रांची : पलामू के दिवंगत दारोगा लालजी यादव की संदिग्ध मौत का मामला अब झारखंड हाईकोर्ट पहुंच चुका है. इस पूरे प्रकरण की जांच सीबीआई से कराने की मांग की गई है. इसको लेकर दिवंगत लालजी यादव के भाई संजीव यादव ने झारखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है और एक क्रिमिनल रिट दायर की है.
उन्होंने क्रिमिनल रिट में पलामू के एसपी, डीएसपी वर्तमान थाना प्रभारी, डीटीओ और अन्य लोगों को बनाया है. प्राथी के द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि यह मामला काफी गंभीर है और जिन लोगों पर आरोप लग रहे हैं वह प्रभावशाली व्यक्ति हैं. ऐसे में पुलिस द्वारा निष्पक्ष जांच की संभावना कम है. इसलिए इस पूरे प्रकरण की जांच सीबीआई से कराए. परिजनों ने सीबीआई जांच की गुहार झारखंड हाईकोर्ट से लगायी है.
अधिवक्ता राजीव कुमार की ओर से दायर इस जनहित याचिका में पलामू एसपी चंदन सिन्हा, पलामू डीटीओ अनवर हुसैन तथा बिश्रामपुर एसडीपीओ सुरजीत कुमार को पार्टी बनाया गया है. याचिका में मंत्री मिथिलेश ठाकुर उनके भाई विनय ठाकुर उर्फ बीनू ठाकुर तथा बालू व्यवसायी बीडी प्रसाद तथा अन्य लोगों के भी नाम इस याचिका में दर्शाया गया है. याचिका में संजीव यादव ने मांग की है कि खनन माफिया के दबाव में लालजी यादव की हत्या हुई है, जिसमें पलामू एसपी चंदन सिन्हा का हाथ है.
फोन रिकॉर्डिंग और सबूत भी कराए गए उपलब्ध
रूपा तिर्की हत्याकांड का हवाला देते हुए याचिका में खनन माफियाओं का तथा सत्ता में बैठे प्रभावी व्यक्ति के नाम का उल्लेख है. याचिका में मंत्री मिथिलेश ठाकुर द्वारा एक खास कांड संख्या का उल्लेख करते हुए लालजी यादव हत्याकांड मामला को दिग्भ्रमित करने का प्रयास बताया गया है. न्यायालय को इस जनहित याचिका के माध्यम से कुछ फोन रिकॉर्डिंग और सबूत भी उपलब्ध कराए गए हैं. अधिवक्ता राजीव कुमार का कहना है कि लालजी यादव हत्याकांड रूपा तिर्की हत्याकांड के जैसा ही है. खनन माफियाओं और सत्ता में बैठे भ्रष्ट लोग अवैध खनन के लिए पुलिस पदाधिकारियों को दबाव बनाकर लाभ कमाना चाहते हैं और जो उनकी बात नहीं मानता उनका हाल रूपा तिर्की और लाल जी यादव के जैसा हो जाता है. सीबीआई जांच में इस हत्याकांड के सभी आरोपी जरूर पकड़े जाएंगे.
निलंबन के चार दिन बाद दारोगा ने की आत्महत्या
गौरतलब है कि पलामू जिले के नावाबाजार थाने के दारोगा लालजी यादव ने अपने सस्पेंशन के चार दिन बाद 10 जनवरी (सोमवार) की रात थाना परिसर में आत्महत्या कर ली. घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस उपमहानिरीक्षक राजकुमार लकड़ा व एसपी चंदन सिन्हा थाने में पहुंचे और कारणों की जांच शुरू की. इधर, आस-पास के लोग थाने के बाहर जमा हो गए और सस्पेंशन ऑर्डर जारी करने वाले एसपी सिन्हा के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी. लोगों ने घंटों सड़क जाम रखा. कमरे से सुसाइड नोट भी नहीं मिला है. मूल रूप से साहिबगंज के रहनेवाले लालजी अपने पीछे पत्नी पूजा, दो छोटे बच्चे छोड़ गए हैं.
क्यों हुआ था सस्पेंशन
5 जनवरी की रात पलामू के परिवहन पदाधिकारी अनवर हुसैन ने एसपी सिन्हा से शिकायत की थी कि जब्त वाहनों को नावाबाजार के थाना प्रभारी लालजी यादव नहीं ले रहे हैं. एसपी ने दारोगा लालजी को सहयोग का निर्देश दिया. फिर भी उन्होंने ऐसा नहीं किया. इसके बाद एसपी ने छह जनवरी को दारोगा लालजी को सस्पेंड कर दिया.
रिपोर्ट : प्रोजश दास
क्या सीबीआई सुलझा पाएगी कथित बकोरिया हत्याकांड का रहस्य? कैम्प लगा कर रही है मामले की जांच
सहेली बनी ‘दारोगा’ तो खुशी के मारे बीच सड़क पर पुश अप करने लगी सहेलियां

















