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Ghatshila By-Election 2025: Tiger Champai vs Sher Dil Hemant — Baboolal और Somesh तो सिर्फ मोहरे!

घाटशिला उपचुनाव में झारखंड की सबसे दिलचस्प जंग — चंपाई सोरेन बनाम हेमंत सोरेन। बाबूलाल और सोमेश सिर्फ मोहरे, असली टकराव ‘चाचा-भतीजा’ का।


Ghatshila By-Election 2025: रांची: झारखंड की राजनीति में एक बार फिर “चाचा-भतीजा” की जंग देखने को मिलेगी। घाटशिला उपचुनाव 2025 में सियासी मुकाबला जितना दिलचस्प है, उतना ही भावनात्मक भी। एक ओर भाजपा ने पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन के बेटे बाबूलाल सोरेन को मैदान में उतारा है, तो दूसरी ओर झामुमो ने दिवंगत रामदास सोरेन के बेटे सोमेश सोरेन पर भरोसा जताया है।

लेकिन राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि यह लड़ाई सिर्फ बाबूलाल बनाम सोमेश की नहीं है — असली जंग चंपाई सोरेन बनाम मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की है।


Key Highlights:

  • झामुमो ने सोमेश सोरेन, भाजपा ने बाबूलाल सोरेन को उतारा मैदान में

  • असल मुकाबला मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन बनाम पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन का

  • कोल्हान में “चाचा बनाम भतीजा” की टक्कर से गर्माएगी सियासत

  • चंपाई सोरेन के लिए घाटशिला चुनाव बनेगा राजनीतिक लिटमस टेस्ट

  • हेमंत सोरेन को साबित करना होगा झारखंड के सबसे बड़े आदिवासी नेता का दर्जा

  • उपचुनाव जीता तो भाजपा में चंपाई सोरेन की स्थिति मजबूत होगी


Ghatshila By-Election 2025: “Tiger Champai” vs “Sher Dil Hemant” — कोल्हान में गरजे दो सोरेन

पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन कभी गुरुजी शिबू सोरेन के सबसे भरोसेमंद सिपाही थे। हेमंत सोरेन उन्हें “चाचा” कहकर सम्मान देते थे। लेकिन अगस्त 2024 में जब चंपाई ने झामुमो छोड़कर भाजपा का कमल थाम लिया, तो सियासी समीकरण बदल गए।

अब वही “कोल्हान टाइगर” अपने बेटे बाबूलाल को जिताने के लिए पूरे दमखम से मैदान में हैं। दूसरी तरफ, हेमंत सोरेन के लिए यह चुनाव अपनी साख और नेतृत्व की परीक्षा है — उन्हें साबित करना है कि वे झारखंड के निर्विवाद आदिवासी नेता हैं।

Ghatshila By-Election 2025: झामुमो की मजबूरी और भाजपा की उम्मीद

रामदास सोरेन के निधन से झामुमो के विधायकों की संख्या घटकर 34 रह गई है। ऐसे में पार्टी किसी भी कीमत पर घाटशिला सीट खोना नहीं चाहती।
वहीं भाजपा इस चुनाव को चंपाई सोरेन के “राजनीतिक पुनर्वास” का जरिया मान रही है। अगर भाजपा यह सीट जीत जाती है, तो चंपाई न सिर्फ अपने बेटे का सियासी करियर शुरू करेंगे, बल्कि खुद को पार्टी के लिए उपयोगी और प्रभावशाली साबित भी कर पाएंगे।

Ghatshila By-Election 2025: घाटशिला में ‘नाक की लड़ाई’

2014 में भाजपा के उम्मीदवार लक्ष्मण टूडू ने यह सीट जीती थी, जबकि 2019 में रामदास सोरेन ने जीत दर्ज की थी। अब 2025 में दोनों दल अपनी-अपनी साख बचाने में जुटे हैं।
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, यह मुकाबला “लिटमस टेस्ट” जैसा है — हेमंत के लिए नेतृत्व का, और चंपाई के लिए अस्तित्व का।

Ghatshila By-Election 2025: राजनीतिक विश्लेषण

सियासी पर्यवेक्षक कहते हैं, “घाटशिला में मुकाबला केवल वोटों का नहीं, रिश्तों का भी है। जो कभी ‘चाचा-भतीजा’ कहलाते थे, वे अब चुनावी रणभूमि में आमने-सामने हैं। सवाल सिर्फ जीत-हार का नहीं, बल्कि यह भी कि कोल्हान का असली शेर कौन है?”

घाटशिला उपचुनाव झारखंड की राजनीति में एक नया अध्याय लिखने वाला है।
Tiger Champai और Sher Dil Hemant की यह भिड़ंत तय करेगी कि कोल्हान की धरती पर “गुरु-चेले” की परंपरा जारी रहेगी या “नया शेर” अपनी दहाड़ से पुरानी सत्ता को चुनौती देगा।

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