सुई-धागे से बदली तकदीर : जीविका बैग कलस्टर की हैरान कर देने वाली कहानी

पटना : जीविका की दीदियां अब हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं। मुजफ्फरपुर में हाल के चार वर्षों में पीपीपी मॉडल पर संचालित बैग कलस्टर से इन दीदियों ने 19.75 करोड़ रुपए से अधिक का राजस्व अर्जित किया है। इसमें अकेले बैग कलस्टर शेड्स से 16.34 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ है। जीविका के अधिकारियों का कहना है कि दीदियों के हाथों निर्मित इन आकर्षक बैग का बिहार के साथ दूसरे राज्यों में काफी मांग है। इस कारोबार की बदौलत दीदियां तेजी से आत्मनिर्भर बन रही हैं।

बैग बनाते-बनाते बन गईं उद्यमी

बिहार के मुजफ्फरपुर में संचालित जीविका बैग कलस्टर ग्रामीण महिलाओं के लिए आजीविका सृजन और उद्यमिता विकास का एक सफल मॉडल बनकर उभरा है। इसका मुख्य उद्देश्य स्वयं सहायता समूह (SHG) से जुड़ी महिलाओं के संचालित बैग निर्माण उद्यमों को बढ़ावा देना और स्थायी रोजगार के अवसर सृजित करना है। यह बैग कलस्टर एक प्रभावी पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत संचालित हो रहा है, जिसमें उद्योग विभाग की ओर से सिर्फ आधारभूत संरचना उपलब्ध कराई जा रही है। साथ ही जीविका के स्तर से सामुदायिक सशक्तिकरण एवं उद्यम विकास को बढ़ावा दिया जा रहा है।

कैसे 42 उद्यमों ने रचा 19 करोड़ का इतिहास

जीविका निदेशक (उद्यम) विनय कुमार राय बताते हैं कि दिसंबर 2023 से जनवरी 2026 के बीच बैग कलस्टर ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। इस अवधि में 42 बैग उद्यम संचालित हुए, जिनके माध्यम से 32.69 लाख बैग और 12.08 लाख रेन कवर का उत्पादन किया गया। बैग कलस्टर का औसत मासिक टर्नओवर 43 लाख दर्ज किया गया है। इसके साथ ही उद्यमी दीदियां सिलाई का कार्य भी कर रही हैं। उन्होंने बताया कि बैग कलस्टर में आधुनिक सुविधाओं से युक्त उत्पादन शेड, कॉमन फैसिलिटी सेंटर, कलस्टर कार्यालय, श्रमिकों के बच्चों के लिए क्रेच (पालना घर) और जीविका दीदी की रसोई जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं। यह सभी सुविधाएं महिलाओं के अनुकूल कार्य स्थल का वातावरण सुनिश्चित कर रही हैं।

रोजगार और आय के मामले में कलस्टर की महत्वपूर्ण भूमिका

मुजफ्फरपुर में संचालित इस बैग कलस्टर से उद्यमियों को प्रतिमाह औसतन 10,403 रुपए का लाभ प्राप्त हो रहा है। जबकि महिला श्रमिकों को 5,192 रुपए का भुगतान किया जा रहा है। 19 कार्य दिवसों के साथ प्रति माह औसतन दैनिक मजदूरी 263.90 सुनिश्चित की जा रही है।

जीविका के सहारे बिहार तेजी से आत्मनिर्भर बन रहा है – ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार

ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि जीविका के सहारे बिहार तेजी से आत्मनिर्भर बन रहा है। दीदियां धीरे-धीरे हर क्षेत्र में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही हैं। उनके कार्य और उत्पादों गुणवत्ता की सराहना राष्ट्रीय स्तर पर की जा रही है। मुजफ्फरपुर में संचालित बैग कलस्टर से सैकड़ों दीदियों को जहां रोजगार मिला है वहीं उनके परिवार की आर्थिक और सामाजिक जीवन में तेजी से बदलाव आ रहा है।

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