पटना : बिहार की राजधानी पटना स्थित नर्सरी से (10+2) तक की शिक्षा देने वाले 46 साल पुराने चर्चित स्कूल के संस्थापक निर्देशक डॉ. उमेश प्रसाद सिंह को नेशनल प्रिंसिपल अवार्ड (National Principal Award) से सम्मानित किया गया है। नीति आयोग और एमएसएमई सूक्ष्म लघु और उद्योग विभाग भारत सरकार द्वारा प्रदान किया गया।
बिहार राज्य के राजगीर की प्राकृतिक वादियों मे पलें बढे, अखिल भारतीय प्राकृतिक चिकित्सा परिषद् के आजीवन सदस्य, अंतराष्ट्रीय नेचुरोपैथी संगठन (INO) के सदस्य, प्राकृतिक समन्वय सेवाश्रम के संस्थापक व निर्देशक डॉ. उमेश ने आज से 46 वर्ष पूर्व 1980 में राजधानी पटना में बच्चों को बचपन से ही प्राकृतिक जीवन जीने की कला सिखाने के उद्देश्य से जिस प्राकृतिक स्कूल का बीजारोपण किया था।
वह आज पुष्पित, पल्लवित और प्रतिफलित हो रहा है, जहां से अबतक लगभग चार लाख बच्चों ने शिक्षा ग्रहण करके देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी सर्वश्रेष्ठ पदों पर अपनी सेवा दे रहे है। प्राकृतिक स्कूल और प्राकृतिक समन्वय सेवाश्रम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां लड़कियों का आधा फीस माफ रहता है और लड़कियों को ऐसी शिक्षा दी जाती है ताकि वह समाज में सम्मान के साथ जी सके।

सैकड़ों अवार्ड विभिन्न संस्थाओं द्वारा मिल चुके हैं व अनवरत् मिलते रहते हैं – उमेश प्रसाद सिंह
डॉ. उमेश प्रसाद सिंह को अबतक सैकड़ों अवार्ड विभिन्न संस्थाओं द्वारा मिल चुके हैं और अनवरत् मिलते रहते हैं। डॉ. अंबेदकर फैलोशिप अवार्ड 2023, मैन ऑफ द इयर अवार्ड 2023, प्रज्ञा रत्न अवार्ड, परंपरा सेवा अवार्ड 2019, शिक्षा पद्म सम्मान, 2024, बाबू गंगाशरण सिंह हिन्दी सेवी सम्मान 2019, बुद्ध शिक्षा सम्मान 2024, डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम भारतीय रत्न सम्मान, 2024, प्रभात खबर, गुरु शिक्षा सम्मान 2024 और भारत श्री अवार्ड 2025 शामिल है।
विद्यार्थियों की दिनचर्या नामक पुस्तक डॉ. उमेश की सर्वश्रेष्ठ पुस्तक है जो हर घर के लिए स्वस्थ जीवन जीने की कला सिखाने वाली उनकी अनमोल कृति है। उनका मानना है कि शिक्षा और स्वास्थ्य दोनों जीवनरूपी एक ही सिक्के के दो पहलू है।
National Principal Award से सम्मानित डॉ. उमेश एक उच्च कोटि के रचनाकार और कवि भी हैं
इसके अतिरिक्त डॉ. उमेश एक उच्च कोटि के रचनाकार और कवि भी हैं। जो मुख्य रूप से प्राकृतिक विचारधाराओं, पर्यावरण, स्वास्थ्य, प्रदूषण नियंत्रण और सामाजिक बुराईयों में सुधार इत्यादि के प्रति जागरूकता लाने के उद्देश्य से पत्र पत्रिकाओं में रचनाएं लिखते रखते है। उनका मानना है कि बिना स्वस्थ रहे शिक्षित होना मुश्किल है और बिना शिक्षा के स्वस्थ रहना कठिन है। दवाएं मनुष्य को क्षणिक लाभ तो दे सकती है परंतु स्थायी स्वास्थ्य प्रदान नहीं कर सकती। सच्चे स्वास्थ्य और सच्ची शिक्षा के लिए हमें प्रकृति से जुड़े रहना आवश्यक ही नहीं बल्कि अनिवार्य है।

डॉ. उमेश ने कई ज्वलंत रचनाएं और कविताएं लिखी है
डॉ. उमेश ने कई ज्वलंत रचनाएं और कविताएं लिखी है जिसने समाज में क्रांति लाकर रख स्वास्थ्य के हत्यारे कौन? (8) दूध और हमारा स्वास्थ्य (9) भगवान बुद्ध प्राकृतिक (10) Dietotherepy (11) Buddha, Yoga And Nature Cure (12) स्वतंत्रता और स्वास्थ्य (13) The Best Life (14) संगीत की प्राकृतिक दुनिया (15) महंगाई है, कच्चा खाओ (16) यदि हम लेबर होते (17) तेल बनाम हर्ट फेल (18) जीवन जीना एक कला है (19) कोरोना होना है (20) खुशी मौत की (21) हमारा प्यारा भ्रष्टाचार और सरकार (22) एड्स।
आशा ही नहीं बल्कि पूर्ण विश्वास है कि यह नेशनल प्रिंसिपल अवार्ड उनके कार्य करने की क्षमता को कई गुना बढ़ा देगी – डॉ. उमेश
नेश्नल प्रिंसिपल अवार्ड से सम्मानित होने पर प्राकृतिक परिवार से जुड़े सभी छात्र छात्राओं, अभिभावकों, शिक्षकों, कर्मचारियों और शुभ चिंतकों में खुशी का माहौल है। सभी के तरफ से प्रतिदिन सैकड़ों बधाईयाँ प्राप्त हो रही है। आशा ही नहीं बल्कि पूर्ण विश्वास है कि यह नेशनात प्रिंसिपल अवार्ड उनके कार्य करने की क्षमता को कई गुना बढ़ा देगी।
जिनमें कुछ इस प्रकार है
1. प्रकृति ही स्वास्थ्य दाता है।
2. क्या बूढ़ा होना जरूरी है ?
3. मैं सिगरेट महान
4. स्वास्थ्य हमारा
5. सूर्य और हमारा स्वास्थ्य
6. विद्यार्थी और संगीत
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