स्वास्थ्य विभाग ने रेफरल व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए जारी किए विस्तृत दिशा-निर्देश

पटना : राज्य में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़, पारदर्शी एवं मरीज-केंद्रित बनाने की दिशा में स्वास्थ्य विभाग ने सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों के लिए रेफरल व्यवस्था को मजबूत करने संबंधी विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। यह पहल सात निश्चय-3 के अंतर्गत संचालित ‘सुलभ स्वास्थ्य, सुरक्षित जीवन’ संकल्प को प्रभावी ढंग से धरातल पर उतारने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मरीजों को उनके निकटतम सरकारी स्वास्थ्य संस्थान में ही गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध हो तथा अनावश्यक रेफरल पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।

मरीजों को बिना पर्याप्त कारण उच्च संस्थानों के लिए रेफर नहीं किया जाए – स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार

स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार द्वारा समीक्षा बैठकों के दौरान स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि मरीजों को बिना पर्याप्त कारण उच्च संस्थानों के लिए रेफर नहीं किया जाए। स्वास्थ्य मंत्री के अनुसार, जिला अस्पतालों एवं अन्य सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध संसाधनों, विशेषज्ञ चिकित्सकों तथा आधुनिक सुविधाओं का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जाए, ताकि आम लोगों को अपने जिले में ही बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी नए दिशा-निर्देश इन्हीं निर्देशों को प्रभावी रूप से लागू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल हैं।

मरीजों का पंजीकरण, चिकित्सकीय परामर्श, जांच, दवा, रेफरल व उपचार संबंधी सभी विवरण BHAVYA पोर्टल पर उपलब्ध रहेंगे – सचिव कुमार रवि

स्वास्थ्य विभाग के सचिव कुमार रवि द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, मरीजों को स्थानीय स्तर पर बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना और केवल आवश्यकता पड़ने पर ही उच्च संस्थानों में रेफर करना सुनिश्चित करने की व्यवस्था सभी सिविल सर्जन द्वारा किया जाना है। इस व्यवस्था के तहत BHAVYA (Bihar Health Application Visionary Yojana for All) Portal के माध्यम से OPD, IPD, दुर्घटना एवं इमरजेंसी में आने वाले सभी मरीजों की संपूर्ण उपचार प्रक्रिया डिजिटल रूप से दर्ज की जाएगी। मरीजों का पंजीकरण, चिकित्सकीय परामर्श, जांच, दवा, रेफरल एवं उपचार संबंधी सभी विवरण BHAVYA पोर्टल पर उपलब्ध रहेंगे। भर्ती मरीजों का ABHA ID बनाकर उनका Electronic Health Record (EHR) तैयार किया जाएगा, जिससे भविष्य में उपचार और अधिक सुगम एवं प्रभावी होगा।

गंभीर मरीजों को रेफर करने से पहले उन्हें स्थिर कर सरकारी ALSA/BLSA एम्बुलेंस से भेजने के भी निर्देश दिए गए हैं

निर्देशों में सभी जिला अस्पतालों में सात दिनों के भीतर ICU एवं 24×7 इमरजेंसी सेवाओं के प्रभावी संचालन, चिकित्सकों एवं पारा मेडिकल कर्मियों के BHAVYA पोर्टल पर पंजीकरण, ड्यूटी रोस्टर की ऑनलाइन प्रविष्टि व सभी उपलब्ध चिकित्सीय सुविधाओं की अद्यतन जानकारी दर्ज करने को अनिवार्य किया गया है। इसके साथ ही मरीज को रेफर करने से पूर्व संबंधित चिकित्सक को यह सुनिश्चित करना होगा कि आवश्यक चिकित्सा सुविधा संबंधित संस्थान में उपलब्ध नहीं है। प्रत्येक रेफरल का स्पष्ट कारण दर्ज करना अनिवार्य होगा व मरीज की Patient Journey को BHAVYA पोर्टल पर पूर्ण रूप से अपडेट करते हुए उसकी कंप्यूटरीकृत प्रति मरीज अथवा उसके परिजन को उपलब्ध कराई जाएगी। गंभीर मरीजों को रेफर करने से पहले उन्हें स्थिर (Stabilize) कर सरकारी ALSA/BLSA एम्बुलेंस से भेजने के भी निर्देश दिए गए हैं।

जिला पदाधिकारी की अध्यक्षता में जिला स्तरीय अनुश्रवण एवं पर्यवेक्षण समिति का गठन किया गया है

रेफरल व्यवस्था की निगरानी के लिए प्रत्येक जिले में जिला पदाधिकारी की अध्यक्षता में जिला स्तरीय अनुश्रवण एवं पर्यवेक्षण समिति का गठन किया गया है। यह समिति नियमित रूप से रेफरल मामलों की समीक्षा करेगी व अनावश्यक रेफरल की रोकथाम के लिए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करेगी। इसके लिए राज्य स्तर पर भी एक नोडल पदाधिकारी नामित किए गए हैं, जो सभी जिलों के साथ नियमित समीक्षा कर व्यवस्था की सतत निगरानी करेंगे। स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि आने वाले समय में इन दिशा-निर्देशों के प्रभावी क्रियान्वयन से मरीजों को अपने निकटतम सरकारी अस्पतालों में बेहतर एवं समयबद्ध उपचार उपलब्ध होगा, सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों की कार्यक्षमता बढ़ेगी व राज्य की रेफरल व्यवस्था अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और सुदृढ़ बनेगी।

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