पटना : बिहार विधानसभा में शीतकालीन सत्र चल रहा है। आज सत्र का दूसरा दिन है। सदन में विपक्ष के हंगामे के बीच सरकार ने जातीय गणना से संबंधित सभी जातियों के आंकड़े जारी कर दिए हैं। जातीय जनगणना को लेकर बिहार सरकार की तरफ से सभी जातियों के अलग-अलग आंकड़े जारी किए गए हैं। सरकार ने पिछड़ा वर्ग में सरकारी नौकरी की स्थिति की जानकारी दी है। सरकार की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक, बिहार में यादवों में दो लाख 89 हजार 538 (1.55 फीसदी) लोग सरकारी नौकरियों में हैं। वहीं कुशवाहा जाति के एक लाख 12 हजार 106 (2.04 फीसदी) और कुर्मी जाति के एक लाख 17 हजार 171 (3.11 फीसदी) लोग सरकारी नौकरियों में हैं।
वहीं सामान्य वर्ग में (25.09 फीसदी), पिछड़ा वर्ग (33.16 फीसदी), अत्यंत पिछड़ा वर्ग (33.58 फीसदी), अनुसूचित जाति (42.93 फीसदी), अनुसूचित जनजाति (42.70) और अन्य प्रतिवेदित जातियों में 23.72 फीसदी गरीब परिवार के लोग हैं। सामान्य वर्ग में सबसे अधिक भूमिहार समाज से 25.32 फीसदी गरीब परिवार से हैं। ब्रह्मण (25.3 फीसदी), राजपूत (24.89 फीसदी), कायस्थ (13.83 फीसदी), शेख (25.84 फीसदी) पठान (खान) (22.20 फीसदी, सैयद (17.61 फीसदी), कुल मिलाकर सामान्य वर्ग में 25.9 फीसदी परिवार गरीब के है। गोस्वामी (30.68 फीसदी), घटवार (44.17 फीसदी), ईसाई (अन्य पिछड़ी जाति) 15.79 फीसदी, ईसाई धर्ममलम्बी हरिजन 29.12 फीसदी और किन्नर 25 .73 फीसदी गरीब परिवार हैं।
बिहार में आबादी की शैक्षणिक स्थिति
बिहार की 22.67 आबादी के पास वर्ग एक से पांच तक की शिक्षा, वर्ग छह से आठ तक की शिक्षा 14.33 फीसदी आबादी के पास, वर्ग नौ से 10 तक की शिक्षा 14.71 फीसदी आबादी पास, वर्ग 11 से 12 तक की शिक्षा 9.19 फीसदी आबादी पास, ग्रेजुएट की शिक्षा सात फीसदी से ज्यादा आबादी पास हैं।
आर्थिक रूप से गरीब परिवार पिछड़ा वर्ग
यादव 35.87 फीसदी, कुशवाहा 34.32 फीसदी, कुर्मी 29.90 फीसदी, बनिया 24.62 फीसदी, सूर्यापुरी मुस्लिम 29.33 फीसदी और सोनार 26.58 फीसदी परिवार गरीब है।
कुमार गौतम की रिपोर्ट

















