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NDPS Case Update: सुप्रीम कोर्ट ने रद्द की हाईकोर्ट से मिली बेल, 15 दिन में सरेंडर करेगा दोषी

 एनडीपीएस एक्ट मामले में सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड हाईकोर्ट द्वारा दी गई जमानत रद्द कर दी। दोषी सुग्रीव पूरन को 15 दिनों के भीतर सरेंडर करने का आदेश।


NDPS Case Update रांची: मादक पदार्थ से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड हाईकोर्ट द्वारा दी गई जमानत को रद्द कर दिया है। शीर्ष अदालत ने एनडीपीएस एक्ट के तहत दोषी करार दिए गए सुग्रीव पूरन को 15 दिनों के भीतर संबंधित अदालत में आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है।

यह आदेश राज्य सरकार द्वारा दायर अपील पर सुनवाई के बाद दिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने मामले के तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार करते हुए हाईकोर्ट के जमानत आदेश को निरस्त कर दिया।

NDPS Case Update: निचली अदालत ने सुनाई थी 10 वर्ष की सजा

मामला चाईबासा से जुड़ा है, जहां निचली अदालत ने एनडीपीएस एक्ट के तहत दोषी पाए जाने पर सुग्रीव पूरन को 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। इसके साथ ही उस पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था।

सजा के खिलाफ आरोपी ने झारखंड हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। अपील पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने उसकी सजा पर रोक लगाते हुए जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया था।


Key Highlights

  • सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट से मिली जमानत रद्द की

  • दोषी सुग्रीव पूरन को 15 दिनों में सरेंडर का आदेश

  • एनडीपीएस एक्ट के तहत 10 वर्ष की सजा सुनाई गई थी

  • आरोपी की गाड़ी से 177 किलोग्राम पॉपी स्ट्रॉ बरामद हुआ था

  • राज्य सरकार की अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया फैसला


NDPS Case Update: राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती

हाईकोर्ट के जमानत आदेश को राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि मामले में बरामदगी की मात्रा बेहद अधिक थी और ट्रायल कोर्ट ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को दोषी ठहराया था।

सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि आरोपी की गाड़ी से 177 किलोग्राम पॉपी स्ट्रॉ बरामद किया गया था, जो एनडीपीएस कानून के तहत गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। ऐसे मामलों में जमानत देने से पहले अपराध की गंभीरता और उपलब्ध साक्ष्यों पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।

NDPS Case Update: 15 दिनों के भीतर करना होगा आत्मसमर्पण

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का जमानत आदेश रद्द करते हुए आरोपी को 15 दिनों के भीतर संबंधित अदालत के समक्ष सरेंडर करने का निर्देश दिया है।

कानूनी जानकारों के अनुसार यह फैसला एनडीपीएस एक्ट के मामलों में सख्त न्यायिक दृष्टिकोण को दर्शाता है। विशेष रूप से व्यावसायिक मात्रा में मादक पदार्थ की बरामदगी वाले मामलों में अदालतें साक्ष्यों और अपराध की गंभीरता को प्राथमिकता देती हैं।

 

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