मिडिल ईस्ट तनाव और कच्चे माल की महंगाई का असर अब घरेलू बजट पर दिखने लगा है। साबुन, डिटर्जेंट, हॉर्लिक्स और बैटरी समेत कई उत्पाद महंगे हुए।
Middle East Tension Effect रांची: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और कच्चे माल की महंगाई का असर अब आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर साफ दिखने लगा है। घरेलू उपयोग की वस्तुओं से लेकर खाद्य उत्पाद और निवेश के प्रमुख साधन सोने तक के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं। साबुन, सर्फ, शैंपू, डिटर्जेंट, बैटरी और पैकबंद खाद्य पदार्थों की कीमतों में पिछले एक महीने के दौरान तीन से पांच प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गयी है।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि पाम तेल, रसायन, धातु और पैकेजिंग सामग्री की लागत बढ़ने से कंपनियों पर दबाव बढ़ा है। इसका सीधा असर उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ रहा है। कई कंपनियों ने उत्पादों के दाम बढ़ाने के बजाय उनके वजन में कटौती का रास्ता अपनाया है।
| सामान | अप्रैल कीमत | मई कीमत |
|---|---|---|
| सर्फ एक्सेल इजी वॉश 500 ग्राम | 68 रु | 71 रु |
| सर्फ एक्सेल इजी वॉश 1 किलो | 134 रु | 140 रु |
| टाइड सर्फ | 120 रु | 125 रु |
| व्हील एक्टिव 1 किलो | 76 रु | 84 रु |
| घड़ी सर्फ 1 किलो | 73 रु | 78 रु |
| सर्फ एक्सेल बार 250 ग्राम | 39 रु | 40 रु |
| हॉर्लिक्स बिस्किट | 38 रु | 40 रु |
| हॉर्लिक्स 500 ग्राम पाउच | 209 रु | 235 रु |
| वीगेस हॉर्लिक्स 400 ग्राम | 294 रु | 309 रु |
| फेयर एंड लवली 80 ग्राम | 205 रु | 211 रु |
| इनो लेमन | 9 रु | 10 रु |
| सेसोडाइन 70 ग्राम | 25 रु | 35 रु |
| निमा सैंडल सोप | 75 रु | 80 रु |
| पेंसिल बैटरी ब्लू | 14 रु | 15 रु |
| पेंसिल बैटरी रेड | 18 रु | 20 रु |
| टाटा गोल्ड चायपत्ती | 130 रु | 135 रु |
Middle East Tension Effect:घरेलू बजट पर बढ़ा दबाव
रांची के बुटी और पीतांबरा क्षेत्र के उपभोक्ताओं का कहना है कि महंगाई अब हर महीने के खर्च को प्रभावित कर रही है। स्थानीय निवासी नीरज झा ने बताया कि पांच सदस्यीय परिवार में पहले से ही रसोई और दैनिक जरूरतों पर खर्च बढ़ चुका था, लेकिन अब साबुन, डिटर्जेंट और खाद्य उत्पादों के दाम बढ़ने से मासिक बजट और बिगड़ गया है। उन्होंने कहा कि अतिरिक्त खर्च की भरपाई के लिए अब अन्य जरूरी खर्चों में कटौती करनी पड़ सकती है।
Middle East Tension Effect:महंगाई बढ़ने की प्रमुख वजहें
- पाम फैटी एसिड और पाम तेल महंगा हुआ
- कागज और प्लास्टिक की कीमतों में 15 से 50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी
- मिडिल ईस्ट तनाव से रसायनों की सप्लाई प्रभावित
- माल ढुलाई और ट्रांसपोर्ट लागत में इजाफा
- कमजोर रुपये से कंपनियों के मार्जिन पर दबाव
Middle East Tension Effect:विशेषज्ञों की चेतावनी
- वैश्विक तनाव जारी रहा तो कीमतें और बढ़ सकती हैं
- घरेलू बजट पर आने वाले महीनों में और असर पड़ने की आशंका
- कई कंपनियां दाम बढ़ाने के बजाय पैक का वजन घटा रही हैं
बाजार में सर्फ एक्सेल इजी वॉश पाउडर 500 ग्राम का पैकेट 68 रुपये से बढ़कर 71 रुपये हो गया है। वहीं एक किलो पैक 134 रुपये से बढ़कर 140 रुपये पहुंच गया है। व्हील एक्टिव, टाइड, घड़ी सर्फ और अन्य डिटर्जेंट ब्रांड्स के दामों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गयी है।
इसी तरह हॉर्लिक्स पाउच 209 रुपये से बढ़कर 235 रुपये और फेयर एंड लवली क्रीम 205 रुपये से बढ़कर 211 रुपये हो गयी है। पेंसिल बैटरियों के दाम भी जिंक महंगा होने के कारण बढ़ गये हैं।
Key Highlights
मिडिल ईस्ट तनाव का असर घरेलू बाजार पर दिखने लगा
साबुन, डिटर्जेंट और खाद्य पदार्थ 3 से 5 प्रतिशत महंगे
पाम तेल, रसायन और पैकेजिंग कॉस्ट बढ़ने से कंपनियों पर दबाव
कई कंपनियों ने वजन घटाकर लागत संतुलित करने की कोशिश की
व्यापारियों ने आने वाले महीनों में और महंगाई बढ़ने की आशंका जतायी
Middle East Tension Effect:कच्चे माल और पैकेजिंग कॉस्ट बनी बड़ी वजह
व्यापारियों और उद्योग से जुड़े जानकारों के अनुसार, साबुन और डिटर्जेंट बनाने में इस्तेमाल होने वाला पाम फैटी एसिड वैश्विक बाजार में महंगा हो गया है। इसके अलावा कागज और प्लास्टिक की कीमतों में 15 से 50 प्रतिशत तक की वृद्धि होने से पैकेजिंग लागत भी काफी बढ़ गयी है।
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के कारण रसायनों की सप्लाई प्रभावित हुई है, जिससे उत्पादन और परिवहन लागत दोनों में बढ़ोतरी हुई है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और रुपये की कमजोरी ने कंपनियों के मार्जिन को कम कर दिया है। यही वजह है कि कंपनियां लगातार कीमतें बढ़ाने को मजबूर हो रही हैं।
जेसीपीडीए के अध्यक्ष संजय अखौरी ने कहा कि पहले कंपनियां पुराने स्टॉक से काम चला रही थीं, लेकिन अब नया स्टॉक महंगा मिल रहा है। यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव लंबे समय तक बना रहा, तो आने वाले महीनों में कीमतों में और वृद्धि हो सकती है।
Middle East Tension Effect:आने वाले समय में और बढ़ सकती है महंगाई
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मिडिल ईस्ट संकट और वैश्विक सप्लाई चेन पर दबाव जारी रहा, तो घरेलू बाजार में रोजमर्रा की वस्तुओं के दाम और बढ़ सकते हैं। इसका असर खासकर मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के परिवारों पर सबसे अधिक पड़ेगा।
दैनिक जरूरतों की वस्तुओं की कीमतों में लगातार वृद्धि से घरेलू बजट बिगड़ रहा है और उपभोक्ताओं की क्रय क्षमता पर भी असर पड़ रहा है।
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