झारखंड सिपाही भर्ती 2015 मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 888 अभ्यर्थियों को बड़ी राहत दी है। फिटनेस टेस्ट के बाद नियुक्ति पर पुनर्विचार करने का निर्देश दिया गया है।
Jharkhand Police Recruitment राचीः झारखंड सिपाही नियुक्ति प्रतियोगिता परीक्षा 2015 से जुड़े लंबे समय से लंबित विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने 888 अभ्यर्थियों को महत्वपूर्ण राहत प्रदान की है। न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की खंडपीठ ने राज्य सरकार तथा झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) को इन अभ्यर्थियों के दावों पर पुनर्विचार करने का निर्देश दिया है।
अदालत ने कहा है कि उपलब्ध रिक्त पदों के विरुद्ध इन अभ्यर्थियों की नियुक्ति की संभावना पर विचार किया जाए और आवश्यक प्रक्रिया पूरी की जाए।
Jharkhand Police Recruitment:Fitness Test के बाद नियुक्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि भर्ती प्रक्रिया को लगभग एक दशक बीत चुका है। ऐसे में अभ्यर्थियों को केवल अधिकतम आयु सीमा के आधार पर अवसर से वंचित नहीं किया जा सकता। अदालत ने संकेत दिया कि इन उम्मीदवारों को आयु सीमा में उचित छूट दी जानी चाहिए।
मामले में नियुक्ति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने से पहले अभ्यर्थियों का फिटनेस टेस्ट आयोजित किया जाएगा। इसके बाद पात्र पाए जाने वाले उम्मीदवारों की नियुक्ति पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

Key Highlights
सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड सिपाही भर्ती 2015 के 888 अभ्यर्थियों को राहत दी।
राज्य सरकार और जेएसएससी को नियुक्ति पर पुनर्विचार का निर्देश।
फिटनेस टेस्ट के बाद रिक्त पदों पर नियुक्ति की संभावना।
अभ्यर्थियों को अधिकतम आयु सीमा में छूट देने के संकेत।
13 जुलाई तक अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश।
Jharkhand Police Recruitment:राज्य सरकार और JSSC को दिए गए निर्देश
खंडपीठ ने राज्य सरकार और जेएसएससी को सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने तथा 13 जुलाई तक अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत इस मामले की अगली सुनवाई 15 जुलाई को करेगी।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता वात्सल्य विजय और अन्य अधिवक्ताओं ने पक्ष रखा। न्यायालय ने मामले की परिस्थितियों को देखते हुए अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा को प्राथमिकता दी।
Jharkhand Police Recruitment:दस साल पुराने विवाद को मिल सकती है दिशा
सिपाही भर्ती 2015 से जुड़े अभ्यर्थी लंबे समय से नियुक्ति की मांग कर रहे थे। सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश से अब 888 अभ्यर्थियों के लिए सरकारी सेवा में नियुक्ति का नया अवसर खुलता दिखाई दे रहा है। यदि राज्य सरकार और आयोग अदालत के निर्देशों के अनुरूप कार्रवाई करते हैं तो वर्षों से लंबित यह मामला निर्णायक मोड़ पर पहुंच सकता है।
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