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 JPSC Exam Controversy: सिविल सेवा PT प्रश्नपत्र में हिंदी अनुवाद की कई गलतियां, अभ्यर्थियों में नाराजगी

 जेपीएससी सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2026 के प्रश्नपत्र में हिंदी अनुवाद की कई त्रुटियां सामने आईं। अभ्यर्थियों ने आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।


 JPSC Exam Controversy रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग एक बार फिर अपने प्रश्नपत्रों में त्रुटियों को लेकर विवादों में है। हाल ही में आयोजित सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा (पीटी) के प्रश्नपत्र में हिंदी अनुवाद की कई गलतियां सामने आई हैं, जिससे अभ्यर्थियों में नाराजगी बढ़ गई है। इससे पहले सहायक वन संरक्षक मुख्य परीक्षा में भी 65 से अधिक अशुद्धियां मिलने का मामला सामने आया था।

अभ्यर्थियों का कहना है कि आयोग अपनी पुरानी गलतियों से सीख नहीं ले रहा है और लगातार बड़ी परीक्षाओं में इस तरह की चूक उसकी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।

 JPSC Exam Controversy:‘डोकलो’ बना ‘ठोकलो’, ‘पड़हा’ को लिखा ‘परहा’

रविवार को आयोजित सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के सामान्य अध्ययन पत्र-दो में हिंदी अनुवाद की कई त्रुटियां पाई गईं। झारखंड में प्रचलित शब्द ‘डोकलो’ को प्रश्नपत्र में ‘ठोकलो’ लिखा गया, जबकि ‘पड़हा’ को ‘परहा’ और ‘सारंडा’ को ‘सारंदा’ कर दिया गया।

इन गलतियों ने अभ्यर्थियों को परीक्षा के दौरान भ्रमित कर दिया। कई छात्रों का कहना है कि ऐसी परीक्षाओं में शब्दों की शुद्धता बेहद महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि एक गलत शब्द पूरे प्रश्न के अर्थ को बदल सकता है।


Key Highlights:

• JPSC सिविल सेवा पीटी परीक्षा के प्रश्नपत्र में हिंदी अनुवाद की कई त्रुटियां मिलीं

• ‘डोकलो’ को ‘ठोकलो’ और ‘पड़हा’ को ‘परहा’ लिखे जाने पर विवाद

• इससे पहले सहायक वन संरक्षक परीक्षा में 65 से अधिक अशुद्धियां मिली थीं

• अभ्यर्थियों ने आयोग के मॉडरेशन और प्रूफ रीडिंग सिस्टम पर उठाए सवाल

• आयोग की ओर से अब तक त्रुटियों पर कोई आधिकारिक जवाब नहीं आया


 JPSC Exam Controversy:पहले भी सहायक वन संरक्षक परीक्षा में मिली थीं 65 से अधिक अशुद्धियां

इससे पहले सहायक वन संरक्षक मुख्य परीक्षा के प्रश्नपत्र में अंग्रेजी से हिंदी अनुवाद के दौरान 65 से अधिक अशुद्धियां सामने आई थीं। उस समय भी अभ्यर्थियों ने आयोग से जवाब मांगा था, लेकिन आयोग की ओर से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं आई।

अब सिविल सेवा जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा में फिर से ऐसी त्रुटियां मिलने के बाद आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगे हैं।

 JPSC Exam Controversy:अभ्यर्थियों ने मॉडरेशन सिस्टम पर उठाए सवाल

प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रश्नपत्र तैयार होने के बाद उसका मॉडरेशन और प्रूफ रीडिंग कराया जाता है, ताकि किसी भी प्रकार की त्रुटि को रोका जा सके। लेकिन लगातार हो रही गलतियों ने इस पूरी प्रक्रिया की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

परीक्षा में शामिल अभ्यर्थी उमेश कुमार ने कहा कि आयोग ने परीक्षा केंद्रों पर संचालन तो सही ढंग से कराया, लेकिन सिविल सेवा जैसी महत्वपूर्ण परीक्षा में इस तरह की त्रुटियां स्वीकार्य नहीं हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अब परीक्षार्थियों को अनुमान के आधार पर उत्तर लिखना होगा।

 JPSC Exam Controversy:आयोग की चुप्पी से बढ़ी नाराजगी

अभ्यर्थियों का कहना है कि आयोग को इस मामले में तत्काल स्पष्टीकरण देना चाहिए। अब तक JPSC की ओर से इन त्रुटियों पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, जिससे अभ्यर्थियों की नाराजगी और बढ़ गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी गलतियां केवल तकनीकी चूक नहीं, बल्कि परीक्षा की निष्पक्षता और गुणवत्ता से जुड़ा गंभीर मुद्दा है।

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