Lucknow Tragedy : एक था हरमिलाप टॉवर जिसके मलबे में दफन हुईं 8 जिंदगियां, 8 साल पुराने भवन के ढहने के कारणों की जांच जारी

डिजीटल डेस्क : Lucknow Tragedyएक था हरपाल टॉवर जिसके मलबे में दफन हुईं 8 जिंदगियां, 8 साल पुराने भवन के ढहने के कारणों की जांच जारी। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के सरोजनी नगर थाना क्षेत्र के ट्रांसपोर्ट नगर में शनिवार शाम तेज बारिश के दौरान 8 साल पुरानी बिल्डिंग अचानक ताश के पत्तों की तरह ढेर होकर मलबे में तब्दील हुई तो देर रात तक चले राहत और बचाव कार्य के दौरान बाहर निकाले गए लोगों से 8 की मौत की पुष्टि हुई।

लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) की तमाम औपचारिकताओं, मानकों आदि पर खरा उतरने के बाद ही जो बिल्डिंग 10 साल भी अपने बुनियाद या नींव पर नहीं टिक पाई तो उसके इस अकाल ही धराशाई होने पर स्वाभाविक तौर पर कई सवाल उठे हैं।

रविवार को भी मौके मलवे पर जिंदगियों की तलाश जारी है। ढही बिल्डिंग के मलबे में एक बड़ा कंटेनरनुमा ट्रक भी दबा हुआ है जिससे हादसे के समय लगेज की अनलोडिंग जारी थी।

हादसे में मृत कारोबारी समेत सभी मृतकों की हुई शिनाख्त, 3 घायल गंभीर

बता दें कि बीते शनिवार अपराह्न करीब साढ़े 3 बजे तेज बारिश शुरू हुई। उसी क्रम में करीब 5 बजे अचानक लखनऊ के ट्रांसपोर्टनगर में शनिवार शाम बारिश के दौरान शहीद पथ किनारे स्थित तीन मंजिला इमारत हरमिलाप टॉवर भरभराकर गिर गया। हादसे में एक कारोबारी समेत 8 लोगों की मौत हो गई। इससे आसपास भगदड़ मच गई।

सबसे पहले पुलिस मौके पर पहुंची। फिर दमकल, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें पहुंचीं और राहत-बचाव शुरू किया। एक-एक कर 32 लोगों को निकाला गया। इसमें से कारोबारी जसमीत सिंह साहनी (45), पंकज तिवारी (40), धीरेंद्र गुप्ता उर्फ धीरज (48), अरुण सोनकर (28), राजकिशोर (27) और राकेश कुमार (32), जगरूप (24) और इंजीनियर रूद्र यादव (25) की मौत हो गई।

घायलों का इलाज जारी है। मलबे में दबे 24 लोगों को निकालकर राजधानी के अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। इनमें 3 लोगों की हालत गंभीर है, जिनका ट्रामा सेंटर में इलाज चल रहा है। मलबे में अभी कई और लोगों के दबे होने की आशंका है।

हादसे के वक्त एक कंटेनर से दवाओं की खेप उतारकर गोदाम में पहुंचाई जा रही थी। कंटेनर चालक राजेश कंटेनर की ड्राइविंग सीट पर बैठे थे। ट्रक का आधा से अधिक हिस्सा बिल्डिंग के भीतर था। बिल्डिंग ढहते ही कंटेनर का आधे से अधिक हिस्सा मलबे में दब गया। हर तरफ धूल का गुबार छा गया। राकेश केबिन से कूदकर भाग गए, जिससे उनकी जान बच सकी।

2010 में नक्शा पास, 2016 में बनकर तैयार बिल्डिंग को 2020 में मिला कंपलीशन सर्टिफिकेट

लखनऊ के ट्रांसपोर्ट नगर स्थित जिस इमारत में हादसा हुआ है, वह महज 8 साल पहले ही बनी थी।  इसके निर्माण के लिए विधिवत योजना बनी थी और इस योजना के मुताबिक लखनऊ विकास प्राधिकरण से साल 2010 में नक्शा भी पास हुआ था।

उसके बाद अगले ही साल यानी साल 2011 में इस इमारत का निर्माण कार्य शुरू हुआ और साल 2015-16 में यह इमारत बन कर तैयार हो गई। इस इमारत की गुणवत्ता जांच के बाद प्राधिकरण से साल 2020 में कंपलीशन सार्टिफिकेट दे दिया।

लखनऊ विकास प्राधिकरण के मुताबिक, इस भवन का नक्शा आलमबाग के समर विहार निवासी कुमकुम सिंघल ने 31 अगस्त 2010 को पास कराया था। इसके लिए प्राधिकरण ने परमिट संख्या-29474 जारी किया था।

प्राधिकरण के लिए प्रवर्तन जोन-2 के जोनल अधिकारी अतुल कृष्ण सिंह के मुताबिक इस इमारत के निर्माण का काम पूरा हो चुका था। आशंका है कि 1000 वर्गमीटर क्षेत्रफल में बनी इस इमारत के निर्माण में लापरवाही बरती गई।

लखनऊ के ट्रांसपोर्ट नगर में ढही बिल्डिंग के मलबे में राहत और बचाव का काम दूसरे दिन भी जारी।
लखनऊ के ट्रांसपोर्ट नगर में ढही बिल्डिंग के मलबे में राहत और बचाव का काम दूसरे दिन भी जारी।

एलडीए को नहीं मिल रहा हरमिलाप टॉवर से संबंधित जरूरी दस्तावेज, पड़ताल जारी

हादसे के चंद घंटे बाद भी मौके पर मौजूद प्रशासनिक अधिकारियों ने वजहों की पड़ताल शुरू की तो बड़ा सवाल खड़ा हुआ कि जब सब कुछ मानकों और नियमों के अनुरूप हुआ  तो अंतिम चरण में लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) के अधिकारियों ने क्वलिटी चेक करते समय इस गड़बड़ी की अनदेखी क्यों की।

बताया जा रहा है कि एलडीए से कंपलीशन सर्टिफिकेट मिलने के बाद से ही इस इमारत को किराए पर दिया गया ।  आशियाना निवासी राकेश सिंघल का हरमिलाप (ग्राउंड प्लस 2) टावर था। टावर के ग्राउंड फ्लोर पर आशियाना निवासी जसमीत साहनी का मोबिल ऑयल और दूसरी मंजिल पर दवा का गोदाम था। पहली मंजिल पर मनचंदा का गिफ्ट सेंटर का गोदाम था।

भवन निर्माण नियमावली के सभी नियमों का पालन होने के बादवजूद भी यह इमारत दस साल भी अपनी नींव पर खड़ी नहीं रह पायी तो सवाल इमारत के ढांचे को लेकर उठा।  इसके चलते अब खुद लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) घेरे में आ गया। तत्काल एलडीए ने मामले की जांच शुरू कर दी ।

मामला तूल पकड़ते देख एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने रात में ही दफ्तर पहुंच गए। उन्होंने उसी समय योजना विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को भी दफ्तर में बुला लिया और पूरी रात इस इमारत का नक्शा पास कराने से लेकर प्रवर्तन टीम द्वारा की गई कार्रवाई की पड़ताल की। इस संबंध में कई जरूरी फाइलें प्राधिकरण कार्यालय में नहीं मिली हैं।

एलडीए के उप सचिव अतुल कृष्ण सिंह ने बताया कि इमारत का निर्माण कार्य पूरा हो चुका था और  अब यह देखा जा रहा है कि क्वालिटी चेक के बाद इमारत मालिक को कोई नोटिस जारी हुई थी कि नहीं।

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