झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा के भाषा विवाद को सुलझाने के लिए गठित कमेटी में शिल्पी नेहा तिर्की और हफीजुल हसन को शामिल किया गया।
JTET Language Row रांची: झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी जेटेट में भाषा विवाद को लेकर गठित कमेटी का विस्तार किया गया है। राज्य सरकार ने कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की और अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री हफीजुल हसन को भी कमेटी में शामिल कर लिया है। इसके बाद समिति में मंत्रियों की संख्या बढ़कर सात हो गई है।
इससे पहले कमेटी में राधाकृष्ण किशोर, सुदिव्य कुमार सोनू, दीपिका पांडेय सिंह, योगेंद्र प्रसाद और संजय प्रसाद यादव शामिल थे। सरकार के इस फैसले को भाषा विवाद के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
JTET Language Row:प्रतिनिधित्व बढ़ाने के बाद हुआ फैसला
जानकारी के अनुसार नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने सुझाव दिया था कि कमेटी में अल्पसंख्यक और एसटी समुदाय का भी प्रतिनिधित्व होना चाहिए। इसके बाद मुख्यमंत्री ने शिल्पी नेहा तिर्की और हफीजुल हसन को समिति में शामिल करने की मंजूरी दे दी।
सरकार का मानना है कि अलग-अलग समुदायों के प्रतिनिधित्व से भाषा विवाद पर व्यापक सहमति बनाने में मदद मिलेगी।
Key Highlights
जेटेट भाषा विवाद कमेटी में दो नए मंत्रियों की एंट्री
शिल्पी नेहा तिर्की और हफीजुल हसन को मिली जिम्मेदारी
कमेटी में अब कुल सात मंत्री शामिल
मगही, भोजपुरी और अंगिका को क्षेत्रीय भाषा में शामिल करने पर होगी चर्चा
सीमावर्ती जिलों के विधायक लंबे समय से उठा रहे मांग
JTET Language Row:मगही, भोजपुरी और अंगिका पर होगी चर्चा
कमेटी के सदस्य राधाकृष्ण किशोर ने बताया कि जल्द ही समिति की अगली बैठक बुलाई जाएगी। इस बैठक में मगही, भोजपुरी और अंगिका भाषा को क्षेत्रीय भाषा की सूची में शामिल करने के मुद्दे पर विस्तार से चर्चा होगी।
गौरतलब है कि बिहार से सटे झारखंड के सीमावर्ती जिलों के कई विधायक और मंत्री लंबे समय से इन भाषाओं को क्षेत्रीय भाषा की सूची में शामिल करने की मांग कर रहे हैं।
JTET Language Row:भाषा विवाद बना हुआ है बड़ा मुद्दा
जेटेट में क्षेत्रीय भाषाओं को लेकर पिछले कुछ समय से राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस तेज है। कई संगठनों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि सीमावर्ती इलाकों में बड़ी संख्या में लोग मगही, भोजपुरी और अंगिका बोलते हैं, इसलिए इन्हें भी मान्यता मिलनी चाहिए।
वहीं दूसरी ओर कुछ संगठनों ने स्थानीय भाषाओं के संरक्षण को लेकर चिंता भी जताई है। ऐसे में सरकार की यह कमेटी इस विवाद के समाधान में अहम भूमिका निभा सकती है।
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