JPSC Scam Abhay Tiwari: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच के बीच आरोपी अभय तिवारी के कथित स्वीकारोक्ति बयान से मामले की जांच और विस्तृत हो गई है। सामने आई जानकारी के अनुसार, अभय तिवारी ने जांच एजेंसी को FRO और ACF परीक्षाओं से जुड़े अभ्यर्थियों से कथित तौर पर करोड़ों रुपये की वसूली और परीक्षा में चयन कराने के दावों के बारे में जानकारी दी है। हालांकि, ये सभी बातें आरोपी के कथित बयान और जांच में सामने आये आरोपों पर आधारित हैं। इन आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
FRO और ACF में करोड़ों रुपये की वसूली का दावा
अभय तिवारी के कथित बयान के अनुसार, FRO और ACF पदों के लिए करीब 20 अभ्यर्थियों से कुल लगभग 5.80 करोड़ रुपये की वसूली की गई थी। कथित तौर पर FRO के एक पद के लिए 20 से 25 लाख रुपये और ACF के लिए 30 से 35 लाख रुपये तक की रकम तय होने की बात कही गई है। बयान के मुताबिक, कथित नेटवर्क की ओर से FRO के लिए 12 और ACF के लिए आठ अभ्यर्थियों को आगे बढ़ाया गया था। इनमें 19 अभ्यर्थियों के सफल होने और एक के असफल रहने का दावा किया गया है। दो अभ्यर्थियों के कथित तौर पर दलाल की भूमिका में भी शामिल होने की बात सामने आई है।
JPSC इंटरव्यू में नंबर बढ़ाने के आरोप
मामले की जांच 11वीं से 13वीं JPSC परीक्षा तक भी पहुंचती दिखाई दे रही है। अभय तिवारी के कथित बयान में इंटरव्यू के दौरान सात अभ्यर्थियों के नंबर बढ़ाने के लिए कथित लेनदेन का आरोप लगाया गया है। बयान में नामकुम के आदित्य पांडेय समेत कई लोगों के माध्यम से JPSC के तत्कालीन पदाधिकारियों और परीक्षा से जुड़ी एजेंसी के अधिकारियों से संपर्क की बात कही गई है। जांच एजेंसी इस पूरे मामले में संबंधित लोगों की भूमिका और आरोपों की सत्यता की पड़ताल कर रही है। इसके अलावा CDPO परीक्षा में भी प्रति अभ्यर्थी कथित तौर पर 10 लाख रुपये लिये जाने की बात सामने आने का दावा किया गया है।
कैसे होता था कथित सेटिंग का नेटवर्क?
अभय तिवारी के कथित बयान के अनुसार, अभ्यर्थियों की किसी न किसी JPSC सदस्य से पहले से सेटिंग कराये जाने का दावा किया गया। इसके बाद कथित तौर पर संबंधित अभ्यर्थियों को उसी सदस्य के इंटरव्यू पैनल में भेजने की व्यवस्था की जाती थी। बयान में TDPL के निदेशक रामवीर सिंह पर अभ्यर्थियों के कोड को कथित रूप से डिकोड करने का दबाव बनाये जाने की बात भी कही गई है। कुछ अभ्यर्थियों को एजेंटों और अन्य माध्यमों से संबंधित लोगों तक पहुंचाने का दावा किया गया है। CID अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन दावों में कितनी सच्चाई है और परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का नेटवर्क किस स्तर तक फैला हुआ था।
रिजल्ट को लेकर भी सामने आया आरोप
CID की पूछताछ में तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता के कथित बयान का भी उल्लेख सामने आया है। उनके अनुसार, तत्कालीन JPSC अध्यक्ष एल. ख्यांग्ते की ओर से उन पर परिणाम जारी करने को लेकर दबाव बनाया गया था। कथित बयान के मुताबिक, उन्हें उपलब्ध PT और Mains के अंकों के आधार पर परिणाम तैयार करने के लिए कहा गया था। इस आरोप की भी जांच एजेंसी की ओर से पड़ताल की जा रही है।
PIL मैनेज करने की कथित डील का भी जिक्र
जांच के दौरान JPSC और परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी TDPL के खिलाफ झारखंड हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका (PIL) को कथित रूप से प्रभावित करने के लिए तीन करोड़ रुपये की डील की बात भी सामने आने का दावा किया गया है। अभय तिवारी के कथित बयान में इस डील के एडवांस के तौर पर पांच लाख रुपये के भुगतान का उल्लेख किया गया है। जांच एजेंसी अब इस दावे से जुड़े लोगों, लेनदेन और परिस्थितियों की जांच कर रही है।
JSSC JE पेपर लीक मामले में भी गिरफ्तारी
इधर, JSSC की जूनियर इंजीनियर भर्ती परीक्षा के कथित पेपर लीक मामले में भी जांच आगे बढ़ी है। रांची पुलिस की विशेष टीम ने मुंबई से अरुण शर्मा को गिरफ्तार किया है। वह परीक्षा संचालन और डेटा मैनेजमेंट से जुड़ी एजेंसी बिनसिस का संचालक सह निदेशक बताया गया है। अरुण शर्मा की भूमिका JPSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं से जुड़े मामले में भी जांच के दायरे में बताई जा रही है। ऐसे में CID द्वारा उससे पूछताछ के लिए रिमांड लेने की संभावना जतायी गई है। JPSC और JSSC से जुड़े मामलों में लगातार सामने आ रही गिरफ्तारियों और आरोपों के बीच जांच एजेंसियों की नजर अब कथित परीक्षा नेटवर्क, एजेंटों, निजी एजेंसियों और संबंधित पदाधिकारियों की भूमिका पर है। आने वाले दिनों में जांच के आधार पर यह स्पष्ट होगा कि सामने आये आरोपों में कितनी सच्चाई है और कथित नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल थे।
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