Gumla: झारखंड सरकार द्वारा कैबिनेट में पारित पेसा कानून को लेकर झारखंड पिछड़ा वर्ग संघर्ष समिति ने कड़ा विरोध जताया है। गुमला कचहरी परिसर में समिति के केंद्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नीलांबर साहू की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में इस कानून के गुण-दोष पर विस्तार से चर्चा की गई।
जाति आधारित जनगणना के बिना कानून लाने पर आपत्तिः
बैठक को संबोधित करते हुए नीलांबर साहू ने कहा कि झारखंड सरकार को पेसा कानून पेश करने से पहले जाति आधारित जनगणना पूरी करनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि झारखंड में पिछड़ा वर्ग (OBC) एक बड़ी आबादी वाला समुदाय है, लेकिन बिना जनगणना के नीति निर्धारण करने से ओबीसी को अनुपातिक लाभ नहीं मिल पाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में कई ऐसे ग्राम सभा क्षेत्र हैं, जहां एसटी-एससी से अधिक ओबीसी आबादी निवास करती है। कुछ गांवों में तो पिछड़ा वर्ग की जनसंख्या 80 प्रतिशत तक है, ऐसे में पेसा कानून के प्रावधानों से ओबीसी समुदाय के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।
राष्ट्रपति को सौंपा जाएगा ज्ञापनः
समिति के केंद्रीय महासचिव दिलीप नाथ साहू ने बताया कि 30 दिसंबर को भारत के माननीय राष्ट्रपति के गुमला दौरे के दौरान पिछड़ा वर्ग की समस्याओं से अवगत कराने के लिए आवेदन सौंपा जाएगा। उन्होंने कहा कि झारखंड के सात जिलों, जिनमें गुमला भी शामिल है, में पिछड़ा वर्ग का आरक्षण शून्य कर दिया गया है, जिससे पढ़े-लिखे बेरोजगार युवक-युवतियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
राजनीतिक दलों पर साधा निशानाः
जिला अध्यक्ष आजाद सिंह ने कहा कि राज्य की लगभग सभी राजनीतिक पार्टियों ने ओबीसी वर्ग से सिर्फ वोट लिया है, लेकिन संवैधानिक और आबादी के अनुपात में अधिकार दिलाने में कोई गंभीरता नहीं दिखाई। उन्होंने चेतावनी दी कि आने वाले दिनों में पिछड़ा वर्ग अपने हक के लिए सड़कों पर उतरकर संवैधानिक तरीके से आंदोलन करेगा।
आंदोलन की चेतावनीः
कार्यकारी जिला अध्यक्ष शहजादा अनवर ने कहा कि पेसा कानून का गहन अध्ययन करने के बाद पिछड़ा वर्ग अपने अधिकारों की लड़ाई और मजबूती से लड़ेगा। उन्होंने कहा कि ओबीसी समुदाय अब जाग चुका है और झारखंड पिछड़ा वर्ग संघर्ष समिति के बैनर तले जोरदार आंदोलन किया जाएगा। बैठक में सागर साहू, जुल्फिकार अंसारी, अमित साहू, लल्लन गोप समेत बड़ी संख्या में समिति के पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित थे।
रिपोर्टः अमित राज
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