Jharkhand High Court: शादी के बाद भी बेटी का अनुकंपा नियुक्ति का अधिकार खत्म नहीं, 8 सप्ताह में नौकरी देने का आदेश

 झारखंड हाईकोर्ट ने कहा कि शादी के बाद बेटी का अनुकंपा नियुक्ति का अधिकार खत्म नहीं होता। सीएमपीएफओ को आठ सप्ताह में नियुक्ति देने का आदेश।


Jharkhand High Court रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। जस्टिस दीपक रोशन की पीठ ने स्पष्ट किया कि किसी कर्मचारी की बेटी की शादी हो जाने मात्र से अनुकंपा नियुक्ति का अधिकार खत्म नहीं हो जाता। यदि बेटी अपने पिता पर आर्थिक रूप से निर्भर थी, तो केवल विवाहित होने के आधार पर उसे अनुकंपा नियुक्ति से वंचित नहीं किया जा सकता।

13 साल पुराने मामले में अदालत ने केंद्रीय खान भविष्य निधि संगठन यानी सीएमपीएफओ को दिवंगत कर्मचारी की बेटी को आठ सप्ताह के भीतर नियुक्ति पत्र जारी करने का निर्देश दिया है।

Jharkhand High Court: 2013 में कर्मचारी की मौत, बेटी के लिए मांगा था नौकरी का अधिकार

मामला धनबाद की कोयला खदान में सहायक पद पर कार्यरत अर्जुन प्रसाद की मृत्यु से जुड़ा है। 25 नवंबर 2013 को सेवा के दौरान उनकी मौत हो गयी थी। इसके बाद उनकी पत्नी ने अपनी बेटी को अनुकंपा के आधार पर नौकरी देने के लिए आवेदन किया था।

हालांकि, जुलाई 2017 में सीएमपीएफओ ने आवेदन यह कहते हुए खारिज कर दिया कि कर्मचारी की बेटी विवाहित है। विभाग के इस फैसले के खिलाफ मामला हाईकोर्ट पहुंचा।

Jharkhand High Court: शादी होने से आर्थिक निर्भरता खत्म नहीं मानी जा सकती

याचिकाकर्ता ने 2023 में झारखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। अदालत ने मामले में नए सिरे से आवेदन करने का अवसर दिया। इसके बाद फरवरी 2024 में सीएमपीएफओ ने फिर दावा खारिज कर दिया।

सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष यह तथ्य सामने आया कि याचिकाकर्ता की अपनी कोई स्वतंत्र आय नहीं थी। वह अपनी बीमार मां के साथ रहकर उनकी देखभाल कर रही थी।

अदालत ने कहा कि केवल इस आधार पर कि महिला का पति कमाता है, यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि उसकी अपने दिवंगत पिता पर आर्थिक निर्भरता समाप्त हो गयी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि विवाह अपने आप में आर्थिक निर्भरता खत्म होने का निर्णायक आधार नहीं हो सकता।


Key Highlights

  1. झारखंड हाईकोर्ट ने विवाहित बेटी के अनुकंपा नियुक्ति अधिकार पर महत्वपूर्ण फैसला दिया।
  2. कोर्ट ने कहा कि केवल शादी होने से पिता पर आर्थिक निर्भरता खत्म नहीं मानी जा सकती।
  3. 13 साल पुराने मामले में सीएमपीएफओ को नियुक्ति देने का आदेश दिया गया।
  4. दिवंगत कर्मचारी अर्जुन प्रसाद की बेटी की अपनी कोई स्वतंत्र आय नहीं थी।
  5. सीएमपीएफओ को आठ सप्ताह के भीतर नियुक्ति पत्र जारी करने का निर्देश दिया गया।

Jharkhand High Court: सीएमपीएफओ को 8 सप्ताह में नियुक्ति देने का निर्देश

मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने सीएमपीएफओ को दिवंगत कर्मचारी की बेटी की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया। अदालत ने आठ सप्ताह के भीतर नियुक्ति पत्र जारी करने को कहा है।

हाईकोर्ट के इस फैसले को उन मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां विवाहित बेटियों को केवल विवाह के आधार पर अनुकंपा नियुक्ति से वंचित किया जाता है। अदालत ने मामले की परिस्थितियों में आर्थिक निर्भरता को महत्वपूर्ण आधार माना है।

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