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Padma Bhushan: से सम्मानित होंगे दिशोम गुरु शिबू सोरेन, आदिवासी अधिकारों की लड़ाई को मिला राष्ट्रीय सम्मान

झारखंड आंदोलन के महानायक स्व. शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म भूषण से सम्मानित किया जाएगा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू राष्ट्रपति भवन में अलंकरण करेंगी।


Padma Bhushan रांची: झारखंड राज्य आंदोलन के महानायक और आदिवासी समाज के अधिकारों की आवाज रहे स्वर्गीय शिबू सोरेन को मंगलवार को देश के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘पद्म भूषण’ से सम्मानित किया जाएगा। राष्ट्रपति भवन में आयोजित विशेष अलंकरण समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू यह सम्मान प्रदान करेंगी। लोक कल्याण, सामाजिक न्याय और आदिवासी समुदाय के सशक्तीकरण में उनके ऐतिहासिक योगदान को देखते हुए उन्हें यह सम्मान मरणोपरांत दिया जा रहा है।

Padma Bhushan: से सम्मानित होंगे दिशोम गुरु शिबू सोरेन, आदिवासी अधिकारों की लड़ाई को मिला राष्ट्रीय सम्मान
Padma Bhushan: से सम्मानित होंगे दिशोम गुरु शिबू सोरेन, आदिवासी अधिकारों की लड़ाई को मिला राष्ट्रीय सम्मान

केंद्र सरकार ने गणतंत्र दिवस 2026 की पूर्व संध्या पर शिबू सोरेन को पद्म भूषण देने की घोषणा की थी। गौरतलब है कि लंबी बीमारी के बाद 4 अगस्त 2025 को उनका निधन हो गया था। निधन के समय वह राज्यसभा सांसद थे।

Padma Bhushan:रूपी सोरेन ग्रहण करेंगी सम्मान

इस ऐतिहासिक अवसर पर शिबू सोरेन की पत्नी रूपी सोरेन और पुत्रवधू कल्पना सोरेन दिल्ली पहुंच चुकी हैं। झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य के अनुसार राष्ट्रपति के हाथों पद्म भूषण सम्मान रूपी सोरेन ग्रहण करेंगी।

झारखंड विधानसभा भी पहले सर्वसम्मति से शिबू सोरेन को भारत रत्न देने का प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेज चुकी है। ऐसे में पद्म भूषण सम्मान को उनके लंबे संघर्ष और योगदान की राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी मान्यता माना जा रहा है।


Key Highlights:

  • स्व. शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म भूषण से सम्मानित किया जाएगा।

  • राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू विशेष समारोह में सम्मान प्रदान करेंगी।

  • आदिवासी अधिकारों और झारखंड राज्य गठन में उनकी भूमिका को मिला राष्ट्रीय सम्मान।

  • रूपी सोरेन राष्ट्रपति भवन में पुरस्कार ग्रहण करेंगी।

  • शिक्षा, नशामुक्ति और अबुआ राज जैसे विचारों ने झारखंड की राजनीति को नई दिशा दी।


शिबू सोरेन का राजनीतिक जीवन केवल सत्ता तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने आदिवासी समाज में जागरूकता, शिक्षा और सामाजिक सुधार को लेकर कई अभियान चलाए। लगातार आठ बार लोकसभा सांसद रहे शिबू सोरेन केंद्र की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार में कोयला मंत्री भी रहे।

उन्होंने आदिवासी समाज को संगठित करने और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए कई संकल्पों के साथ आंदोलन चलाया, जिसने झारखंड की राजनीति और सामाजिक व्यवस्था को गहराई से प्रभावित किया।

Padma Bhushan:नशामुक्ति अभियान को बनाया जनआंदोलन

गुरुजी नशाखोरी को आदिवासी समाज के पिछड़ेपन का प्रमुख कारण मानते थे। उनका मानना था कि शराब और नशे की वजह से गरीबों और आदिवासियों का आर्थिक तथा सामाजिक शोषण होता है। इसी सोच के तहत उन्होंने नशाबंदी अभियान चलाया और हड़िया-दारू के कारोबार के खिलाफ जनजागरण किया।

वर्ष 2008 में मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने महिलाओं को शराब के कारोबार से बाहर निकालकर वैकल्पिक रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में पहल की। बाद में इसी सोच ने ‘फूलो-झानो आशीर्वाद अभियान’ का रूप लिया, जिससे हजारों ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने में मदद मिली।

Padma Bhushan:रात्रि पाठशाला से शिक्षा की अलख जगाई

शिबू सोरेन शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का सबसे बड़ा माध्यम मानते थे। उन्होंने संथाल परगना क्षेत्र में ‘चलो पढ़ो रात्रि पाठशाला’ अभियान की शुरुआत की। विशेष बात यह थी कि वह स्वयं भी रात में लोगों को पढ़ाने पहुंचते थे।

इस अभियान के माध्यम से उन्होंने आदिवासी समाज को शिक्षा के महत्व से जोड़ने के साथ-साथ सामाजिक कुरीतियों के प्रति जागरूक किया। इसी कारण लोग उन्हें सम्मानपूर्वक ‘गुरुजी’ कहकर पुकारने लगे।

Padma Bhushan:अबुआ राज की अवधारणा से दी नई पहचान

आदिवासियों की जमीन, जल, जंगल और प्राकृतिक संसाधनों पर अधिकार की लड़ाई शिबू सोरेन के आंदोलन का मूल आधार रही। उन्होंने सांस्कृतिक दमन, शोषण और विस्थापन के खिलाफ आवाज उठाई और ‘अबुआ राज’ यानी ‘हमारा राज’ की अवधारणा को जनआंदोलन का स्वरूप दिया।

इसी विचारधारा ने आगे चलकर अलग झारखंड राज्य आंदोलन को मजबूती प्रदान की और झारखंड की पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित किया।

आज पद्म भूषण सम्मान के साथ देश न केवल एक राजनेता, बल्कि आदिवासी अस्मिता, सामाजिक न्याय और झारखंड आंदोलन के उस पुरोधा को सम्मानित कर रहा है, जिसने अपना पूरा जीवन वंचित समाज के अधिकारों के लिए समर्पित कर दिया।


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