Garhwa Coffee With SDM: गढ़वा अनुमंडल कार्यालय में पूर्व सदर एसडीएम संजय कुमार द्वारा शुरू किया गया चर्चित जनसंवाद कार्यक्रम ‘कॉफी विद एसडीएम’ इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। करीब 75 सप्ताह तक लगातार चलने वाली इस पहल के बंद होने के बाद स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के बीच इसकी उपयोगिता और भविष्य को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
75 हफ्तों तक बना रहा जनता और प्रशासन के बीच संवाद का माध्यम
‘कॉफी विद एसडीएम’ कार्यक्रम के तहत प्रत्येक बुधवार को आम नागरिकों, पंचायत प्रतिनिधियों, किसानों, महिलाओं, युवाओं और छात्रों को सीधे प्रशासन के समक्ष अपनी समस्याएं रखने का अवसर मिलता था। इस मंच के माध्यम से कई मामलों का त्वरित निष्पादन भी हुआ और प्रशासन तथा जनता के बीच संवाद मजबूत हुआ। स्थानीय लोगों का मानना है कि इस पहल ने पारंपरिक प्रशासनिक व्यवस्था और आम जनता के बीच मौजूद दूरी को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
कार्यक्रम बंद होने से लोगों में निराशा
कार्यक्रम के बंद होने के बाद अनुमंडल सभागार में पहले जैसी गतिविधियां नहीं दिख रही हैं। कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और प्रबुद्ध नागरिकों का कहना है कि अच्छी प्रशासनिक परंपराओं को आगे बढ़ाया जाना चाहिए, ताकि जनता का भरोसा कायम रहे। लोगों का मानना है कि यह कार्यक्रम केवल शिकायत सुनने का मंच नहीं था, बल्कि प्रशासन और नागरिकों के बीच विश्वास का सेतु भी बन चुका था।
नए एसडीएम ने रखा अपना पक्ष
इस मुद्दे पर गढ़वा के नवपदस्थापित सदर एसडीएम मयंक भूषण ने कहा कि जनता की समस्याओं के समाधान के लिए वे हमेशा उपलब्ध हैं और प्रशासन को अधिक जन-उन्मुखी तथा पारदर्शी बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि यदि ‘कॉफी विद एसडीएम’ जैसे कार्यक्रम के संबंध में शासन या प्रशासन स्तर से कोई नीतिगत दिशा-निर्देश प्राप्त होता है, तो उसका अध्ययन कर उचित निर्णय लिया जाएगा। उनका प्रयास प्रशासन और जनता के बीच संवाद को और मजबूत बनाना है।
लोगों की निगाहें प्रशासन के अगले कदम पर
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जनहित से जुड़ी सफल पहलों को जारी रखना प्रशासनिक व्यवस्था की निरंतरता का हिस्सा होना चाहिए। ऐसे में अब लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या ‘कॉफी विद एसडीएम’ को किसी नए स्वरूप में फिर से शुरू किया जाएगा या यह पहल केवल एक प्रशासनिक विरासत बनकर रह जाएगी।
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