दिल्ली बुलाए गए उपेंद्र, BJP के बड़े नेताओं से हो सकती है मुलाकात, RLM के मर्जर की चर्चा

पटना : राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के राष्ट्रीय अध्यक्ष व राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा दिल्ली के लिए रवाना हो गए हैं। दिल्ली में वह भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बड़े नेताओं से मुलाकात कर सकते हैं। राज्यसभा चुनाव को लेकर चर्चा हो सकती है। सूत्रों की हवाले से खबर आ रही है कि उनकी पार्टी आरएलएम का बीजेपी में विलय हो सकती है। बता दें कि बिहार में पांच सीटों के लिए राज्यसभा का चुनाव होना है जिसमें एक सीट उपेंद्र कुशवाहा के भी है।

राज्यसभा भेजे जा सकते हैं उपेंद्र कुशवाहा

सियासी सूत्रों के अनुसार, भाजपा की ओर से यह संकेत दिया गया है कि यदि रालोमो का भाजपा में विलय होता है तो कुशवाहा को राज्यसभा भेजने में सहयोग किया जा सकता है। यही बिंदु इस पूरे घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण पहलू बनकर उभरा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा एक तीर से दो निशाने साधने की रणनीति पर काम कर रही है। एक ओर वह राज्यसभा की सीट पर अपने भरोसेमंद सहयोगी को भेजकर सदन में संख्या संतुलन मजबूत करना चाहती है। वहीं दूसरी ओर रालोमो के सामाजिक आधार विशेषकर पिछड़े वर्गों को सीधे अपने संगठन में समाहित करना चाहती है।

उपेंद्र कुशवाहा ने JDU छोड़ने के दौरान सार्वजनिक रूप से कहा था कि वे गठबंधन कर सकते हैं

हालांकि यह राह आसान नहीं दिखती। उपेंद्र कुशवाहा ने जदयू छोड़ने के दौरान सार्वजनिक रूप से कहा था कि वे गठबंधन कर सकते हैं, लेकिन भाजपा की सदस्यता स्वीकार नहीं करेंगे। उनका यह बयान आज भी राजनीतिक चर्चाओं में उद्धृत किया जाता है। ऐसे में यदि वे विलय के प्रस्ताव को स्वीकार करते हैं तो विपक्ष इसे उनके पुराने रुख से जोड़कर सवाल उठा सकता है।

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राज्यसभा में वापसी पर हो सकता है संकट

दूसरी तरफ, यदि कुशवाहा प्रस्ताव ठुकराते हैं तो राज्यसभा में उनकी वापसी को लेकर अनिश्चितता बढ़ सकती है। पांच मार्च की नामांकन तिथि नजदीक होने से राजनीतिक दबाव और भी बढ़ गया है। यही वजह है कि इस पूरे घटनाक्रम को केवल दलों के विलय के प्रस्ताव के रूप में नहीं, बल्कि राज्यसभा चुनाव से जुड़ी रणनीतिक चाल के रूप में देखा जा रहा है। फिलहाल उपेंद्र कुशवाहा की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन यह स्पष्ट है कि आने वाले कुछ दिन न केवल रालोमो के भविष्य, बल्कि बिहार की व्यापक राजनीतिक दिशा के लिए भी निर्णायक साबित हो सकते हैं। भाजपा का यह दांव कितना सफल होता है, इसका जवाब जल्द ही सामने आ सकता है।

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