रांची: झारखंड राज्य में इस वर्ष मानसून ने किसानों को भरपूर राहत दी, जिससे धान की पैदावार में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। राज्य में इस वर्ष रिकॉर्ड 41.38 लाख टन धान का उत्पादन हुआ है, जो पिछले वर्ष 2023 के मुकाबले 9 लाख टन अधिक है। 2023 में धान की पैदावार केवल 32.10 लाख टन थी, जबकि इस वर्ष 41.38 लाख टन तक पहुंचने से किसानों में उत्साह का माहौल है।
2022 और 2023 के सूखा प्रभाव
साल 2022 और 2023 में सूखा की स्थिति ने राज्य के कृषि क्षेत्र को भारी नुकसान पहुंचाया था। विशेष रूप से 2022 में सूखा के कारण हजारों हेक्टेयर में धान की रोपाई नहीं हो पाई थी, और जो फसलें खड़ी थीं, उनमें भी बाली नहीं आई थी। इसके कारण राज्य की धान की पैदावार घटकर 19.09 लाख टन रह गई थी, जो कि पिछले कई वर्षों का सबसे कम आंकड़ा था। 2023 में स्थिति थोड़ी बेहतर हुई, लेकिन फिर भी पिछले साल की तुलना में उत्पादन में केवल 32.10 लाख टन का ही इजाफा हो पाया।
मानसून का समय पर आगमन और फसल की स्थिति
इस वर्ष हालांकि, मानसून ने किसानों की उम्मीदों पर पानी डाला और सही समय पर जोरदार बारिश हुई। मानसून की यह बारिश खेतों में दिखी, जिससे धान की फसल में जबरदस्त वृद्धि हुई। किसानों के लिए यह राहत की बात थी, क्योंकि सही समय पर बारिश के कारण खेतों में अच्छे परिणाम देखे गए। इस वर्ष कुल 15 लाख 48 हजार 655 हेक्टेयर क्षेत्र में धान की रोपाई की गई, जो कि निर्धारित लक्ष्य का 87.72% है। यह आंकड़ा पिछले वर्ष की तुलना में काफी बेहतर है, जब केवल 60.71% क्षेत्र में ही रोपाई हो पाई थी।
खरीफ फसलों के लिए बेहतर स्थिति
झारखंड की मुख्य खरीफ फसल धान है, और राज्य में कुल 28.27 लाख हेक्टेयर में खरीफ फसल लगाने का लक्ष्य था। इसमें से 22 लाख 90 हजार 483 हेक्टेयर में खेती हुई, जो लक्ष्य का एक अच्छा प्रतिशत है। पिछले वर्ष 2023 में खरीफ फसल की रोपाई 32.10 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हुई थी, जबकि 2022 में यह आंकड़ा घटकर सिर्फ 14 लाख 31 हजार 609 हेक्टेयर रहा था।
राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूती
मानसून के अनुकूल रहने और कृषि विभाग द्वारा किए गए प्रयासों का सकारात्मक प्रभाव दिखा है। धान की पैदावार में वृद्धि से राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है और किसानों की आय में सुधार हुआ है। राज्य सरकार ने किसानों को धान की बेहतर रोपाई के लिए विभिन्न योजनाएं और प्रोत्साहन दिए हैं, जिससे उत्पादन में वृद्धि हुई है। इस वृद्धि से राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं और स्थानीय बाजारों में धान की अधिक उपलब्धता से खाद्य सुरक्षा में भी योगदान मिला है।
समग्र रूप से देखा जाए तो, इस वर्ष का धान उत्पादन झारखंड के किसानों के लिए खुशहाल संकेत है, खासकर उन किसानों के लिए जिन्होंने पिछले वर्षों में सूखा और फसल की कमी का सामना किया था।


















