पिजड़े में बंद बंदर की हत्या के बारहवें दिन पोस्टमार्टम, वनपाल जसीम अंसारी सस्पेंड
धनबाद : जिले में एक बेजुबान के प्राण बेरहमी से निकाला गया. इसके बाद उसे दफना दिया गया.
आरोप वनपाल जसीम अंसारी पर लगा है. जिसके बाद आरोपी वनपाल को सस्पेंड कर दिया गया.
वन विभाग के वनपाल की कारिस्तानी से लोगों में आक्रोश है.

पोस्टमार्टम में आया ये रिपोर्ट
मामला वन विभाग की कॉलोनी की है. जहां पिंजरे में बंद एक बंदर की हत्या कर
उसे चुपचाप वनपाल जसीम अंसारी ने दफना दिया.
घटना को लेकर पशु मित्र राणा घोष नामक समाजसेवी ने पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी को ट्वीट किया.
जिसके बाद वन विभाग की नींद खुली ओर घटना की जांच शुरू की.
प्रारंभिक जांच में दोषी पाए जाने पर वनपाल को सस्पेंड कर घटना के 12वें दिन इसका पोस्टमार्टम कराया गया.
देर से पोस्टमार्टम करने की वजह से बंदर के शरीर का मांस पूरी तरह से गल चुका था.
पशुपालन विभाग के डॉक्टरों की टीम ने जांच में पाया कि बंदर को मारने से
पहले उसके एक हाथ को तोड़ दिया गया था, वहीं दूसरा हाथ कंधे के पास से काट कर अलग किया गया था.

बेजुबान के प्राण: मेनका गांधी को ट्वीट के बाद सक्रिय हुआ वन विभाग
इससे पूर्व गत 30 सितंबर को सत्यम नगर से एक बंदर को पकड़ कर
फोरेस्ट कॉलोनी में पिंजरे के अंदर रखा गया था. एक अक्तूबर को किसी ने बंदर की हत्या कर दी.
वन विभाग के अधिकारियों ने बिना पोस्टमार्टम के ही इसे फोरेस्ट कॉलोनी के अंदर दफना दिया था. पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी को ट्वीट के बाद वन विभाग सक्रिय हुआ और 12 दिनों बाद बंदर का पोस्टमार्टम कराया गया. जिला पशुपालन विभाग की तीन सदस्यीय टीम ने बंदर को जमीन से निकाल कर पोस्टमार्टम किया. टीम में डॉ श्रीनिवास सिंह, डॉ मनौव्वर सिद्दकी, डॉ देवेंद्र कुमार वर्मा शामिल थे. सुबह साढ़े 11 बजे से शुरू हुआ पोस्टमार्टम दोपहर साढ़े तीन बजे तक चला.

वनपाल ने खुद को बताया बेगुनाह
वहीं मामले में सस्पेंड किए गए प्रभारी वनपाल वसीम अंसारी ने खुद को बेगुनाह बताया हैं. जिला पशुपालन पदाधिकारी डॉ प्रवीण कुमार का कहना है कि पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों की टीम ने बताया कि बंदर के एक हाथ की हड्डी कोहनी से टूटी हुई थी, जबकि दूसरा हाथ बांह से अलग था. उसे मारने से पहले बेरहमी से पीटा गया था या नही यह फॉरेंसिक रिपोर्ट के बाद क्लियर होगी. देर से पोस्टमार्टम होने की वजह से उसका मांस गल गया है. इसका विसरा प्रिजर्व करते हुए फोरेंसिंक जांच के लिए रांची भेज दिया गया है.
बेजुबान के प्राण: वन विभाग की संवेदनहीनता से लोगों में नाराजगी
सनातनी आस्था के प्रतीक मासूम बंदर की हत्या और वन विभाग की संवेदनहीनता से आम लोगों में गहरी नाराजगी है. बावजूद अगर इस मामले में उचित जांच हो और इसके लिए दोषियों पर आईपीसी की धारा के तहत कार्रवाई हो तभी बेजुबानों पर अत्याचार में कमी आएगी.
रिपोर्ट: राजकुमार जायसवाल

















