पटना: PMCH के पूर्व प्रिंसिपल डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह से जुड़े मामले में एक नई बात सामने आई है। उन्हें सुरक्षा देने वाले सरकारी बॉडीगार्ड ने 23 जून, 2026 की घटनाओं के बारे में बयान दिया है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब स्वास्थ्य विभाग ने पूरे मामले की उच्च-स्तरीय जांच कराने का फैसला किया है।
सरकारी बॉडीगार्ड ने ड्यूटी के दौरान की गतिविधियों की जानकारी दी
सरकारी बॉडीगार्ड संजीत कुमार (कांस्टेबल नंबर 2317) ने बताया कि उन्हें डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह की सुरक्षा के लिए तैनात किया गया है। उनके अनुसार, 23 जून को वे हमेशा की तरह सुबह करीब 9:30 बजे डॉक्टर के घर और क्लिनिक पर ड्यूटी के लिए पहुंचे। उन्होंने बताया कि सुबह करीब 11:00 बजे, डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह अपने घर की ऊपरी मंजिल से नीचे आए और ग्राउंड फ्लोर पर बने प्राइवेट क्लिनिक में मरीजों को देखना शुरू किया।
शाम तक मरीजों का इलाज करने का दावा
बॉडीगार्ड के अनुसार, डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह ने शाम करीब 6:00 बजे तक लगातार मरीजों का इलाज किया। इस दौरान, इलाज के लिए लगभग 15 से 20 मरीज क्लिनिक आए। उन्होंने आगे बताया कि वे शाम 6:30 बजे तक ड्यूटी पर रहे और डॉक्टर इस पूरे समय क्लिनिक के अंदर ही रहे। बयान से पता चलता है कि डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह अपनी ड्यूटी के समय परिसर से बाहर नहीं गए और पूरा समय प्राइवेट क्लिनिक में मरीजों को देखने में बिताया।
स्वास्थ्य विभाग ने पहले ही उच्च-स्तरीय जांच शुरू कर दी है
स्वास्थ्य विभाग ने इस मामले की उच्च-स्तरीय जांच के आदेश पहले ही दे दिए हैं। विभाग का कहना है कि मामले से जुड़े सभी तथ्यों और उपलब्ध सबूतों की जांच की जाएगी। इस प्रक्रिया के तहत, संबंधित पक्षों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। सरकारी बॉडीगार्ड के बयान को अब जांच का हिस्सा माना जा रहा है। हालांकि, अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही निकलेगा।
जांच रिपोर्ट के बाद आगे की कार्रवाई होगी
स्वास्थ्य विभाग ने संकेत दिया है कि जांच के दौरान सभी संबंधित पक्षों का पक्ष सुना जाएगा। यदि आवश्यक हुआ, तो उपलब्ध दस्तावेजों, बयानों और अन्य सबूतों की भी बारीकी से जांच की जाएगी। इसके बाद ही विभाग आगे की प्रशासनिक कार्रवाई पर फैसला करेगा। फिलहाल, सरकारी बॉडीगार्ड के बयान ने इस मामले को एक नया मोड़ दे दिया है। अब जांच एजेंसियों के लिए यह बहुत ज़रूरी होगा कि वे सभी उपलब्ध तथ्यों की अच्छी तरह से जांच-पड़ताल करें और निष्पक्ष नतीजे पर पहुंचें। स्वास्थ्य विभाग ने यह भी साफ़ कर दिया है कि कोई भी अंतिम फ़ैसला जांच पूरी होने के बाद ही लिया जाएगा।
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