COMFED ने करीब 7 हजार जीविका दीदियों को सिखाया डेयरी और पशुपालन का गुर

पटना : बिहार स्टेट मिल्क को-ऑपरेटिव फेडरेशन लिमिटेड (कॉम्फेड) ने करीब सात हजार जीविका दीदियों को डेयरी और पशुपालन का गुर सिखाया है। अब ये पशु सखियां प्रशिक्षित होकर अपने-अपने गांवों में डेयरी गतिविधियों से जुड़ी स्वयं सहायता समूह (SHG) की महिला सदस्यों को प्रशिक्षण देंगी। ग्रामीण विकास विभाग के अधीन बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन प्रोत्साहन समिति (जीविका) और डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग की संस्था कॉम्फेड मिलकर मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना (MMRY) के तहत इससे जुड़ी महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में कार्य कर रहे हैं।

MMRY योजना के अंतर्गत अब तक राज्य की 1.5 करोड़ से अधिक महिला सदस्यों को निर्धारित राशि की पहली किस्त प्रदान की जा चुकी है

एमएमआरवाई योजना के अंतर्गत अब तक राज्य की 1.5 करोड़ से अधिक महिला सदस्यों को निर्धारित राशि की पहली किस्त प्रदान की जा चुकी है। अब कृषि, पशुपालन एवं विभिन्न उद्यमों से जुड़ी इन महिलाओं को संगठित एवं समर्पित प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा रहा है। यह प्रशिक्षण राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के अंतर्गत पहले से संचालित प्रशिक्षण कार्यक्रमों के अतिरिक्त है। जीविका से मिली जानकारी के मुताबिक, पशुपालन क्षेत्र में प्रशिक्षण कार्यक्रम के प्रथम चरण में पशु सखियों, आजीविका विशेषज्ञों व प्रत्येक प्रखंड के सीएलएफ नोडल (AC/CC) को प्रशिक्षित किया गया है। इन सभी का प्रशिक्षण कॉम्फेड के माध्यम से प्रत्येक जिले में आयोजित किया गया है। इसके लिए कॉम्फेड एवं जीविका की ओर से जिला स्तरीय नोडल पदाधिकारी चयनित किए गए थे।

प्रत्येक प्रशिक्षण की कार्यवाही ग्राम संगठन स्तर पर दर्ज की जाएगी

जीविका की ओर से प्रखंड परियोजना प्रबंधकों (BPM) को निर्देश दिया गया है कि प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद ये पशु सखियां अपने-अपने गांवों में डेयरी गतिविधियों से जुड़ी स्वयं सहायता समूह की महिला सदस्यों को तत्काल प्रशिक्षण देना प्रारंभ करेंगी। वहीं, ग्राम संगठन (VO) के सामुदायिक प्रेरक और संबंधित परियोजना कर्मी प्रशिक्षण के लिए महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करेंगे। प्रत्येक प्रशिक्षण की कार्यवाही (मिनट्स) ग्राम संगठन स्तर पर दर्ज की जाएगी।

निर्देश में यह भी कहा गया है कि पशु सखियां केवल डेयरी गतिविधियों तक सीमित नहीं रहेंगी

निर्देश में यह भी कहा गया है कि पशु सखियां केवल डेयरी गतिविधियों तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि भेड़, बकरी, सूअर सहित अन्य लघु पशुओं का पालन करने वाली महिला सदस्यों को भी अलग से प्रशिक्षण देंगी। यह प्रशिक्षण डेयरी प्रशिक्षण से अलग एवं उसके अतिरिक्त आयोजित किया जाएगा और इसकी कार्यवाही भी ग्राम संगठन स्तर पर दर्ज की जाएगी।

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