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दिवाली में कुम्हारों ने अबतक बनाए इतने दिये, खुशहाली के साथ लोगों के घर भी होंगे जगमग

नवादा : रजौली प्रखंड क्षेत्र में दीपावली पर धन लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए मिट्टी के दीपक बनाने वाले कुम्हारों के चाक ने गति पकड़ ली है। उन्हें इस बार अच्छी बिक्री की उम्मीद है। रजौली बाजार के जगदीश मार्केट में स्थित कुम्हारों की बस्ती में उनके परिवार मिट्टी का सामान तैयार करने में व्यस्त हैं। इनके घरों में मिट्टी के दीपक, हड़िया और कपटी कच्चा दिया आदि बनाने वाले के साथ उनके बच्चे भी लगे हैं। कोई मिट्टी गूंथने में लगा है तो किसी के हाथ चाक पर मिट्टी के बर्तनों को आकार दे रहे हैं। महिलाओं को अलावा जलाने व पके हुए बर्तनों को व्यवस्थित रखने का जिम्मा सौंपा गया है। इसके साथ ही महिलाएं रंग बिरंगे रंगों से बर्तनों को सजाने में जुटी है।

वहीं अधिकांश मिट्टी से बर्तन बनाने वाले ने कहा कि मिट्टी लाने एवं दीपक बनाने से लेकर पकाने में जो खर्च होता है। उसके हिसाब से लाभ नहीं होता है। उनलोगों ने बताया कि अभी तक पचास हजार दिया बनाकर तैयार है। चाइनीज झालरों और दिनों के सामने मिट्टी के दिए की बलि ना चढ़ जाए। मिट्टी के बर्तन बनाने वाले कलाकार अनिल पंडित, कृष्णा पंडित, टिंकू पंडित और विजय पंडित ने बताया कि दीपावली का त्यौहार बेहद करीब है। इसकी तैयारियों के लिए मिट्टी के दीपक बनाने शुरू कर दिए है लेकिन फिर भी उनके माथे पर शिकन साफ देखी जा सकती है। क्योंकि इन्हें डर है कि कहीं इनकी मेहनत बेकार ना चली जाए।कहीं फिर से इस बार चाइनीज झालरों और दीयों के सामने मिट्टी के दीयों की बलि ना चढ़ जाए।

मिट्टी के बर्तन बनाने का धंधा सीजनेबल बनकर रह गया

दीपावली पर्व पर मिट्टी का सामान तैयार करना उनके लिए सीजनेबल धंधा बनकर रह गया है।हालात यह है कि यदि वे दूसरे धंधा नहीं करेंगे तो दिन की रोटी जुटा पाना कठिन हो गया है। मिट्टी के बर्तनों के कारोबार से जुड़े कुम्हारों का कहना है कि दीपावली व गर्मी के सीजन में मिट्टी से निर्मित बर्तनों की मांग जरूर बढ़ जाती है, लेकिन बाद के दिनों में वे मजदूरी करके ही परिवार का पेट पालते हैं। दीपावली के अवसर पर पांच से दस हजार की कमाई हो जाती है। बाकी दिनों में परिवार की गाड़ी चलाने के लिए मजदूरी का सहारा लेना पड़ता है।

कुम्हार परंपरागत धंधे से विमुख होते जा रहे

इन कुम्हारों ने अपना दर्द साझा किया।मिट्टी गढ़कर उसे आकार देने वालों पर शायद धन लक्ष्मी मेहरबान नहीं है। जिसके चलते अनेक परिवार अपने परंपरागत धंधे से विमुख होते जा रहे हैं। घर के पांच सदस्य दिन-रात मेहनत करके एक दिन में दो से तीन सौ दीपक बना पाते हैं।

मिट्टी के बर्तन की एक दर्जन दुकानें सजी

रजौली के जगदीश मार्केट के समीप एक दर्जन दुकानें सजी है। वहीं शहर से लेकर गांव में मिट्टी के बर्तन बनाने में लोग लगे हैं।खरीदारों के कम होने के कारण इस दुकानदार बताते हैं कि जैसे-जैसे दीपावली और छठ नजदीक आने लगेगा वैसे वैसे बिक्री में तेजी आएगी।

ऊंची मेहताना नहीं मिलने से धंधा छोड़ने पर मजबूर

अनिल पंडित ने चाक नचाने में व्यस्त रहे हैं। दीया व छठ के लिए कोशी बना रहे। महंगी लकड़ी खरीदकर दीपक पकाने में जो खर्च आता है। घर के पांच सदस्य दिन-रात मेहनत करके एक दिन में दो से तीन सौ दीपक बना पाते हैं। वहीं दूसरी ओर बाजारों में इलेक्ट्रॉनिक झालरों की चमक-दमक के बीच मिट्टी के दीपक की रोशनी धीमी पड़ती जा रही है।

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मिट्टी से बने समान काघट रहा लोगों का रुझान

टिंकू पंडित ने बताया कि मिट्टी से बने आइटम से लोगों का रुझान कम हो गया है। जिस हिसाब से इसमें मेहनत और पैसा लगता है उसके बराबर हमें बहुत कम लाभ मिल पाता है। यही कारण है कि हम लोग दीपावली वहां गर्मियों में ही इस धंधे को करते हैं बाकी दिनों में अन्य काम करके पेट पालते हैं। कृष्णा पंडित ने बताया कि घर में आठ दस पीढ़ियों से इस धंधे को किया जा रहा है।लेकिन अब, पहले जैसी खरीदारी नहीं होती। मिट्टी वाले बर्तन सीजनेबल धंधा बंध कर रह गया है। दीपावली के अवसर पर पांच-10 हजार की कमाई हो जाती है। बाकी दिनों में परिवार की गाड़ी चलाने के लिए मजदूरी का सहारा लेना पड़ता है।

मिट्टी से बने धंधे से अच्छी मजदूरी

विजय पंडित ने अपनी पत्नी के साथ दीपक बना रहे ने बताया कि चार धंधे से लाभ कम होने के कारण मोहल्ले के कई लोगों ने धंधा को बंद कर दिया है। हम चार पीढ़ियों से पुस्तैनी काम कर रहे थे, लेकिन अब कोई फायदा नहीं पड़ता है। अगले साल धंधे को बदलने की सोच रहे हैं। इस काम से अच्छी तो मजदूरी हैं,जिसमें दो सौ रुपए प्रति दिन मिलते हैं।

इन दामों में बिक रहे मिट्टी के बर्तन

बड़ा दिया-100 रुपए 100 पीस। छोटा दिया 60 से 80 रुपए 100 पीस। कच्चा दिया 50 से 60 रुपए 100 पीस। बत्ती वाला कलश सौ से डेढ़ सौ रुपए 24 पीस। छोटा कलश 30 से 40 एक पीस। लक्ष्मी और गणेश की प्रतिमा का कीमत 150 से लेकर तीन हजार रुपए हैं। जहां एक फीट गणेश मूर्ति की कीमत 400 रुपए दो फीट गणेश मूर्ति की कीमत 800 रुपए और तीन फुट की मूर्ति की कीमत 1500 रुपए और चार फुट गणेश मूर्ति कीमत तीन हजार रुपए है।

यह भी पढ़े : दीपों का पर्व आते ही कुम्हार परिवार दीये बनाने में हैं व्यस्त

अनिल कुमार की रिपोर्ट

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