रांची: झारखंड में विधानसभा चुनाव के महज कुछ दिन पहले जयराम महतो की पार्टी जेल केम को एक बड़ा झटका लगा है। गढ़वा से जेल केम प्रत्याशी सोनू यादव ने चुनावी मैदान में उतरने से पहले ही अपनी पार्टी बदल ली और झामुमो में शामिल हो गए। इस घटना ने पार्टी के भीतर असंतोष और नेतृत्व के खिलाफ सवालों को जन्म दिया है।
सोनू यादव के साथ-साथ, पार्टी के कई अन्य प्रत्याशी और कार्यकर्ता भी चुनाव से पहले पार्टी छोड़ चुके हैं। कोडरमा से पार्टी प्रत्याशी मनोज यादव की नामांकन रद्द होने से शुरू हुआ सिलसिला अब तक जारी है। रिजवान क्रांतिकारी जैसे पार्टी के करीबी सदस्य ने भी चुनावी मैदान में उतरने से पहले ही झामुमो का दामन थाम लिया। इसके बाद तो जेल केम पार्टी से कई और कार्यकर्ताओं ने अपना त्यागपत्र सौंपा और अन्य दलों में शामिल हो गए।
लेकिन सवाल यह उठता है कि जयराम महतो की पार्टी के अंदर यह बिखराव क्यों हो रहा है? क्या यह कुछ बड़ी साजिश का हिस्सा है, या फिर पार्टी के अंदर से ही नेतृत्व को लेकर असंतोष बढ़ रहा है? राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि जयराम महतो के नेतृत्व में पार्टी ने जिस तरह से चुनावी तैयारी की थी, वह कहीं ना कहीं अब असफल साबित हो रही है।
भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने इस बदलाव को झारखंड के भविष्य की आहट बताया, जब कि यह बदलाव जयराम महतो के समर्थकों के लिए बड़ा झटका है। पार्टी के भीतर सामूहिक इस्तीफे और प्रत्याशियों के मैदान छोड़ने की घटनाएं इस बात का संकेत देती हैं कि कहीं न कहीं पार्टी में नेतृत्व को लेकर गहरी असहमति है।
अब देखना यह है कि चुनावी दंगल में जयराम महतो का यह राजनीतिक संकट उनके लिए कितनी मुश्किलें खड़ी करेगा, या फिर वे इन चुनौतियों से उबर कर खुद को साबित करने में कामयाब होंगे।



















