Spiritual Festival Guide:मकर संक्रांति  उत्तरायण से शुभता की शुरुआत और दान स्नान का महापर्व

Spiritual Festival Guide में जानिए मकर संक्रांति का धार्मिक महत्व, उत्तरायण का अर्थ, गंगासागर से लेकर खिचड़ी मेला तक पर्व की परंपराएं


Spiritual Festival Guide रांची: हिंदू पंचांग के अनुसार मकर संक्रांति नववर्ष का पहला प्रमुख पर्व माना जाता है, जिसे पूरे देश में विभिन्न रूपों में मनाया जाता है। इस दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश कर उत्तरायण हो जाते हैं, इसलिए इसे उत्तरायणी पर्व भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार उत्तरायण को देवताओं का दिन और दक्षिणायन को देवताओं की रात्रि माना गया है। सूर्य के उत्तरायण होने से जीवन में सकारात्मकता, ऊर्जा और शुभता का संचार होता है।

पौराणिक मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन ही गंगा राजा भगीरथ के पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होते हुए सागर में जा मिली थीं। इसी कारण इस दिन गंगासागर में महासमागम होता है और करोड़ों श्रद्धालु वहां स्नान और तर्पण करते हैं। यह तिथि पितरों के उद्धार के लिए भी अत्यंत पुण्यकारी मानी जाती है।

Spiritual Festival Guide:पौराणिक कथाओं से जुड़ा मकर संक्रांति का महत्व

शास्त्रों के अनुसार इस दिन सूर्य देव अपने पुत्र शनि से मिलने उनके घर यानी मकर राशि में जाते हैं, इसलिए इसे आत्मशुद्धि और पुण्य संचय का श्रेष्ठ काल कहा गया है। महाभारत काल में गंगापुत्र भीष्म पितामह ने इसी पावन तिथि को शरीर त्यागने का वर चुना था। आधुनिक भारत के महान विचारक स्वामी विवेकानंद का जन्म भी इसी दिन हुआ था, जिससे इस पर्व का महत्व और बढ़ जाता है।

पुराणों में यह भी वर्णित है कि भगवान विष्णु ने इसी दिन मय असुर का वध कर युद्ध की समाप्ति की घोषणा की थी। एक अन्य कथा के अनुसार यशोदा ने श्रीकृष्ण को पुत्र रूप में पाने के लिए इसी दिन व्रत किया था।


Key Highlights

मकर संक्रांति से सूर्य उत्तरायण होते हैं और शुभता का आरंभ होता है

इस दिन गंगासागर में महासमागम और पितृ तर्पण का विशेष महत्व

भीष्म पितामह और स्वामी विवेकानंद से जुड़ा है यह पावन दिन

तिल स्नान, तिल दान और अन्न दान की प्राचीन परंपरा

देशभर में मेले, खिचड़ी उत्सव और पतंगबाजी का आयोजन


Spiritual Festival Guide:स्नान दान और तिल का विशेष महत्व

मकर संक्रांति को दान का महापर्व कहा गया है। इस दिन नदी तट, कुंड, सरोवर और संगम में स्नान कर दान करने का विशेष महत्व बताया गया है। अन्न, वस्त्र, घी, कंबल, चरण पादुका और विशेष रूप से तिल का दान करने की परंपरा है। मान्यता है कि इस दिन दिया गया दान सौ गुना होकर पुण्य के रूप में लौटता है।

तिल से स्नान, तिल का दान और तिल का ही प्रथम भोजन करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है, जो शरीर और आत्मा दोनों की शुद्धि का प्रतीक मानी जाती है।

Spiritual Festival Guide: देशभर में मेलों और उत्सवों की धूम

मकर संक्रांति भारतीय फसल चक्र से भी जुड़ा पर्व है, जिसमें अन्न और जल को जीवन का आधार माना गया है। इसी दिन गुरु गोरखनाथ का खिचड़ी मेला, गंगासागर मेला, जगन्नाथ पुरी की नवांक यात्रा, तीर्थराज प्रयाग का माघ मेला, मंदार महोत्सव, कोणार्क मेला और देशभर में पतंगबाजी जैसे उत्सव मनाए जाते हैं।

बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर वर्ग के लोग किसी न किसी रूप में इस पर्व में शामिल होते हैं और सामाजिक तथा धार्मिक एकता का संदेश देते हैं।

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