पटना : बिहार सरकार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत द्वारा जल संसाधन विभाग की दो महत्वाकांक्षी परियोजनाओं ‘उत्तर कोयल जलाशय परियोजना’ (लागत : 1367.61 करोड़ रुपए) और ‘मंडई वीयर एवं नहर प्रणाली’ (लागत : 232.83 करोड़ रुपए) की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक में मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार की प्राथमिकता किसानों को समय पर सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना है, अतः निर्माण कार्यों में किसी भी प्रकार की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बैठक में जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिव, गया के जिलाधिकारी, संबंधित जिलों के अभियंता प्रमुख, WAPCOS के प्रतिनिधि तथा अन्य वरीय अधिकारी उपस्थित थे।
परियोजनाओं की वर्तमान प्रगति
उत्तर कोयल जलाशय परियोजना – समीक्षा में पाया गया कि राइट मेन कैनाल (RMC) की कुल भौतिक प्रगति 31.17 फीसदी है, जबकि कुल 77.69 किमी लंबाई में से अधिकांश हिस्सों में कार्य जारी है, जिसकी समग्र प्रगति 57.09 फीसदी है। औरंगाबाद और गया जिलों में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया अंतिम चरण में है।
मंडई वीयर एवं नहर प्रणाली – इस परियोजना के तहत बायां मुख्य नहर प्रणाली (Left H/R) में 63.50 फीसदी और कररूआ डिस्ट्रीब्यूटरी में 66.05 फीसदी कार्य पूर्ण हो चुका है। पिछले एक सप्ताह में विभिन्न घटकों में 2.40 फीसदी तक की उत्साहजनक प्रगति दर्ज की गई है।

समीक्षा के उपरांत मुख्य सचिव ने अधिकारियों और कार्यदायी संस्थाओं को निम्नलिखित दिशा-निर्देश दिए
1. खरीफ मौसम का लक्ष्य – आगामी खरीफ मौसम की महत्ता को देखते हुए दोनों परियोजनाओं की सभी महत्वपूर्ण संरचनाओं का निर्माण हर हाल में समय सीमा के भीतर पूर्ण किया जाए। नहर प्रणालियों को इस प्रकार तैयार किया जाए कि किसानों को तुरंत सिंचाई का लाभ मिल सके।
2. संसाधनों में तत्काल वृद्धि – मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि कार्यस्थल पर मैनपावर और मशीनों (Excavators, Tippers, Rollers) की संख्या तुरंत बढ़ाई जाए। स्वीकृत पदों और उपलब्ध संसाधनों के बीच के अंतर को तत्काल भरने के निर्देश दिए गए ताकि गति प्रभावित न हो।
3. भूमि अधिग्रहण एवं भुगतान – औरंगाबाद के शेष 42 रैयतों की भूमि रजिस्ट्री इसी सप्ताह पूर्ण करने का लक्ष्य दिया गया। साथ ही, मंडई परियोजना के अंतर्गत बकास्त एवं आम गैरमजरूआ भूमि के हस्तांतरण में तेजी लाने और परियावाँ, बंधुगंज एवं मईयावा जैसे मौजों में रैयतों को प्राथमिकता के आधार पर भुगतान सुनिश्चित करने को कहा गया।
4. गुणवत्ता एवं निगरानी – निर्माण की गुणवत्ता से समझौता किए बिना गति बढ़ाने पर जोर दिया गया। विभाग के वरीय अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे साप्ताहिक आधार पर भौतिक प्रगति की निगरानी करें और तकनीकी समस्याओं का मौके पर ही (On-the-spot) समाधान निकालें।

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