Hazaribagh Agro Tourism: झारखंड में बनेगा नया Agro Tourism Hub! हजारीबाग के डेमोटांड को लेकर सरकार का बड़ा प्लान

Hazaribagh Agro Tourism: झारखंड सरकार राज्य में खेती को आधुनिक तकनीक, रिसर्च और टूरिज़्म से जोड़ने के लिए नई पहल कर रही है। इसी कोशिश के तहत, हज़ारीबाग़ के डेमोटांड में मौजूद एग्रीकल्चरल रिसर्च एंड ट्रेनिंग सेंटर को एग्रो-टूरिज़्म हब के तौर पर विकसित करने का काम शुरू हो गया है। राज्य की कृषि, पशुपालन और सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने सेंटर का दौरा किया, वहां चल रही गतिविधियों का जायज़ा लिया और खेती के क्षेत्र में लागू किए जा रहे नए प्रयोगों के बारे में जानकारी ली। दौरे के दौरान मंत्री ने कहा कि डेमोटांड सेंटर सिर्फ़ रिसर्च तक ही सीमित नहीं रहेगा; बल्कि इसे एक ऐसे मॉडल के तौर पर विकसित किया जाएगा जहां किसान, छात्र, रिसर्चर और आम लोग खेती की आधुनिक तकनीकों को करीब से देख और समझ सकें। इस पहल का मकसद खेती के बारे में जागरूकता बढ़ाना और साथ ही स्थानीय स्तर पर रोज़गार और आमदनी के नए मौके पैदा करना है।

समेकित खेती का सफल उदाहरण बन रहा है डेमोटांड केंद्र

लगभग 160 एकड़ में फैला यह एग्रीकल्चर सेंटर इंटीग्रेटेड फार्मिंग के कॉन्सेप्ट पर विकसित किया गया है। इसमें खेती, बागवानी, पशुपालन और दूसरी संबंधित गतिविधियों को मिलाकर किसानों के लिए एक टिकाऊ खेती का मॉडल तैयार किया गया है। यह सेंटर हर साल राज्य के अलग-अलग ज़िलों के हज़ारों किसानों को वैज्ञानिक खेती, खेती की आधुनिक तकनीकों, प्राकृतिक संसाधनों के सही इस्तेमाल और खेती के नए तरीकों की ट्रेनिंग देता है। इस ट्रेनिंग का मकसद किसानों की उत्पादन क्षमता और आमदनी, दोनों को बढ़ाना है।

Hazaribagh Agro Tourism

चाय और कॉफी की खेती पर विशेष ध्यान

दौरे के दौरान मंत्री ने देखा कि झारखंड में पहली बार प्रायोगिक तौर पर चाय की खेती की जा रही है। साथ ही, कॉफ़ी उत्पादन की संभावनाओं का पता लगाने का काम भी चल रहा है। शुरुआती ट्रायल के नतीजे अच्छे बताए जा रहे हैं। अगर यह प्रयोग सफल रहता है, तो इन फसलों को राज्य के उपयुक्त इलाकों में बड़े पैमाने पर उगाया जाएगा। इससे किसानों को पारंपरिक फसलों के साथ-साथ ज़्यादा कीमत वाली फसलें उगाने का विकल्प मिलेगा, जिससे उनकी आमदनी बढ़ सकती है।

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एग्रो-टूरिज़्म से मिलेगा नया अनुभव

सरकार की योजना के मुताबिक, डेमोटांड सेंटर को खेती और टूरिज़्म के तालमेल को दिखाने के लिए विकसित किया जाएगा। प्रस्तावित योजना में आधुनिक डेमोंस्ट्रेशन यूनिट, ऑर्गेनिक फार्मिंग ज़ोन, ट्रेनिंग कॉम्प्लेक्स, गार्डन टूर, प्री-फैब्रिकेटेड कॉटेज और खेती से जुड़ी अनुभव-आधारित गतिविधियां शामिल होंगी। इस पहल से न केवल पर्यटकों को ग्रामीण और आधुनिक कृषि प्रणालियों को समझने का मौका मिलेगा, बल्कि किसानों को भी नई तकनीकों और सफल खेती के मॉडलों को देखने का अवसर मिलेगा।

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आधुनिक कृषि के ज़रिए किसानों की आय बढ़ाने पर ज़ोर

राज्य सरकार का लक्ष्य कृषि को केवल उत्पादन तक सीमित न रखकर उसे रिसर्च, इनोवेशन, वैल्यू एडिशन और पर्यटन से जोड़ना है। विशेषज्ञों का मानना ​​है कि इस तरह की परियोजनाओं की सफलता से ग्रामीण अर्थव्यवस्था मज़बूत होगी और किसानों के लिए अतिरिक्त आय के नए रास्ते खुलेंगे। डेमोटैंड कृषि अनुसंधान और प्रशिक्षण केंद्र को विकसित करने की यह पहल भविष्य में झारखंड के कृषि क्षेत्र के लिए एक अहम मॉडल बन सकती है। इससे आधुनिक खेती को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ एग्री-टूरिज़्म (कृषि-पर्यटन) के क्षेत्र में राज्य की एक नई पहचान भी बनेगी।

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