Jharkhand High Court: झारखंड में ‘माध्यमिक आचार्य’ (सेकेंडरी टीचर) की भर्ती प्रक्रिया एक बार फिर कानूनी विवाद का विषय बन गई है। एक उम्मीदवार ने डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन पूरा होने के बावजूद नियुक्ति पत्र जारी न किए जाने के विरोध में झारखंड हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर की है। याचिका में नियुक्ति सुनिश्चित करने और एक पद आरक्षित रखने का अनुरोध किया गया है।
नियुक्ति न होने पर हाई कोर्ट का रुख
उम्मीदवार जलेश्वर महतो ने अपने वकील के माध्यम से झारखंड हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। उनका कहना है कि उन्होंने चयन प्रक्रिया के सभी चरणों को सफलतापूर्वक पूरा किया और बिना किसी आपत्ति के डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन भी करवाया। इसके बावजूद, उन्हें अभी तक नियुक्ति पत्र जारी नहीं किया गया है।
विज्ञापन संख्या 02/2025 से जुड़ा मामला
याचिका के अनुसार, यह विवाद विज्ञापन संख्या 02/2025 के तहत ‘माध्यमिक आचार्य’ की भर्ती से संबंधित है। EBC-I श्रेणी के तहत ‘नागपुरी’ विषय के पदों के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए थे। याचिकाकर्ता का दावा है कि उन्होंने निर्धारित पात्रता मानदंडों के अनुसार आवेदन किया और चयन प्रक्रिया की सभी औपचारिकताओं को पूरा किया।
खाली पदों को लेकर उठाए गए सवाल
याचिकाकर्ता ने कोर्ट के समक्ष कहा कि विज्ञापित पदों में से केवल एक के लिए परिणाम घोषित किए गए, जबकि अन्य पदों को बिना किसी स्पष्ट कारण के खाली छोड़ दिया गया। उनका आरोप है कि यह प्रक्रिया पारदर्शिता और निष्पक्षता के सिद्धांतों का उल्लंघन करती है और योग्य उम्मीदवारों के अधिकारों का हनन करती है।
नियुक्ति और हाई कोर्ट से अंतरिम राहत की मांग
याचिका में कोर्ट से अनुरोध किया गया है कि वह संबंधित अधिकारियों को EBC-I श्रेणी में ‘नागपुरी’ विषय के खाली पद पर नियुक्ति सुनिश्चित करने का निर्देश दे। इसके अलावा, इसमें अंतिम फैसले तक एक पद आरक्षित रखने के रूप में अंतरिम राहत की मांग की गई है, ताकि यदि फैसला उनके पक्ष में आता है तो उन्हें नियुक्ति का अवसर मिल सके। उम्मीदवार अब इस मामले में झारखंड हाई कोर्ट की सुनवाई और उसके बाद आने वाले आदेशों का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। कोर्ट का फैसला इस भर्ती प्रक्रिया में शामिल अन्य उम्मीदवारों के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
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