पटना: चंपारण सत्याग्रह के सूत्रधार पंडित राजकुमार शुक्ल की 96वीं पुण्यतिथि के अवसर पर उनके परिजनों ने भारत रत्न देने की मांग की है। मंगलवार को पंडित राजकुमार शुक्ल स्मृति संस्थान कार्यालय परिसर में उनकी 96वीं पुण्यतिथि समारोह आयोजित की गई। पुण्यतिथि समारोह का उद्घाटन पंडित शुक्ल की दोहित्री वीणा देवी और लोजपा(रा) के मुख्य प्रवक्ता डॉ राजेश भट्ट ने किया। इस दौरान उपस्थित लोगों ने पंडित राजकुमार शुक्ल की तैलचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
कार्यक्रम के दौरान पंडित राजकुमार शुक्ल की दौहित्री वीणा देवी ने एक बार फिर अपनी मांग दुहराते हुए कहा कि मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी से आगामी 23 अगस्त को पंडित शुक्ल की 150वीं जयंती पर भारत रत्न से सम्मानित करने की मांग करती हूं। वीणा देवी ने कहा कि राज्य की सरकार ने चंपारण सत्याग्रह शताब्दी वर्ष के ऐतिहासिक मौके पर 2017 में शताब्दी वर्ष के रूप में मन कर चंपारण सत्याग्रह को फिर से जीवंत कर दिया। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 2018 में पंडित राजकुमार शुक्ल को भारत रत्न देने की अनुशंसा केंद्र सरकार भेजी थी जो अब तक केंद्र सरकार के पास लंबित है।
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इस अवसर पर लोक जनशक्ति पार्टी के मुख्य प्रवक्ता डॉ राजेश भट्ट ने उनके ऐतिहासिक 150वीं जयंती वर्ष के अवसर पर राज्य सरकार से आगामी 23 अगस्त 2025 को राजकीय समारोह आयोजित करने, उनकी जयंती दिवस के अवसर पर राजकीय अवकाश घोषित करने और राजधानी पटना के किसी मुख्य चौराहा पर उनकी भव्य आदमकद प्रतिमा को स्थापित करने की मांग की। डाॅ भट्ट ने कहा कि स्वाधीनता संग्राम की पहली लड़ाई चंपारण सत्याग्रह में किए गए उनके बहुमूल्य योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता।
पंडित राजकुमार शुक्ल के अथक प्रयास और अनुनय विनय से ही राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी का बिहार की पावन धरती पर पहली बार पदार्पण हुआ और पंडित शुक्ल ने ही उन्हें अपने पत्र के माध्यम से पहली बार “महात्मा” से विभूषित किया था जो प्रमाणिक है। चंपारण सत्याग्रह का नेतृत्व कर महात्मा गांधी स्वाधीनता संग्राम के राष्ट्रीय फलक पर छा गए और देश के राष्ट्रपिता बन जाते हैं वहीं पंडित शुक्ल गुमनामी के अंधेरों में खो जाते हैं आखिर ऐसे महामानव को कृतज्ञ राष्ट्र कब उन्हें सम्मानित करेगा।
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इस ऐतिहासिक वर्ष पर अगर सरकार उन्हें सम्मानित करती है तो यह उन सभी गुमनाम बलिदानियों का सम्मान होगा जिन्होंने स्वाधीनता संग्राम की प्रथम लड़ाई चंपारण सत्याग्रह में अपनी जान की कुर्बानी दी। डाॅ भट्ट ने संस्थान की मांगों को उचित ठहराया और पंडित शुक्ल के सम्मान को लेकर मांगों पर केंद्र व राज्य सरकार से अपेक्षित विचार करने की मांग की। उक्त अवसर पर पंडित शुक्ल की दोहित्री वीणा देवी, राजेश भट्ट, अनंत राय, मनोज कुमार राणा, कमलेश कुमार, अखिलेश्वर शर्मा, संध्या भट्ट, कुमार विनय, बादशाह राय, माधव मुरारी शर्मा, निशांत कुमार, अंगद कुमार, आशुतोष कुमार, समीर शंकर, प्रतीक भट्ट, ईशान अतुल्य ने संबोधित किया।
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