य कारण बताया है।

जिले में भी इस घटना के विरोध में स्थानीय सामाजिक संगठनों और छात्र समूहों ने सेक्टर-4 में कैंडल मार्च निकालकर दिवंगत अधिकारी को श्रद्धांजलि दी। लोगों ने मोमबत्तियां लेकर न्याय की मांग की और जातीय भेदभाव के खिलाफ नारे लगाए।

दलित समुदाय के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां निंदनीय :

लोगों ने कहा कि यदि एक ईमानदार और काबिल IPS अधिकारी भी जातीय भेदभाव के कारण खुद को असुरक्षित महसूस करता है, तो यह व्यवस्था की गंभीर विफलता को दर्शाता है। उन्होंने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

संगठनों ने यह भी कहा कि जब देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) पर जूता फेंकने की घटना हुई थी। तब सोशल मीडिया पर दलित समुदाय के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां की गई, जो बेहद निंदनीय है। उन्होंने समाज से ऐसी विभाजनकारी मानसिकता के खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठाने की अपील की।

रिपोर्ट : चुमन कुमार

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