रांची: झारखंड में चर्चित शराब घोटाला की जांच अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) के हाथों में पहुंच गई है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) द्वारा दर्ज एफआईआर को ईडी ने अपनी इंफोर्समेंट केस इंफार्मेशन रिपोर्ट (ECIR) में जोड़ लिया है। अब ईडी, इस घोटाले में गिरफ्तार पूर्व प्रधान सचिव विनय कुमार चौबे, संयुक्त आयुक्त गजेंद्र सिंह सहित पांच आरोपियों को रिमांड पर लेकर पीएमएलए के तहत पूछताछ करेगी।
ईडी को पूछताछ के लिए पहले कोर्ट की अनुमति लेनी होगी। इस कार्रवाई के बाद शराब घोटाले की जांच में नया मोड़ आने की संभावना जताई जा रही है। ईडी इस केस को पहले से दर्ज ईसीआईआर में जोड़ चुकी है, जिसमें वह झारखंड और छत्तीसगढ़ की उत्पाद नीति 2022 की जांच कर रही है।
झारखंड शराब घोटाला : छत्तीसगढ़ कनेक्शन पहले से जांच में
इससे पहले 7 सितंबर 2024 को रायपुर स्थित आर्थिक अपराध इकाई (EOW) ने एफआईआर दर्ज की थी, जिसमें झारखंड के अफसरों के साथ छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ अधिकारी और कारोबारी भी आरोपी बनाए गए थे। इसके बाद 29 अक्टूबर 2024 को ईडी ने झारखंड और छत्तीसगढ़ में 15 ठिकानों पर छापेमारी कर अहम दस्तावेज जब्त किए थे।
फर्जी बैंक गारंटी से 38.44 करोड़ का नुकसान
ACB की प्राथमिकी के अनुसार, फर्जी बैंक गारंटी के जरिए राज्य सरकार को 38.44 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाया गया। आरोप है कि वरिष्ठ अधिकारियों ने प्लेसमेंट एजेंसी को ठेका देने में पद का दुरुपयोग किया, जबकि एजेंसी ने फर्जी बैंक गारंटी दी थी।
और भी अफसरों को भेजा गया है नोटिस
ACB ने उत्पाद विभाग के पांच अधिकारियों—धनंजय कुमार, उमाशंकर सिंह, छीपिज त्रिवेदी, विनय कुमार सिंह और उपेंद्र शर्मा को पूछताछ के लिए नोटिस भेजा है। इससे पहले ACB विनय चौबे, गजेंद्र सिंह, सुधीर कुमार दास और नीरज कुमार सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है।


















