Chirag Paswan on Reservation: आरक्षण की समीक्षा नहीं होने देंगे! चिराग पासवान ने मांझी-सुमन के बयान पर दिया जवाब

Chirag Paswan on Reservation, पटना: देश और बिहार में आरक्षण की समीक्षा को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गयी है। इस मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान और बिहार के मंत्री संतोष सुमन की राय अलग-अलग सामने आयी है। संतोष सुमन और उनके पिता जीतन राम मांझी ने आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा की जरूरत बतायी है, जबकि चिराग पासवान ने आरक्षण को लेकर समीक्षा की किसी भी संभावना का विरोध किया है। आरक्षण को लेकर सामने आए इन अलग-अलग बयानों के बाद बिहार की राजनीति में इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गयी है।

संतोष सुमन ने आरक्षण की समीक्षा की जरूरत बतायी

पटना में एक कार्यक्रम के दौरान बिहार सरकार के मंत्री संतोष सुमन ने आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा की बात कही थी। उन्होंने कहा कि आरक्षण का प्रावधान बाबा साहेब ने समाज के सबसे पिछड़े वर्ग को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से किया था। संतोष सुमन के अनुसार, आरक्षण लागू होने के करीब 79 वर्ष बाद भी अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के अधिकांश लोग कई क्षेत्रों में पीछे हैं। ऐसे में यह देखना जरूरी है कि आरक्षण का लाभ समाज के सबसे पिछड़े लोगों तक किस तरह पहुंच रहा है। उन्होंने दलित समाज के भीतर सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक स्थिति में अंतर का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, यदि कुछ जातियों को आरक्षण का लाभ लगातार अधिक मिल रहा है और कुछ जातियां पीछे रह गयी हैं, तो सबसे पिछड़े वर्गों तक अवसर पहुंचाने के लिए उप-वर्गीकरण पर विचार किया जाना चाहिए।

जीतन राम मांझी ने बेटे की बात का किया समर्थन

संतोष सुमन के बयान पर उनके पिता और बिहार के नेता जीतन राम मांझी से सवाल किया गया तो उन्होंने अपने बेटे की बात का समर्थन किया। मांझी और सुमन का तर्क है कि आरक्षण का मूल उद्देश्य सामाजिक रूप से पिछड़े लोगों को आगे बढ़ाना था। उनके अनुसार, लंबे समय से आरक्षण का लाभ लेने के बाद भी यदि कुछ वर्ग पीछे रह गये हैं, तो व्यवस्था की समीक्षा पर विचार किया जाना चाहिए। इसी मुद्दे को लेकर अब चिराग पासवान की राय मांझी और संतोष सुमन से अलग नजर आ रही है।

चिराग पासवान बोले- आरक्षण की समीक्षा भी नहीं होने देंगे

चिराग पासवान ने आरक्षण की समीक्षा के विचार का विरोध किया है। उनका कहना है कि आरक्षण हटाने की बात तो दूर, इसकी समीक्षा भी नहीं होने दी जाएगी। चिराग ने आरक्षण के संवैधानिक आधार का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि कोई इसमें बदलाव करना चाहता है तो उसे संविधान में बदलाव की प्रक्रिया अपनानी होगी। उन्होंने कहा कि इसके लिए संसद में आकर संविधान में बदलाव करना होगा। चिराग पासवान ने विशेष रूप से एससी और एसटी आरक्षण को सामाजिक भेदभाव से जुड़ा बताया। उन्होंने कहा कि समाज में छुआछूत जैसी समस्याएं इसके आधार से जुड़ी रही हैं।

क्रीमी लेयर पर भी चिराग ने उठाये सवाल

एससी और एसटी आरक्षण में क्रीमी लेयर लागू करने की मांग पर भी चिराग पासवान ने सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि यदि किसी को लगता है कि क्रीमी लेयर लागू होनी चाहिए, तो पहले उसे खुद आरक्षण का लाभ छोड़ देना चाहिए। चिराग ने इस संदर्भ में जीतन राम मांझी का भी नाम लिया। उन्होंने कहा कि यदि मांझी क्रीमी लेयर लागू करने की मांग का समर्थन करते हैं, तो उन्हें पहले इस्तीफा देना चाहिए। चिराग ने यह भी कहा कि यदि मांझी स्वयं क्रीमी लेयर के दायरे में आते हैं, तो उन्हें और उनके बेटे को आरक्षण का लाभ छोड़ देना चाहिए।

बिहार में आरक्षण पर बढ़ी राजनीतिक बहस

आरक्षण की समीक्षा, उप-वर्गीकरण और क्रीमी लेयर को लेकर सामने आये इन बयानों ने बिहार में राजनीतिक बहस को नया मुद्दा दे दिया है। एक ओर मांझी और संतोष सुमन आरक्षण के लाभ को सबसे पिछड़े वर्गों तक पहुंचाने के लिए समीक्षा और उप-वर्गीकरण की जरूरत बता रहे हैं। दूसरी ओर चिराग पासवान आरक्षण के मौजूदा संवैधानिक आधार को लेकर किसी समीक्षा के पक्ष में नहीं हैं। उनके बयानों से साफ है कि इस मुद्दे पर अलग-अलग राजनीतिक नेताओं की प्राथमिकताएं और तर्क अलग हैं। आने वाले समय में आरक्षण की यह बहस बिहार की राजनीति में और चर्चा का विषय बन सकती है।

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