JPSC परीक्षा गड़बड़ी मामले में गिरफ्तार अभय तिवारी ने CID को दिए बयान में TDPL नियुक्ति और पूर्व अध्यक्ष एल खियांग्ते से जुड़े गंभीर आरोप बताए हैं।
JPSC Scam रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी की जांच कर रही सीआईडी के सामने गिरफ्तार आरोपी अभय तिवारी के बयान से कई अहम जानकारियां सामने आने का दावा किया गया है। अभय तिवारी टीडीपीएल के मार्केटिंग मैनेजर के रूप में काम कर चुका है। उसके बयान के आधार पर सीआईडी अब परीक्षा संचालन एजेंसी टीडीपीएल को काम मिलने की प्रक्रिया और इसमें तत्कालीन जेपीएससी अध्यक्ष एल. खियांग्ते समेत अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।
अभय के कथित बयान के मुताबिक, टीडीपीएल को जेपीएससी में काम दिलाने के लिए तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांग्ते को दो करोड़ रुपये देने की बात कही गई थी। इसके अलावा आयोग से कंपनी को होने वाले भुगतान में 20 प्रतिशत हिस्सेदारी देने की शर्त का भी दावा किया गया है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और सीआईडी की जांच जारी है।
JPSC Scam:धर्मेंद्र के जरिए हुई थी खियांग्ते से मुलाकात
अभय तिवारी के बयान के अनुसार, तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांग्ते से उसकी पहचान धर्मेंद्र के माध्यम से हुई थी। धर्मेंद्र उस समय जेपीएससी के कंप्यूटर कोषांग में कार्यरत था और उसे इस मामले में गिरफ्तार किया जा चुका है।
बयान के मुताबिक, अभय ने टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह और सत्यपाल को धर्मेंद्र से मिलवाया। इसके बाद टीडीपीएल के प्रतिनिधियों और धर्मेंद्र के बीच मुलाकात हुई। आरोप है कि इसी दौरान कंपनी के सामने कई शर्तें रखी गईं।
इनमें अध्यक्ष को दो करोड़ रुपये देने, कुछ छात्रों को पास कराने तथा जेपीएससी से टीडीपीएल को मिलने वाले भुगतान का 20 प्रतिशत हिस्सा देने जैसी बातें शामिल होने का दावा किया गया है।
Key Highlights
अभय तिवारी के कथित बयान से TDPL की नियुक्ति को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं।
तत्कालीन JPSC अध्यक्ष एल. खियांग्ते को दो करोड़ रुपये देने का दावा किया गया है।
TDPL के भुगतान में 20 प्रतिशत हिस्सेदारी देने की शर्त का भी आरोप है।
छात्रों को कथित तौर पर पास कराने की शर्त रखे जाने का दावा किया गया है।
CID अब JPSC के अधिकारियों और सदस्यों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
JPSC Scam:होटल में मुलाकात के बाद JPSC में हुआ प्रेजेंटेशन
अभय के कथित बयान के अनुसार, एल. खियांग्ते के साथ टीडीपीएल से जुड़े लोगों की मुलाकात रांची के होटल रेडिशन ब्ल्यू के रेस्टोरेंट में हुई थी। इस मुलाकात के दौरान खियांग्ते ने टीडीपीएल को जेपीएससी के सामने प्रेजेंटेशन देने को कहा।
इसके दो दिन बाद आयोग कार्यालय में टीडीपीएल ने अपना प्रेजेंटेशन दिया। इसमें आयोग के सदस्य और परीक्षा उप नियंत्रक भी मौजूद थे। इसके बाद कंपनी का प्रस्ताव उप परीक्षा नियंत्रक को सौंपे जाने की बात सामने आई है।
अभय के बयान के अनुसार, बाद में टीडीपीएल को जेपीएससी की विभिन्न परीक्षाओं के संचालन का काम मिल गया। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, सीआईडी पहले ही जेपीएससी कार्यालय, टीडीपीएल और पूर्व अध्यक्ष से जुड़े परिसरों से दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य जब्त कर चुकी है।
JPSC Scam:अभय के बयान के बाद छापेमारी, अब आयोग के सदस्यों की भूमिका की जांच
अभय तिवारी से पूछताछ के बाद सीआईडी ने मामले से जुड़े कई लोगों के ठिकानों पर छापेमारी की थी। धर्मेंद्र की गिरफ्तारी के बाद उससे भी पूछताछ की गई। इसके बाद जांच का दायरा जेपीएससी के अधिकारियों और सदस्यों तक पहुंचा है।
सीआईडी अब यह पता लगाने में जुटी है कि परीक्षा संचालन एजेंसी के चयन से लेकर परीक्षाओं के संचालन और परिणाम तैयार करने तक किसकी क्या भूमिका थी। पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते से भी सीआईडी पूछताछ कर चुकी है। जांच में परीक्षा संचालन, आउटसोर्स एजेंसी के चयन और प्रशासनिक फैसलों से जुड़े सवाल शामिल रहे।
सीआईडी की जांच में अब तक कई गिरफ्तारियां हो चुकी हैं और एजेंसी डिजिटल साक्ष्यों, दस्तावेजों तथा आरोपियों के बयानों को मिलाकर पूरे मामले की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।
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