JSSC Teacher Exam 2026: JSSC Teacher Exam में बड़ा खेल? हाईकोर्ट ने दिए CID जांच और FIR के आदेश

JSSC Teacher Exam 2026, रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने JSSC की कक्षा 9 से 12 के माध्यमिक शिक्षक भर्ती परीक्षा में सामने आई अनियमितताओं को लेकर सख्त रुख अपनाया है। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने राज्य के मुख्य सचिव को अज्ञात आरोपियों के खिलाफ CID में FIR दर्ज कराने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि परीक्षा के पहले दौर के पेपर-2 में गड़बड़ी की बात स्वीकार की जा चुकी है, लेकिन केवल परीक्षा कराने वाली एजेंसी की रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई करना उचित नहीं माना जा सकता। अदालत के इस आदेश से शिक्षक भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच अब आपराधिक जांच के दायरे में आ गई है। हालांकि, कोर्ट ने पूरी भर्ती प्रक्रिया को रद्द करने या रोकने का आदेश नहीं दिया है।

2819 अभ्यर्थियों की दोबारा परीक्षा पर सवाल

हाईकोर्ट का यह फैसला कई रिट याचिकाओं की संयुक्त सुनवाई के दौरान आया। इन याचिकाओं में 2819 अभ्यर्थियों को दोबारा परीक्षा में शामिल होने के लिए दिए गए निर्देश को चुनौती दी गई थी। JSSC की ओर से कहा गया था कि कुछ अभ्यर्थियों की गतिविधियां संदिग्ध पाए जाने के बाद उनकी पुनर्परीक्षा कराई गई। हालांकि, अदालत ने रिकॉर्ड की जांच के दौरान पाया कि इस संबंध में कई महत्वपूर्ण तथ्य स्पष्ट नहीं किए गए हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि आयोग की ओर से पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई और कुछ मामलों में तकनीकी आधार पर्याप्त रूप से प्रमाणित नहीं हुए हैं। ऐसे में 2819 अभ्यर्थियों को दोबारा परीक्षा में शामिल कराने के फैसले पर न्यायिक जांच जरूरी हो गई।

परीक्षा एजेंसी की रिपोर्ट पर कोर्ट ने उठाए सवाल

अदालत ने परीक्षा संचालन की जिम्मेदारी संभालने वाली ठेकेदार एजेंसी की भूमिका पर भी गंभीर टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि जिस एजेंसी को परीक्षा आयोजित करने की जिम्मेदारी दी गई थी, उसी की रिपोर्ट के आधार पर उसके काम से जुड़े मामलों में निर्णय लेना उचित प्रक्रिया नहीं मानी जा सकती। अदालत ने “नो मैन कैन बी अ जज इन हिज ओन कॉज” के सिद्धांत का उल्लेख करते हुए कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए स्वतंत्र विशेषज्ञ एजेंसी की मदद ली जानी चाहिए। इससे परीक्षा में हुई तकनीकी गड़बड़ी और कथित अनियमितताओं के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सकेगा।

FIR दर्ज नहीं होने पर भी कोर्ट नाराज

हाईकोर्ट ने यह सवाल भी उठाया कि जब परीक्षा में अनधिकृत लॉगिन और संदिग्ध गतिविधियों की बात सामने आ चुकी थी, तो अब तक FIR क्यों दर्ज नहीं की गई। अदालत ने 2023 के झारखंड प्रतियोगी परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम के प्रावधानों का उल्लेख करते हुए आपराधिक कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया। कोर्ट ने कहा कि मामले में परीक्षा एजेंसी, परीक्षा केंद्र या संबंधित अधिकारियों समेत अन्य लोगों की भूमिका की जांच की आवश्यकता हो सकती है। इसी क्रम में अदालत ने मुख्य सचिव को अज्ञात आरोपियों के खिलाफ CID में FIR दर्ज कराने का निर्देश दिया है।

पूरी शिक्षक भर्ती प्रक्रिया नहीं होगी रद्द

हाईकोर्ट ने फिलहाल पूरी माध्यमिक शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को रद्द करने से इनकार कर दिया है। अदालत ने कहा कि केवल कुछ स्तर पर गड़बड़ी सामने आने के आधार पर पूरी चयन प्रक्रिया को खत्म करना उचित नहीं होगा, जब तक यह साबित न हो जाए कि पूरा परीक्षा तंत्र ही प्रभावित था। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि भर्ती के तहत होने वाली सभी नियुक्तियां CID जांच के अंतिम निष्कर्ष के अधीन रहेंगी। यानी जांच में यदि किसी अभ्यर्थी या प्रक्रिया से संबंधित गंभीर अनियमितता सामने आती है, तो उसका असर नियुक्ति पर पड़ सकता है।

दो सप्ताह में 2819 अभ्यर्थियों के अंक होंगे जारी

अदालत ने JSSC को 2819 अभ्यर्थियों के पहले दौर के पेपर-1 और पेपर-2 के अंक दो सप्ताह के भीतर जारी करने का निर्देश दिया है। ये वही अभ्यर्थी हैं, जिन्हें पुनर्परीक्षा में शामिल होने के लिए कहा गया था। कोर्ट ने यह भी कहा कि जांच के दौरान यदि कोई अभ्यर्थी निर्दोष पाया जाता है, तो उसके अधिकार सुरक्षित रहने चाहिए। साथ ही JSSC को परीक्षा से जुड़े सभी डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखने और CID की जांच में पूरा सहयोग करने का निर्देश दिया गया है। इस आदेश के बाद अब परीक्षा में कथित गड़बड़ी की स्वतंत्र जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि अनियमितताओं के लिए वास्तव में कौन जिम्मेदार था और 2819 अभ्यर्थियों की पुनर्परीक्षा का आधार कितना ठोस था।

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