बिहार में ऑनलाईन मिलेंगे भू अभिलेख,सरकारी कार्यालय और बाबुओं के चक्कर लगाने से मिलेगी मुक्ति

बिहार में ऑनलाईन मिलेंगे भू अभिलेख,सरकारी कार्यालय और बाबुओं के चक्कर लगाने से मिलेगी मुक्ति

22 Scope News Desk : बिहार में रैयतों के लिये खुशी की खबर है। अब जमीन से जुड़े कागजों की सत्यापित प्रति के लिये बाबुओं के चक्कर लगाने में मुक्ति मिलेगी। राजस्व और भूमि सुधार विभाग ने कहा है कि जनवरी 2026 से ऑनलाईन माध्यम से राजस्व अभिलेखों (जमीन के कागजात) नकल ली जा सकेगी। यह नकल राजस्व अभिलेखों की डिजिटल हस्ताक्षरित प्रति होगी, जो सत्यापित प्रतिलिपि के रूप में कानूनी रूप से मान्य है।

राजस्व सचिव जय सिंह ने दी जानकारी

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव जय सिंह ने सभी प्रमंडलीय आयुक्त, सभी समाहर्ता, सभी प्रभारी पदाधिकारी, जिला अभिलेखागार सहित सभी अंचलाधिकारियों को निर्देशित कर दिया है।
सचिव ने स्पष्ट किया कि ऑनलाइन विधि से जारी करने वाले सभी अभिलेखों की प्रतियों पर सक्षम पदाधिकारी द्वारा डिजिटली हस्ताक्षर करने के बाद उसे प्रमाणित प्रतिलिपि मानी जायेगी। इसके अतिरिक्त भू-अभिलेख पोर्टल में यह व्यवस्था भी की गयी है कि यदि कोई वांछित राजस्व अभिलेख ऑनलाइन उपलब्ध नहीं है, तो आवेदक ऑनलाइन ही उसकी मांग भेज सकते हैं। उनकी मांग और उपलब्धता के आधार पर उस अभिलेख की डिजिटल हस्ताक्षरित प्रति उन्हें भू-अभिलेख पोर्टल के माध्यम से ही दी जायेगी।

राजस्व सेवाएं सरल,पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त हो – बोले मंत्री राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग

इस संबंध में उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा है कि डिजिटल बिहार की दिशा में भी यह एक महत्वपूर्ण कदम है। आम नागरिकों को इसके लिए अब कहीं भागदौड़ करने की जरूरत नहीं पड़ेगी राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग का यह निर्णय आम नागरिकों की सुविधा, कार्य में पारदर्शिता और सुशासन की दिशा में एक निर्णायक कदम है। अब लोगों को सत्यापित नकल के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। डिजिटल हस्ताक्षरित प्रतियां पूरी तरह वैधानिक हैं और कहीं भी मान्य होंगी। ये लोगों को आसानी से घर बैठे उपलब्ध होंगी। हमारा लक्ष्य है कि राजस्व सेवाएं सरल, पारदर्शी और भ्रष्टाचार-मुक्त हों।

पहले सात से 14 दिन लगता था समय

इसके पूर्व जमीन के कागजात निकालना टेढी खीर होती थी। विशेषकर ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों के नागरिकों के लिए श्रमसाध्य, खर्चीली और कष्टकारी थी। जमीन के दस्तावेज निकालने के लिये पहले सात से 14 दिनों का समय लग जाता था, जिसमें चिरकुट आवेदन, स्टाम्प शुल्क, पंजी में प्रविष्टि, आदेश प्राप्ति की प्रक्रिया अपनानी पड़ती थी।

ये भी पढे :  उद्योग मंत्री ने दिए बड़े संकेत, अब बिहार के हस्तशिल्प को मिलेगा ग्लोबल प्लेटफॉर्म !

Saffrn

Trending News

Social Media

167,000FansLike
28,100FollowersFollow
628FollowersFollow
685,000SubscribersSubscribe
- Advertisement -spot_img