Giridih : गिरिडीह जिले ने आज एक ऐसे राजनेता को खो दिया, जो न सिर्फ सादगी और ईमानदारी का प्रतीक थे, बल्कि जनसेवा को ही अपने जीवन का उद्देश्य मानते थे। गिरिडीह के पूर्व विधायक और ‘झारखंड के गांधी’ के नाम से प्रसिद्ध ज्योतिंद्र प्रसाद का मंगलवार को उनके निवास स्थान पर निधन हो गया। वे 1990 में कांग्रेस के टिकट पर गिरिडीह से विधायक चुने गए थे और अपने कार्यकाल में उन्होंने एक आदर्श जनप्रतिनिधि की छवि गढ़ी थी।
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Giridih : सादगी की मिसाल थे ज्योतिंद्र प्रसाद
ज्योतिंद्र प्रसाद का जीवन सादगी की मिसाल रहा। उन्होंने कभी दोपहिया वाहन तक नहीं अपनाया और एक खपरैल झोपड़ी में अपना जीवन बिताया। माइका मजदूर आंदोलन के दौरान वे मजदूरों के साथ धरती पर सोए, और भोजन की व्यवस्था के लिए उनकी पत्नी ने अपनी बाली तक बेच दी। जनसेवा उनके लिए राजनीति का मूल उद्देश्य था, सत्ता या सुविधाएं नहीं।
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Giridih : पूरे गिरिडीह में शोक की लहर
उनके निधन की खबर से पूरे गिरिडीह और राज्यभर में शोक की लहर दौड़ गई। बुधवार को उनका अंतिम संस्कार गिरिडीह में किया गया। अंतिम दर्शन के लिए सुबह से ही लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। पूर्व विधायक लक्ष्मण सोनकर, दिनेश यादव, दीपक उपाध्याय समेत कई राजनीतिक और सामाजिक हस्तियों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
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ज्योतिंद्र प्रसाद आजीवन शुचिता, पारदर्शिता और जन सरोकारों के लिए खड़े रहे। गिरिडीह की जनता उन्हें न सिर्फ एक नेता, बल्कि एक मार्गदर्शक और प्रेरणा स्रोत के रूप में याद रखेगी। उनका जीवन आनेवाले जनप्रतिनिधियों के लिए एक आदर्श बना रहेगा।
नमन नवनीत की रिपोर्ट–
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