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भाजपा की सेफ सीट मानी जाने वाली कोडरमा इस बार लगाएगी जीत की हैट्रिक या…..

आज हम बात करेंगे कोडरमा लोकसभा सीट की.

कोडरमा झारखंड की वीआईपी सीटों में से एक सीट मानी जाती है. इस सीट से राज्य के पहले मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने 2004 से 2014 तक परचम लहराया है.

कोडरमा लोकसभा सीट वर्तमान में भाजपा के पास है और अन्नपूर्णा देवी यहां से सांसद हैं. भाजपा ने अब एक बार फिर से अन्नपूर्णा देवी पर ही भरोसा जताया है और उन्हें फिर से चुनावी मैदान में उतारा है.

लेकिन इस सीट पर अभी तक इंडिया गठबंधन ने अपने उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है.

महागठबंधन की ओर से कोडरमा लोकसभा सीट पर भाकपा माले अपना दावा ठोक रही है. और बहुत संभव है कि 2024 के चुनाव में  अन्नपूर्णा देवी के सामने बगोदर विधायक विनोद सिंह हो.

हालांकि जब तक उम्मीदवार की घोषणा नहीं हो जाती तब तक इस पर कुछ कह पाना मुश्किल है कि कोडरमा में किनके बीच मुकाबला होगा. कोडरमा को भाजपा की परंपरागत सीट मानी जाती है,भाजपा ने अब तक 6 बार जीत हासिल की है. मौजूदा भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी इस सीट से लंबे समय तक सांसद रह चुके हैं और अब बाबूलाल मरांडी के भाजपा में एक बार और शामिल हो जाने  के बाद कोडरमा, भाजपा के लिए सेफ सीट मानी जा रही है.

लेकिन आज बाबूलाल मरांडी भाजपा की जिस  उम्मीदवार अन्नपूर्णा देवी के लिए लोगों से वोट की अपील कर रहे हैं वहीं बाबूलाल मरांडी पिछले चुनाव यानी 2019 लोकसभा चुनाव में कोडरमा सीट से खुद अन्नपूर्णा देवी के खिलाफ चुनावी मैदान में थे. बाबूलाल मरांडी ने जेविएम की टिकट से चुनाव लड़ा लेकिन बाबूलाल 4,55,660 वोटों से अन्नपूर्णा देवी से हार गए थे.

इस बार कोडरमा में भाजपा और महागठबंधन के अलावा यूथ सेंसेशन जयराम महतो की पार्टी भी अपने उम्मीदवार चुनावी मैदान में उतारने की तैयारी में है.

राज्य के युवाओं और विद्यार्थियों में जयराम महतो को लेकर खासा उत्साह देखा जा रहा है. अब चुनावी नतीजों के बाद ही पता चल पाएगा कि कोडरमा की जनता इस बार किसे मौका देती है.

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कोडरमा की वर्तमान राजनीतिक स्थिति की बात करें तो

कोडरमा लोकसभा के अंतर्गत विधानसभा की 6 सीटें आती हैं. जिसमें कोडरमा,बरकट्ठा,धनवार, बगोदर,जमुआ और गांडेय विधानसभा की सीटें शामिल है.

पूर्व सीएम हेमंत सोरेन की ईडी के कार्रवाई के समय से ही गांडेय सीट चर्चा में बनी रही. गांडेय सीट से विधायक डॉ सरफराज अहमद ने इस्तीफा दे दिया और कयासों के बाजार गर्म हो गए कि गांडेय सीट से हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरने विधानसभा का चुनाव लड़ेंगी. गांडेय विधायक सरफराज अहमद के इस्तीफे के बाद से यह सीट अभी खाली है और 20 मई को गांडेय विधानसभा में उपचुनाव होंगे. हालांकि अब तक गांडेय सीट पर उम्मीदवार कौन होंगे इस पर संशय की स्थिति बनी हुई है.

गांडेय को छोड़ दे तो . कोडरमा से बीजेपी की नीरा यादव, बरकट्ठा से अमित कुमार यादव स्वतंत्र विधायक हैं,  वहीं धनवार से बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ,बगोदर से सीपीआईएमएल के विनोद सिंह, और जमुआ से बीजेपी के केदार हाजरा विधायक हैं.

यानी कोडरमा लोकसभा की 3 विधानसभा सीटों पर भाजपा का कब्जा है.

कोडरमा लोकसभा सीट के इतिहास के पन्नों को पलटें तो यहां से 6 बार भाजपा ने जीत दर्ज की है वहीं कांग्रेस ने सिर्फ 2 बार कब्जा किया है.

1977 में कोडरमा में पहली बार जनता पार्टी ने जीत दर्ज की थी और रति लाल प्रसाद वर्मा पहले सांसद बने.

रति लाल प्रसाद वर्मा ने अगले चुनाव में भी अपनी जीत सुनिश्चित की और 1980 में भी यहां जनता पार्टी ने अपना परचम लहराया.

लेकिन 1984 के लोकसभा चुनाव में यह सीट जनता पार्टी के हाथ से निकल गई और कांग्रेस के हाथों में चली गई. तिलकधारी सिंह कोडरमा से कांग्रेस से पहले सांसद बने.

1989 के चुनाव में रतिलाल प्रसाद वर्मा ने जनता पार्टी का साथ छोड़कर भाजपा के टिकट से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की.

1991 में जनता दल ने वापसी की और जनता दल  के मुमताज अंसारी सांसद बने.

जिसके बाद 1996 और 1998 के चुनावों में भाजपा के रतिलाल प्रसाद वर्मा ने जीत हासिल की.

1999 में कांग्रेस ने भाजपा को हैट्रिक लगाने से रोक दिया और कांग्रेस के तिलकधारी सिंह ने यहां से जीत हासिल की.

जिसके बाद कोडरमा से बाबूलाल मरांडी की जीत का सिलसिला शुरु हुआ. 2004 में बाबूलाल मरांडी भाजपा के टिकट से सांसद बने.

2006 में कोडरमा लोकसभा सीट के लिए उपचुनाव हुआ था. बाबूलाल मरांडी ने भाजपा से इस्तीफा देकर बतौर निर्दलीय प्रत्याशी चुनाव लड़ा और उपचुनाव में जीत भी हासिल की. .

2009 के लोकसभा चुनाव में भाजपा से अलग होकर

बाबूलाल मरांडी ने अपनी नई पार्टी बनाई . नाम रखा झारखंड विकास मोर्चा. 2009 में बाबूलाल मरांडी ने जेविएम के टिकट से चुनाव लड़ा और एक बार फिर कोडरमा लोकसभा सीट से विजयी हुए.

जिसके बाद 2014 और 2019 के चुनाव में, मोदी लहर पर सवार कर बीजेपी ने जीत दर्ज की.

2014 में भाजपा से रवींद्र कुमार राय सांसद बने वहीं 2019 में भाजपा से अन्नपूर्णा देवी की जीत हुई.

अब 2024 के चुनाव के लिए भी भाजपा ने अन्नपूर्णा देवी को मैदान में उतारा है लेकिन उनका मुकाबला किससे होगा ये अब तक तय नहीं हुआ है.

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