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बाल विवाह के खिलाफ कैलाश फाउंडेशन का कैंडल मार्च

Nawada-बाल विवाह के खिलाफ कैंडल मार्च- जिले में रविवार को कैलाश सत्यार्थी चिल्‍ड्रेन्‍स फाउंडेशन के द्वारा जिले में चयनित 4 प्रखंडों पकरीबरावां,रोह, कौआकोल एवं हिसुआ के 25 गांवों में जाकर बाल विवाह जैसी कुरीतियां पर अंकुश लगाने को लेकर मशाल जुलूस निकाल कर ग्रामीणों को जागरूक किया।

बाल विवाह के खिलाफ कैंडल मार्च

BAAL BIHAAR 22Scope News

नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित कैलाश सत्यार्थी के “बाल विवाह मुक्त भारत अभियान”के आहवान पर कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेन्स फाउंडेशन ( के.एस.सी.एफ ) के साथ मिलकर तटवासी समाज न्यास के द्वारा ग्रामीण के लोगों को जागरूक करने के लिए राज्यव्यापी ‘ मशाल जुलूस ‘ निकाला गया।

वर्ष 2011 में बिहार में 12,09,260 बाल विवाह

इस जुलूस का नेतृत्व गांवों की महिलाओं ने किया,खासकर ऐसी महिलाएं जो स्वयं बाल विवाह की प्रताड़ना से गुजर चुकी हैं। इस मशाल जुलूस की तैयारियों को लेकर सभी गांवों में पहले ही जाकर अहम बैठक हुई थी, जिसमें जुलूस की रणनीति की जानकारी दी गई थी। भारत सरकार की साल 2011 की जनगणना के अनुसार बिहार में 12,09,260 बाल विवाह हुए हैं।यह देश के कुल बाल विवाह का 11% हैं।

बाल विवाह के मामले में राज्य का देश में तीसरा स्थान है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे -5 के ताजा आंकड़े भी साल 2011 की जनगणना के आंकड़ों की तस्दीक करे तो सर्वे के अनुसार देश में 20 से 24 साल की उम्र की 23.3 प्रतिशत महिलाएं ऐसी हैं जिनका बाल विवाह हुआ है। इस अभियान के तहत पूरे देश में पांच हजार गांवों तक पहुंचा जाएगा।

2025 तक बाल विवाह में कमी लाने का लक्ष्य

इसका लक्ष्य साल 2025 तक बाल विवाह की संख्या में 10 प्रतिशत की कमी लाना है जो कि अभी 23.3 प्रतिशत है।इन आंकड़ों से पता चलता है कि बाल विवाह एक गंभीर समस्या है और यह देश के सर्वांगीण विकास में बाधक है।इसी को देखते हुए नोबेल विजेता कैलाश सत्यार्थी ने ‘ बाल विवाह मुक्त भारत अभियान का ऐलान पूरे देश में किया है।

तीन साल तक चलने वाले इस अभियान के तहत गांव- गांव जाकर

लोगों को बाल विवाह के दुष्परिणामों के बारे में जागरूक किया जाएगा।

इस मशाल जुलूस में ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों,प्रबृद्ध नागरिक,गांवों के प्रधान,

सरपंच समेत के.एस.सी.एफ के तटवासी समाज न्यास के निदेशक

डॉ. रिज़वानुर रहमान समेत तमाम गणमान्य हस्तियां मौजूद रही।

सामाजिक बुराई है बाल विवाह

मशाल जुलूस को लेकर तटवासी समाज न्यास के निदेशक डॉ . रिज़वानुर रहमान ने

बाल विवाह पर चिंता जताते हुए कहा कि बाल विवाह एक सामाजिक बुराई है.

इसको रोकने के लिए अच्छे कानून भी हैं और

सरकार अपने स्तर पर प्रयास भी कर रही है

लेकिन लोग बाल विवाह के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक नहीं हैं.

वे इसे एक परंपरा के तौर पर लेते हैं ,

जिसके कारण आज भी समाज में बाल विवाह प्रचलन में हैं.

उन्होंने कहा”मशाल जुलूस”का उद्देश्य यह है कि

लोगों को बाल विवाह के खिलाफ जागरूक किया जाए और

उन्हें इसके दुष्परिणामों के बारे में बताया जाए सरकार और

सिविल सोसायटी के एकजुट प्रयास से ही हम बाल विवाह जैसी बुराई को रोक सकेंगे।

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