बिहार में 3 नए सुपर कॉरिडोर को हरी झंडी : विश्वामित्र, गंगा-अंबिका व नारायणी पथ से बदलेगी उत्तर-दक्षिण बिहार की सूरत

पटना : बिहार में विश्वस्तरीय रोड कनेक्टिविटी का जाल बिछाने और सुगम व तेज यातायात सुनिश्चित करने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ी छलांग लगाई है। बिहार स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (BSRDCL) की ओर से वर्तमान में राज्य के तीन सबसे महत्वपूर्ण नए ग्रीन फील्ड/हाईवे कॉरिडोर, विश्वामित्र पथ, गंगा-अंबिका पथ और नारायणी पथ के निर्माण की दिशा में धरातली कार्रवाई को बेहद तेज कर दिया गया है। इन तीनों प्रमुख पथों के विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (DPR) तैयार करने, भूमि अधिग्रहण का नक्शा तय करने और वैधानिक स्वीकृतियां प्राप्त करने की प्रक्रिया अंतिम चरण की ओर अग्रसर है।

इस परियोजना की महत्ता को देखते हुए विभाग ने अपनी रणनीतिक प्रशासनिक तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया है

इस परियोजना की महत्ता को देखते हुए विभाग ने अपनी रणनीतिक प्रशासनिक तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया है। इन तीनों मेगा प्रोजेक्ट्स के संरेखण (अलाइमेंट) को इस तरह डिजाइन किया गया है कि ये न केवल जिलों की दूरी को कम करेंगे, बल्कि राज्य के कृषि-उद्योग, व्यापार और रोजगार को एक नई ऊंचाई प्रदान करेंगे। वर्तमान में चल रही तैयारियों के तहत देश की सबसे प्रतिष्ठित और विशेषज्ञ परामर्शी संस्थाओं को धरातल पर सर्वे और डिजाइनिंग की जिम्मेदारी सौंपी जा रही है, ताकि सड़कों का निर्माण अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हो।

ये तीनों नए पथ बिहार के आर्थिक भूगोल को बदलने की क्षमता रखते हैं – BSRDCL

बीएसआरडीसीएल के अधिकारियों ने बताया कि ये तीनों नए पथ बिहार के आर्थिक भूगोल को बदलने की क्षमता रखते हैं। एक्सप्रेसवे और फोरलेन मानकों पर आधारित इन नए मार्गों के किनारे लॉजिस्टिक्स पार्क, कृषि मंडियों और नए औद्योगिक क्षेत्रों के विकास की भी अपार संभावनाएं बनेंगी। वर्तमान में बिहार सरकार का पूरा ध्यान इस बात पर केंद्रित है कि इन परियोजनाओं का जमीनी काम रिकॉर्ड समय में पूरा कर जनता को समर्पित किया जाए।

परियोजना संबंधी पूरी प्रक्रिया को पूर्णतः समयबद्ध रखा गया है – पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल

पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल का कहना है कि परियोजना संबंधी पूरी प्रक्रिया को पूर्णतः समयबद्ध रखा गया है। इसके लिए चल रही प्रक्रियाओं में हाल ही में महत्वपूर्ण सरलीकरण किए गए हैं, ताकि जमीनी स्तर पर काम बिना किसी बाधा के तुरंत शुरू किया जा सके। इस महा-अभियान के अंतर्गत स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर की तकनीकी विशेषज्ञता का समन्वय किया जा रहा है। वर्तमान में तकनीकी प्रस्ताव जमा करने की अंतिम तिथि 24 जून 2026 निर्धारित की गई है, जिसके तुरंत बाद धरातल पर भूमि मापन और अंतिम डीपीआर का काम पूरी रफ्तार पकड़ लेगा।

वर्तमान में आकार ले रहे तीन नए स्वर्णिम कॉरिडोर

1. विश्वामित्र पथ (बक्सर-आरा-मनेर-गंगा पथ) – यह 90 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के ट्रैफिक को सीधे राजधानी पटना और दक्षिण बिहार से जोड़ेगा, जिससे बक्सर से पटना का सफर मात्र कुछ घंटों में सिमट जाएगा।

2. गंगा-अंबिका पथ (दिघवारा-उसरी गंगा पथ) – यह 56 किलोमीटर लंबा मार्ग सारण क्षेत्र को गंगा नदी के समानांतर एक नई लाइफलाइन देगा, जिससे उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच का व्यापारिक संपर्क बेहद सुगम हो जाएगा।

3. नारायणी पथ (दरिहारा (गड़खा)-डुमरिया घाट) – गोपालगंज पथ के रूप में यह 73.51 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर गंडक नदी के आर्थिक क्षेत्र और उत्तर-पश्चिमी बिहार के जिलों को सीधे तीव्र गति कनेक्टिविटी से जोड़ देगा।

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