मंजेश कुमार
नई दिल्ली: करीब 12 वर्षों के बाद राज्य में आर्थिक गणना कराये जाने की कवायद शुरू कर दी गई है। आर्थिक गणना राष्ट्रीय गणना के साथ ही कराया जायेगा। मामले में केंद्र सरकार के सचिव समिति ने फैसला ले लिया है। वित्त मंत्रालय ने संसद की स्थायी समिति को सूचित कर दिया है कि सातवीं आर्थिक गणना के परिणाम जारी नहीं करने का फैसला लिया गया है क्योंकि 2019 में हुए सातवें आर्थिक गणना की रिपोर्ट को आधे से अधिक राज्यों ने मंजूरी ही नहीं दी। अब जीएसटी युग में यह पहला आर्थिक गणना होगा।
उम्मीद जताई जा रही है कि अप्रैल 2025 से देश में आठवीं आर्थिक गणना शुरू कर दी जाएगी। आर्थिक गणना में गैर कृषि क्षेत्र के प्रतिष्ठानों और उनके कर्मचारियों की गणना की जाएगी और इसका मिलान जीएसटी दे रही कंपनियों, प्रतिष्ठानों और ईपीएफओ में दर्ज कर्मचारियों की संख्या से की जाएगी। आर्थिक गणना में गैर कृषि क्षेत्र की सभी गतिविधियाँ शामिल की जायेंगी। इस दौरान यह देखा जायेगा कि रजिस्टर्ड इकाइयों में वास्तव में कितनी प्रतिष्ठानें चल रही हैं और वहां कितने लोग काम कर रहे हैं।
बता दें कि देश में आर्थिक गणना की शुरुआत 1977 में हुई थी और इसके बाद 1980, 1990, 1998, 2005 में हुई। छठी आर्थिक गणना 2013 में कराई गई थी जिसका रिपोर्ट 2016 में सार्वजनिक की गई। जबकि सातवीं आर्थिक गणना वर्ष 2019 में कराई गई जिसके रिपोर्ट की पुष्टि आधे से अधिक राज्यों ने नहीं की जिसकी वजह से इसका रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई। अब सचिवों की समिति ने फैसला लिया है कि सातवीं आर्थिक गणना की रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की जाएगी। अब 2025 में आठवीं आर्थिक गणना कराई जाएगी।
इस गणना के माध्यम से एक राष्ट्रीय बिजनेस रजिस्टर तैयार किया जो अंतरराष्ट्रीय प्रथाओं के अनुकूल होगा। इसमें तमाम तरह की आर्थिक गतिविधियों का विवरण शामिल किया जायेगा और यह भी देखा जायेगा कि राज्य, जिला, गांव और वार्ड स्टार पर कितनी बिज़नस चल रहे हैं। इस दौरान प्रतिष्ठानों के कर्मचारियों की भी गिनती की जाएगी। आर्थिक गणना में करीब 10 लाख कर्मचारी और चार लाख सुपरवाइजर को लगाया जायेगा। जनगणना के ब्लॉक्स को ही आर्थिक गणना की इकाई के तौर पर लिया जायेगा।
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