Jharkhand High Court: 80 साल पुराने सीएनटी भूमि विवाद में बड़ा फैसला, 19 साल बाद दोबारा खोली गई एसएआर कार्यवाही रद्द

झारखंड हाईकोर्ट ने रांची के 80 साल पुराने सीएनटी भूमि विवाद में अहम फैसला सुनाया। अदालत ने 19 वर्ष बाद दोबारा शुरू की गई एसएआर कार्यवाही को अवैध करार दिया।


Jharkhand High Court रांची: रांची जिले से जुड़े करीब आठ दशक पुराने सीएनटी भूमि विवाद में झारखंड हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की अदालत ने 19 वर्ष बाद दोबारा शुरू की गई एसएआर (शेड्यूल एरिया रेगुलेशन) कार्यवाही को अवैध करार देते हुए स्पष्ट किया कि जिस मामले का विधिवत निपटारा हो चुका हो और जिसका आदेश अंतिम रूप ले चुका हो, उसे लंबे अंतराल के बाद दोबारा नहीं खोला जा सकता।

Jharkhand High Court: 1988 के आदेश को कभी नहीं दी गई कानूनी चुनौती

यह मामला रांची जिले के चान्हो स्थित खाता संख्या 41, प्लॉट संख्या 610 की 1.32 एकड़ सीएनटी भूमि से संबंधित है। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि वर्ष 1988 में पारित आदेश के खिलाफ किसी भी स्तर पर कानूनी चुनौती नहीं दी गई थी। इसके अनुपालन में सितंबर 1988 में रजिस्टर्ड सेल डीड निष्पादित हुई और संबंधित भूमि का नामांतरण (म्यूटेशन) भी कर दिया गया था।

अदालत ने कहा कि जब किसी आदेश को निर्धारित समय के भीतर चुनौती नहीं दी जाती और उसके आधार पर सभी वैधानिक प्रक्रियाएं पूरी हो जाती हैं, तो वह आदेश अंतिम रूप प्राप्त कर लेता है।


Key Highlights

  • झारखंड हाईकोर्ट ने 80 साल पुराने सीएनटी भूमि विवाद में सुनाया अहम फैसला।

  • 19 वर्ष बाद दोबारा शुरू की गई एसएआर कार्यवाही को अवैध घोषित किया।

  • अदालत ने कहा कि अंतिम रूप ले चुके आदेश को वर्षों बाद दोबारा नहीं खोला जा सकता।

  • मामला रांची जिले के चान्हो स्थित 1.32 एकड़ सीएनटी भूमि से जुड़ा है।

  • वर्ष 1988 के आदेश के आधार पर रजिस्टर्ड सेल डीड और नामांतरण पहले ही हो चुका था।


Jharkhand High Court: 19 वर्ष बाद दोबारा शुरू हुई एसएआर कार्यवाही अवैध

सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि पहली एसएआर कार्यवाही के लगभग 19 वर्ष बाद उसी मामले में दूसरी एसएआर कार्यवाही शुरू की गई थी। हाईकोर्ट ने इसे कानून के सिद्धांतों के विपरीत बताते हुए रद्द कर दिया।

अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि न्यायिक प्रक्रिया में अंतिम रूप ले चुके आदेशों को वर्षों बाद पुनः खोलने की अनुमति नहीं दी जा सकती। ऐसा करना कानूनी स्थिरता और न्यायिक व्यवस्था के मूल सिद्धांतों के विरुद्ध होगा।

Jharkhand High Court: फैसले का कानूनी महत्व

हाईकोर्ट का यह निर्णय सीएनटी भूमि से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण नजीर माना जा रहा है। फैसले से यह स्पष्ट संदेश गया है कि यदि किसी मामले का वैधानिक रूप से निपटारा हो चुका है और उसे समय रहते चुनौती नहीं दी गई है, तो वर्षों बाद उसी विषय पर नई कार्यवाही शुरू नहीं की जा सकती।

 

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