रांची में केपीआई सर्वेक्षण के बाद 6,556 अपात्र राशन कार्डधारी चिह्नित। रातू प्रखंड के 115 लाभुकों को 3.5 करोड़ रुपये का नोटिस, 15 दिन में राशि जमा कर कार्ड सरेंडर करने का निर्देश।
Ration Card Action रांची: सरकारी राशन योजना का लाभ केवल वास्तविक जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचाने के उद्देश्य से रांची जिला प्रशासन ने अपात्र राशन कार्डधारियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। जिला आपूर्ति शाखा द्वारा कराए गए केपीआई सर्वेक्षण में रांची जिले के 6,556 ऐसे राशन कार्डधारी चिह्नित किए गए हैं, जो निर्धारित पात्रता पूरी नहीं करने के बावजूद राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) और प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेएवाई) का लाभ ले रहे थे।
Ration Card Action:रातू के 115 लाभुकों को 3.5 करोड़ रुपये का नोटिस
कार्रवाई के पहले चरण में रातू प्रखंड के 115 अपात्र राशन कार्डधारियों को लगभग 3.5 करोड़ रुपये का नोटिस जारी किया गया है। इनमें 45 ऐसे लाभुक शामिल हैं, जिनकी वार्षिक आय 6 लाख रुपये से अधिक है, जबकि 70 लाभुक चारपहिया वाहन के मालिक पाए गए हैं।
जिला प्रशासन ने प्रत्येक लाभुक पर लगभग 2.94 लाख रुपये से 3.19 लाख रुपये तक की वसूली निर्धारित की है।
Ration Card Action:15 दिन में राशि जमा कर राशन कार्ड करना होगा समर्पित
प्रशासन ने सभी नोटिस प्राप्त लाभुकों को 15 दिनों के भीतर निर्धारित राशि जमा करने और स्वेच्छा से अपना राशन कार्ड समर्पित करने का निर्देश दिया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर निर्देशों का पालन नहीं करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
Key Highlights:
रांची जिले में 6,556 अपात्र राशन कार्डधारी केपीआई सर्वेक्षण में चिह्नित।
रातू प्रखंड के 115 लाभुकों को करीब 3.5 करोड़ रुपये का नोटिस जारी।
45 लाभुकों की वार्षिक आय 6 लाख रुपये से अधिक, 70 के पास चारपहिया वाहन।
15 दिनों के भीतर राशि जमा कर राशन कार्ड समर्पित करने का निर्देश।
समय सीमा में कार्रवाई नहीं करने वालों पर प्राथमिकी दर्ज की जाएगी।
Ration Card Action:निर्देश नहीं मानने पर दर्ज होगी प्राथमिकी
जिला प्रशासन ने चेतावनी दी है कि यदि संबंधित लाभुक तय अवधि में राशि जमा नहीं करते और राशन कार्ड समर्पित नहीं करते हैं, तो उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जाएगी।
प्रशासन का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य अपात्र लोगों को सरकारी योजनाओं से बाहर कर वास्तविक गरीब और जरूरतमंद परिवारों तक खाद्यान्न का लाभ पहुंचाना तथा सार्वजनिक वितरण प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।
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