रांची: झारखंड हाईकोर्ट में दायर रिट याचिका पर मंगलवार को सुनवाई हुई जहां नगर निकायों का चुनाव जल्दी से कराने की मांग की गई है। इस मामले में राज्य सरकार और रांची नगर निगम ने जवाब दाखिल नहीं किया है, जिसके कारण कोर्ट ने उन पर नाराजगी जताते हुए 5 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है।
कोर्ट ने इन दोनों को 3 सप्ताह के अंदर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं और मामले की सुनवाई 20 जुलाई को तय की है। प्रार्थी ने सुनवाई के दौरान यह दावा किया है कि जैसे पंचायत चुनाव के बाद भी पंचायत प्रतिनिधियों को अधिकार दिए गए थे, ठीक उसी तरह निकाय चुनाव की अवधि समाप्त होने के बाद भी पार्षदों को उनके अधिकार दिए जाने चाहिए, जब तक निकाय चुनाव नहीं हो जाता।
उन्होंने यह भी दावा किया है कि निकाय चुनाव नहीं होना सरकारी मिशनरी की ब्रेकडाउन को प्रदर्शित करता है। हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति राजेश शंकर ने मामले की सुनवाई की है। प्रार्थी ने रांची नगर निगम में प्रशासक नियुक्त करने के आदेश को भी चुनौती दी है।
पूर्व पार्षद रोशनी खलखो सहित अन्यों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है, जहां राज्य में जल्द से जल्द निकायों के चुनाव का आयोजन किया जाए। चुनाव होने तक वर्तमान पार्षद को वैकल्पिक व्यवस्था के तहत तदर्थ रूप में दायित्व का निर्वहन करने की मांग है, और इसके लिए कोर्ट से आदेश देने की अपील की है।
राज्य सरकार ने अपने निर्णय में तय किया है कि 34 निकाय परिषद के निर्वाचित प्रतिनिधियों का कार्यकाल समाप्त कर सभी शक्तियां और कार्य प्रशासन को सौंपा जाएगा। अब निकायों में पदस्थापित नगर आयुक्त, अपर नगर आयुक्त या कार्यालय पदाधिकारी अगले आदेश तक प्रशासक के रूप में कार्य करेंगे।
वे आवश्यकता पर आधारित निर्णय लेंगे और नगर विकास एवं आवास विभाग से सलाह ले सकते हैं। निकायों के चुनाव न होने पर यह व्यवस्था शुक्रवार से प्रभावी हो गई है। राज्य में निकाय चुनाव 27 अप्रैल तक पूरा होना चाहिए था, लेकिन कई कारणों से चुनाव संपन्न नहीं हो सका है।

















